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धीरे-धीरे नहीं, तेजी से बढ़ रही सर्दी के बेदर्दी
Updated Thu, 28 Dec 2017 11:21 PM IST
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गाजीपुर। तीसरे दिन लगातार गुरुवार को भी जिले में कोहरा का प्रभाव जारी रहा। कोहरा के बीच धीरे-धीरे नहीं, तेजी से सर्दी की बेबर्दी बढ़ती जा रही है। कोहरा की वजह से वाहनों की रफ्तार भी काफी धीमी हो गई। कड़ाके की ठंड से हर कोई बेहाल होने लगा है। इससे राहत के लिए लोग गर्म कपड़ों के साथ ही कोई रूम हीटर तो कोई अलाव का सहारा ले रहा है। ठंड से बच्चों की चंचलता भी घरों में कैद हो गई है।
सोमवार की रात से अचानक कोहरे का जबरदस्त प्रभाव शुरू हो गया। कोहरा के घना होने का आलम यह था कि चार कदम की वस्तु भी नहीं दिखाई दे रही थी। दूसरे दिन 12 बजे तक घने कोहरा का प्रभाव बना रहा। कोहरा का यह क्रम लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहा। बुधवार की रात 10 बजे के बाद कोहरा का क्रम शुरु हो गया, जो सुबह 9 बजे तक बना रहा। रात की कौन कहे, सुबह भी लाइटों के सहारे वाहन सड़कों पर रेंगते रहे। धूप तो निकली, लेकिन गलन की वजह से इसका प्रभाव नहीं था। सिर्फ लोगों को इस बात का संतोष था कि वह धूप के बीच बैठे है। सुबह और शाम की कौन कहे, दिन में भी लोग अलाव तापते हुए नजर आए। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे ठंड के साथ ही गलन में भी वृद्धि होती गई।
शाम होते ही लोग घरों में दुबक गए। जिन लोगों के पास हीटर की सुविधा इसके सहारे और जिनते के घरों में अलाव जलाने की व्यवस्था थी, वह उसके सहारे ठंड से राहत पाने में जुट गए। ठंड से बच्चों का बचपन भी घरों में कैद हो गया है। लाल को ठंड की नजर न लगे, इस आशंका से परिवार के लोग उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। उन्हें गर्म कपड़ों से लैस कर रजाई की रखवाली में रख रहे हैं। शाम छह बजे के बाद फिर से कोहरा का प्रभाव शुरू हो गया और लोग तेजी से घरों में दुबकने लगे। देर रात मार्गों पर वहीं लोग आवागमन नजर आए, जिनकी कुछ मजबूरी थी।
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सोमवार की रात से अचानक कोहरे का जबरदस्त प्रभाव शुरू हो गया। कोहरा के घना होने का आलम यह था कि चार कदम की वस्तु भी नहीं दिखाई दे रही थी। दूसरे दिन 12 बजे तक घने कोहरा का प्रभाव बना रहा। कोहरा का यह क्रम लगातार तीसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहा। बुधवार की रात 10 बजे के बाद कोहरा का क्रम शुरु हो गया, जो सुबह 9 बजे तक बना रहा। रात की कौन कहे, सुबह भी लाइटों के सहारे वाहन सड़कों पर रेंगते रहे। धूप तो निकली, लेकिन गलन की वजह से इसका प्रभाव नहीं था। सिर्फ लोगों को इस बात का संतोष था कि वह धूप के बीच बैठे है। सुबह और शाम की कौन कहे, दिन में भी लोग अलाव तापते हुए नजर आए। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे ठंड के साथ ही गलन में भी वृद्धि होती गई।
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शाम होते ही लोग घरों में दुबक गए। जिन लोगों के पास हीटर की सुविधा इसके सहारे और जिनते के घरों में अलाव जलाने की व्यवस्था थी, वह उसके सहारे ठंड से राहत पाने में जुट गए। ठंड से बच्चों का बचपन भी घरों में कैद हो गया है। लाल को ठंड की नजर न लगे, इस आशंका से परिवार के लोग उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। उन्हें गर्म कपड़ों से लैस कर रजाई की रखवाली में रख रहे हैं। शाम छह बजे के बाद फिर से कोहरा का प्रभाव शुरू हो गया और लोग तेजी से घरों में दुबकने लगे। देर रात मार्गों पर वहीं लोग आवागमन नजर आए, जिनकी कुछ मजबूरी थी।
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