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गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए खर्च होंगे ढ़ाई अरब
Updated Wed, 06 Jun 2018 10:47 PM IST
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गाजीपुर। पूर्वांचल की लाइफ लाइन मानी जाने वाली गंगा नदी दिन प्रतिदिन भारी प्रदूषण के चलते दम तोड़ रही है। गंगा को निर्मल व अविरल बनाने का सरकार चाहे जितने दावे कर ले, लेकिन हकीकत की जमीन पर ये सभी दावे हवा-हवाई साबित हुए हैं। वर्तमान में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए ‘अमृत कार्यक्रम’ तथा ‘नमामि गंगे योजना’ चलाई जा रही है। इन योजनाओं पर करीब ढ़ाई अरब रुपये खर्च किए जाएंगे। ‘अमृत कार्यक्रम’ अंतर्गत फेज-प्रथम का टेंडर भी जलनिगम द्वारा कराया जा चुका है। अब इसका काम भी बहुत जल्द शुरू होगा। जबकि दूसरे फेज में होने वाले काम तथा नमामि गंगे योजना के पूर्ण होने के बाद मोक्षदायिनी गंगा में होने वाले प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लगना तय है। हालांकि अभी तक गंगा में प्रदूषण बढ़ने का क्रम जारी है। हालत इतने बदतर हो गए हैं कि मोक्षदायिनी मां गंगा को आज खुद मोक्ष की दरकार है।
गंगा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर आम और खास सभी की चिंता बढ़ गई है। इसे लेकर सरकार संजीदा है। गंगा की सफाई के लिए पूर्व की सरकारों ने भी तमाम कोशिशें की और योजनाएं चलाई, लेकिन ये योजनाएं अपने लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकीं। तीन दशक पहले जो स्थिति गंगा की थी, आज भी वैसी ही है। गंगा में बढ़ते प्रदूषण के स्तर का सबसे बड़ा कारण तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक क्षेत्र और शहर के कूड़े-कचरे के निस्तारण का पुख्ता व्यवस्था न होना बताया गया है। गंगा के साथ सहायक नदियों का हाल भी बेहाल है। यूं तो प्रदूषण से गंगा का दम घुटना इलाहाबाद और वाराणसी से ही शुरू हो जाता है, लेकिन गाजीपुर पहुंचते-पहुंचते गंगा का जल दूषित और हानिकारक बन जाता है। इसके मद्देनजर प्रदेश तथा केंद्र सरकार ने कई योजनाओं को स्वीकृति दी है। नदी किनारे बसे जिलों में इन योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। जिससे गंगा को प्रदूषण मुक्त कर उसके अस्तित्व को बचाया जा सके।
जल निगम के जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार यादव ने बताया कि गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इन दिनों दो योजनाएं चल रही हैं। पहला ‘अमृत कार्यक्रम’। इसे दो फेज में बांटा गया है। पहले फेज में कुल 45.38 करोड़ की लागत से सीवर तथा इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (ईपीएस) स्टीमर घाट के पास बनना है। यह सीवर शहर की घनी आबादी से निकलने वाले मल-मूत्र तथा नालों के गंदे पानी को नदी में सीधे जाने से रोकेगा। इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान बनाया जाएगा। जिससे गंदगी को फिल्टर कर साफ पानी नदी में छोड़ा जाएगा। दूसरे फेज में 112.17 करोड़ की लागत से सीवर बनना है। दूसरे फेज का टेंडर भी एक से दो माह के भीतर होगा। दोनों फेजों को मिला कर कुल 45 किमी में कार्य होना है। दूसरी योजना के रूप में नमामि गंगे योजना को जिले में शुरू होने वाली है। इसके लिए 93. 30 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इसमें मेन पंपिंग स्टेशन (एसपीएस), सीवर ट्रीटमेंट प्लान तथा सीवर का कार्य होना है।
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गंगा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर आम और खास सभी की चिंता बढ़ गई है। इसे लेकर सरकार संजीदा है। गंगा की सफाई के लिए पूर्व की सरकारों ने भी तमाम कोशिशें की और योजनाएं चलाई, लेकिन ये योजनाएं अपने लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकीं। तीन दशक पहले जो स्थिति गंगा की थी, आज भी वैसी ही है। गंगा में बढ़ते प्रदूषण के स्तर का सबसे बड़ा कारण तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक क्षेत्र और शहर के कूड़े-कचरे के निस्तारण का पुख्ता व्यवस्था न होना बताया गया है। गंगा के साथ सहायक नदियों का हाल भी बेहाल है। यूं तो प्रदूषण से गंगा का दम घुटना इलाहाबाद और वाराणसी से ही शुरू हो जाता है, लेकिन गाजीपुर पहुंचते-पहुंचते गंगा का जल दूषित और हानिकारक बन जाता है। इसके मद्देनजर प्रदेश तथा केंद्र सरकार ने कई योजनाओं को स्वीकृति दी है। नदी किनारे बसे जिलों में इन योजनाओं को तेजी से लागू किया जा रहा है। जिससे गंगा को प्रदूषण मुक्त कर उसके अस्तित्व को बचाया जा सके।
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जल निगम के जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार यादव ने बताया कि गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए इन दिनों दो योजनाएं चल रही हैं। पहला ‘अमृत कार्यक्रम’। इसे दो फेज में बांटा गया है। पहले फेज में कुल 45.38 करोड़ की लागत से सीवर तथा इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (ईपीएस) स्टीमर घाट के पास बनना है। यह सीवर शहर की घनी आबादी से निकलने वाले मल-मूत्र तथा नालों के गंदे पानी को नदी में सीधे जाने से रोकेगा। इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान बनाया जाएगा। जिससे गंदगी को फिल्टर कर साफ पानी नदी में छोड़ा जाएगा। दूसरे फेज में 112.17 करोड़ की लागत से सीवर बनना है। दूसरे फेज का टेंडर भी एक से दो माह के भीतर होगा। दोनों फेजों को मिला कर कुल 45 किमी में कार्य होना है। दूसरी योजना के रूप में नमामि गंगे योजना को जिले में शुरू होने वाली है। इसके लिए 93. 30 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इसमें मेन पंपिंग स्टेशन (एसपीएस), सीवर ट्रीटमेंट प्लान तथा सीवर का कार्य होना है।
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