{"_id":"5c339849bdec2256c93f87f4","slug":"181546885193-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारह घंटे तक रूक-रूक कर हुई बूंदाबांदी, ठंड बढ़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारह घंटे तक रूक-रूक कर हुई बूंदाबांदी, ठंड बढ़ी
विज्ञापन
गाजीपुर। पिछले कई दिनों से ठंड का असर धीरे-धीरे बढ़ रहा था। इसी बीच रविवार को देर रात से लेकर पूर्वांह्न दस बजे तक तेज हवा के साथ रुक-रुक कर हुई बूंदाबांदी ने सर्दी की बेदर्दी को और बढ़ा दिया। आसमान में छाए बादल और सर्द हवाओं के बीच लोग ठंड के साथ गलन और ठिठुरन से कांपते रहे। मौसम में अचानक बदलाव से लोग डरे सहमे हैं। बूंदाबांदी से गलन और बढ़ गई है। लोग यह कहते नजर आए कि अब ठंड अपनी ताकत का एहसास कराने लगी है।
रविवार को देर रात तेज हवा के साथ बूंदाबांदी होने से ठंड में काफी इजाफा हुआ है। सोमवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और धूप-छांव का खेल जारी रहा। पूर्वांह्न 11 बजे कुछ देर के लिए धूप निकलने के बाद भी ठंड से राहत नहीं मिली। सुबह कोहरे के दौरान ठंड में और भी इजाफा हो रहा है। इससे लोगों को राहत के लिए गर्म कपड़ों के साथ ही अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कोहरे का क्रम शुरू होने से लोगों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि अब सर्दी में जबरदस्त इजाफा होगा। इसी बीच रविवार की रात अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। रात करीब 11 बजे गरज और सर्द हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी का यह क्रम सोमवार की सुबह तक रुक-रुक कर जारी रहा। हल्की बारिश से ठंड में इजाफा होने और सर्दी की बेदर्दी फिर से बढ़ गई है। ऐसे में सुबह कोहरे का प्रभाव भी बना रहा। ऐसे में लोग ठंड से ठिठुरते और कांपते रहे। सुबह छह बजे तक बिस्तर छोड़ने वाले लोग सात से आठ बजे तक रजाई में छिपे रहे। जबकि घर का काम-काज निपटाने, बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने, उनका टिफिन बनाने की मजबूरी में गृहणियों को सर्दी में भी सुबह जग कर अपने-अपने काम में जुटना पड़ा। ठंड से परेशान लोग राहत के लिए धूप का इंतजार करते रहे। इसी बीच पूर्वांह्न 11 बजे कुछ देर के लिए भगवान भास्कर ने आंखें खोली तो लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे, लेकिन ठंड और गलन के प्रभाव के आगे सूर्यदेव की चमक काफी फीकी रही। इससे लोगों को सर्दी से कोई राहत नहीं मिल सकी। ठंड और लगन के बीच पूरे दिन धूप और बदली का खेल चलता रहा। अचानक मौसम के बदले मिजाज से लोग आपस में यह बात करते रहे कि लगता है कि अब ठंड अपनी ताकत का एहसास कराएगी। मकरसंक्रांति के बाद ही इसका प्रभाव कुछ कम होगा।
विज्ञापन
रविवार को देर रात तेज हवा के साथ बूंदाबांदी होने से ठंड में काफी इजाफा हुआ है। सोमवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और धूप-छांव का खेल जारी रहा। पूर्वांह्न 11 बजे कुछ देर के लिए धूप निकलने के बाद भी ठंड से राहत नहीं मिली। सुबह कोहरे के दौरान ठंड में और भी इजाफा हो रहा है। इससे लोगों को राहत के लिए गर्म कपड़ों के साथ ही अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कोहरे का क्रम शुरू होने से लोगों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि अब सर्दी में जबरदस्त इजाफा होगा। इसी बीच रविवार की रात अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। रात करीब 11 बजे गरज और सर्द हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। बूंदाबांदी का यह क्रम सोमवार की सुबह तक रुक-रुक कर जारी रहा। हल्की बारिश से ठंड में इजाफा होने और सर्दी की बेदर्दी फिर से बढ़ गई है। ऐसे में सुबह कोहरे का प्रभाव भी बना रहा। ऐसे में लोग ठंड से ठिठुरते और कांपते रहे। सुबह छह बजे तक बिस्तर छोड़ने वाले लोग सात से आठ बजे तक रजाई में छिपे रहे। जबकि घर का काम-काज निपटाने, बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने, उनका टिफिन बनाने की मजबूरी में गृहणियों को सर्दी में भी सुबह जग कर अपने-अपने काम में जुटना पड़ा। ठंड से परेशान लोग राहत के लिए धूप का इंतजार करते रहे। इसी बीच पूर्वांह्न 11 बजे कुछ देर के लिए भगवान भास्कर ने आंखें खोली तो लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे, लेकिन ठंड और गलन के प्रभाव के आगे सूर्यदेव की चमक काफी फीकी रही। इससे लोगों को सर्दी से कोई राहत नहीं मिल सकी। ठंड और लगन के बीच पूरे दिन धूप और बदली का खेल चलता रहा। अचानक मौसम के बदले मिजाज से लोग आपस में यह बात करते रहे कि लगता है कि अब ठंड अपनी ताकत का एहसास कराएगी। मकरसंक्रांति के बाद ही इसका प्रभाव कुछ कम होगा।
विज्ञापन