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पूर्व कुलपति ने किया पुस्तक को विमोचन
Updated Sun, 25 Feb 2018 10:52 PM IST
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साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में शहर के अष्टभुजी कॉलोनी स्थित एक विद्यालय के सभागार में माखनलाल चतुुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के पूर्व कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने डॉ. कैलाशनाथ पांडेय द्वारा रचित हिंदी पत्रकारिता: संवाद और विमर्श पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर हिंदी पत्रकारिता का समकालीन संकट विषय पर आयोजित गोष्ठी पर पूर्व कुलपति ने 1975 में आपातकाल के दौरान पत्रकारिता पर आए संकट और चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि संपादकों ने संपादकीय पृष्ठ खाली छोड़ना शुरू कर दिया। लोगों को जेलों में बंद कर दिया और खबरों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। पत्रकारों, संपादकों को धमकियां मिल रही थीं। पत्रकारिता के इतिहास में स्वतंत्र भारत का यह सबसे खराब समय था। पत्रकारों को लिखने की छूट नहीं थी। उन्होंने पेड न्यूज के खतरे की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि यह मामला संसद में भी उठा था। जांच समिति भी बनी। प्रेस आयोग ने 56 पृष्ठ की रिपोर्ट दी। फिर वह 11-12 पृष्ठों में छोटी संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार की गई। परिवर्तन की बात हुई, लेकिन कानून नहीं बना। इसका दुष्प्रभाव लोकतंत्र और चुनाव व्यवस्था पर पड़ रहा है। कहा कि लोकतंत्र के यदि तीन खंभे ठीक ढंग से नहीं काम कर रहे तो ऐसी परिस्थिति में केवल मीडिया से अपेक्षा करना थोड़ा ज्यादती होगी। डॉ. रामसुधार सिंह ने पत्रकारिता की चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा कि अखबार रहेगा। वजह वैचारिक चिंतन का आधार वहीं है। डॉ. अवधेश प्रधान ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां तो बहुत है लेकिन रास्ते बंद नहीं है। इससे पूर्व अतिथियों का परिचय डॉ. कैलाशनाथ पांडेय ने कराया। स्वागत विद्यालय के प्रबंधक माधव कृष्ण ने किया। इस मौके पर डॉ. अशोक कुमार सिंह, कमलाशंकर यादव, डॉ. पीएन सिंह, डॉ. पारसनाथ सिंह, डॉ. श्रीकांत पांडेय, कामेश्वर द्विवेदी, डॉ. सानंद सिंह, प्रेम श्रीवास्तव, डॉ. समर बहादुर सिंह, बृजभूषण दूबे, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. संतोष कुमार तिवारी, प्रो. बाबू लाल बलवंत, डॉ. गजाधर शर्मा, रामावतार, महेश प्रताप सिंह, डॉ. विनय कुमार दूबे, डॉ. अजय राय, संजय कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे। संचालन संजीव कुमार गुप्ता एवं आभार अमरनाथ तिवारी ने व्यक्त किया।
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