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गांव की मिट्टी लेकर साउथ अफ्रिका लौटा परिवार
Updated Fri, 29 Dec 2017 11:01 PM IST
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जमानिया (गाजीपुर)। अपना गांव छोड़कर साउथ अफ्रिका में सालों पहले बस जाने वाले परिवार के सदस्यों को 140 वर्ष बाद अपने गांव की याद आई। फिर क्या था, उनकी गांव आने की लालसा बढ़ती ही गई है। आखिरकार गुरुवार की शाम पूरा परिवार अपने गांव दरौली पहुंचा। गांववासियों से अपने पिता का परिचय बताते हुए अपना परिचय कराया। इसके बाद पूरा गांव उनकी स्वागत में जुट गया। गांववासियों संग घंटों खुशियां बांटने के बाद गांव की मिट्टी, कुछ फूल और फलदार पौधों को लेकर वह साउथ अफ्रिका के लिए रवाना हो गए।
दरौली गांव निवासी रामफूल यादव 20 वर्ष की अवस्था में जमानिया से पानी वाले जहाज से साउथ अफ्रिका चले गए थे, वहां जाकर वह वहीं के मूल निवासी हो गए। शादी कर परिवार के साथ वहीं रहने लगे। निधन से पहले रामफूल यादव अक्सर बीबी-बच्चों के बीच अपने गांव की चर्चा करते हुए उन्हें गांव के संबंध में बताते थे। इससे उनके परिजनों के मन में भी गांव को देखने की लालसा होती थी। आखिरकार गुुरुवार की शाम रामफूल यादव के पुत्र एडी बोधा, उनकी पत्नी, पुत्र, सास, श्वसुर के साथ ही परिवार के अन्य सदस्य वाहन से अपने गांव दरौली पहुंचे। गांववासी उन्हें कौतुहल भरी नजरों से देखने लगे। रामफूल यादव के परिजनों ने गांव के कुछ बुजुर्गों के सामने उनका लिया तो कुछ बुजुर्गों को भी रामफूल यादव की याद आ गई। परिजनों ने गांववासियों के साथ गांव घूमा। खेतों की हरियाली देखने के साथ ही खुले वातावरण का आनंद उठाया। गांववासियों ने भी आवभगत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा, विदेशी मेहमान के गुण के साथ ही दही का स्वाद भी चखाया। विदेशी मेहमानों ने गांववासियों के साथ ढाई घंटे बिताया। इस दौरान गांववासियों में मिष्ठान का वितरण करते हुए खुशियां बांटी। गांव की मिट्टी और कुछ फूल और फल के पौधे लेकर यहां से रवाना हो गए। 140 वर्ष बाद रामफूल यादव के परिवार के गांव में आने की लोगों में चर्चा होती रही।
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दरौली गांव निवासी रामफूल यादव 20 वर्ष की अवस्था में जमानिया से पानी वाले जहाज से साउथ अफ्रिका चले गए थे, वहां जाकर वह वहीं के मूल निवासी हो गए। शादी कर परिवार के साथ वहीं रहने लगे। निधन से पहले रामफूल यादव अक्सर बीबी-बच्चों के बीच अपने गांव की चर्चा करते हुए उन्हें गांव के संबंध में बताते थे। इससे उनके परिजनों के मन में भी गांव को देखने की लालसा होती थी। आखिरकार गुुरुवार की शाम रामफूल यादव के पुत्र एडी बोधा, उनकी पत्नी, पुत्र, सास, श्वसुर के साथ ही परिवार के अन्य सदस्य वाहन से अपने गांव दरौली पहुंचे। गांववासी उन्हें कौतुहल भरी नजरों से देखने लगे। रामफूल यादव के परिजनों ने गांव के कुछ बुजुर्गों के सामने उनका लिया तो कुछ बुजुर्गों को भी रामफूल यादव की याद आ गई। परिजनों ने गांववासियों के साथ गांव घूमा। खेतों की हरियाली देखने के साथ ही खुले वातावरण का आनंद उठाया। गांववासियों ने भी आवभगत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा, विदेशी मेहमान के गुण के साथ ही दही का स्वाद भी चखाया। विदेशी मेहमानों ने गांववासियों के साथ ढाई घंटे बिताया। इस दौरान गांववासियों में मिष्ठान का वितरण करते हुए खुशियां बांटी। गांव की मिट्टी और कुछ फूल और फल के पौधे लेकर यहां से रवाना हो गए। 140 वर्ष बाद रामफूल यादव के परिवार के गांव में आने की लोगों में चर्चा होती रही।
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