{"_id":"5cb76438bdec2214374a9108","slug":"191555522616-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हवनकुंड में डाल दें बुराइयों की आहूति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हवनकुंड में डाल दें बुराइयों की आहूति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। मानव धर्म प्रसार समाजसेवी संस्था श्री गंगा आश्रम बयेपुर देवकली में मानवता अभ्युदय महायज्ञ चल रहा है। इसमें हवन-पूजन के साथ ही श्रीराम चरित मानस के नवाह्न परायण के पाठ का भी हो रहा है। इस मौके पर केदारजी ने कहा कि संस्था के संस्थापक एवं प्रवर्तक ब्रह्मलीन संत श्री गंगाराम दास जी महाराज ने लुप्त प्राय सत्य, न्याय, धर्म की पुनर्स्थापना के लिए मानव धर्म प्रसार समाजसेवी संस्था की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि संत महात्माओं का आगमन मानव समाज के कल्याण के लिए होता है। कथा वाचक ध्रुव महाराज ने कहा कि व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने संयम के हवन कुंड में सुकर्मों के द्वारा अपनी सारी बुराइयों की आहुति दे दे। अन्य संतों ने कहा कि बड़े भाग्य से यह मानव तन प्राप्त हुआ है। विवेकवान पुरुष भगवान की शरण में जाता है। संतों के माध्यम से जीव भगवान को प्राप्त कर सकता है। संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में सत्संग अनिवार्य है। सत्संग ही आनंद और कल्याण का मूल है। जहां-जहां श्रीराम कथा होती है, वहां-वहां हनुमान जी किसी न किसी रूप में उपस्थित रहते हैं। आज समाज के लोग सत्ता और संपत्ति को पाने के लिए तत्पर हैं लेकिन संत महापुरुषों का लक्ष्य शांति और भक्ति की प्राप्ति करना है। इस मौके पर सत्यप्रकाश आचार्य, सदानंद, भोला, रामअवध, रामानंद, मोहन, अजय, सुदामा, प्रेमचंद, रामानंद, लक्ष्मीकांत आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि संत महात्माओं का आगमन मानव समाज के कल्याण के लिए होता है। कथा वाचक ध्रुव महाराज ने कहा कि व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने संयम के हवन कुंड में सुकर्मों के द्वारा अपनी सारी बुराइयों की आहुति दे दे। अन्य संतों ने कहा कि बड़े भाग्य से यह मानव तन प्राप्त हुआ है। विवेकवान पुरुष भगवान की शरण में जाता है। संतों के माध्यम से जीव भगवान को प्राप्त कर सकता है। संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र दास महाराज ने कहा कि व्यक्ति के जीवन में सत्संग अनिवार्य है। सत्संग ही आनंद और कल्याण का मूल है। जहां-जहां श्रीराम कथा होती है, वहां-वहां हनुमान जी किसी न किसी रूप में उपस्थित रहते हैं। आज समाज के लोग सत्ता और संपत्ति को पाने के लिए तत्पर हैं लेकिन संत महापुरुषों का लक्ष्य शांति और भक्ति की प्राप्ति करना है। इस मौके पर सत्यप्रकाश आचार्य, सदानंद, भोला, रामअवध, रामानंद, मोहन, अजय, सुदामा, प्रेमचंद, रामानंद, लक्ष्मीकांत आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।
विज्ञापन