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साहित्य के प्रगतिशील तत्वों को छिपाया गया
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:35 AM IST
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साहित्य के प्रगतिशील तत्वों को छिपाया गया
मुहम्मदाबाद। समकालीन सोच परिवार के तत्वावधान में मंगलवार को राहुल सांकृत्यायन विद्यालय गौसपुर में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सांस्कृतिक चुनौतियां विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध साहित्यकार संजीव ने कहा कि हमारे साहित्य के प्रगतिशील तत्वों को छिपाया गया और धर्म संबंधित आस्था को आगे बढ़ाया गया। प्रेम की प्रगतिशील कहानी मंत्र को जानबूझकर पाठयक्रम से बाहर रखा गया और जादू मंत्र पर आधारित कहानी मंत्र को पाठयक्रम में लागू किया गया। ऐसी ही कलाबाजियां हमारे लिए सांस्कृतिक चुनौतियों के रूप में खड़ी है। कहा कि आज के वैज्ञानिक युग में साहित्य को वैज्ञानिक चिंतन पर आधारित होना ही होगा तभी समाज स्वस्थ्य ढंग से आगे बढ़ पाएगा। गोष्ठी में विख्यात कथाकार शिवकुमार यादव, पूर्व ब्लाक प्रमुख रामायण सिंह यादव, रामनगीना सिंह कुशवाहा, फुन्नू सिंह यादव, रामविलास यादव, कलीम खां झन्ने, अनिल राय आदि ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता गिरजा प्रसाद मस्तान एवं संचालन रमाशंकर यादव ने किया।
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मुहम्मदाबाद। समकालीन सोच परिवार के तत्वावधान में मंगलवार को राहुल सांकृत्यायन विद्यालय गौसपुर में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सांस्कृतिक चुनौतियां विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध साहित्यकार संजीव ने कहा कि हमारे साहित्य के प्रगतिशील तत्वों को छिपाया गया और धर्म संबंधित आस्था को आगे बढ़ाया गया। प्रेम की प्रगतिशील कहानी मंत्र को जानबूझकर पाठयक्रम से बाहर रखा गया और जादू मंत्र पर आधारित कहानी मंत्र को पाठयक्रम में लागू किया गया। ऐसी ही कलाबाजियां हमारे लिए सांस्कृतिक चुनौतियों के रूप में खड़ी है। कहा कि आज के वैज्ञानिक युग में साहित्य को वैज्ञानिक चिंतन पर आधारित होना ही होगा तभी समाज स्वस्थ्य ढंग से आगे बढ़ पाएगा। गोष्ठी में विख्यात कथाकार शिवकुमार यादव, पूर्व ब्लाक प्रमुख रामायण सिंह यादव, रामनगीना सिंह कुशवाहा, फुन्नू सिंह यादव, रामविलास यादव, कलीम खां झन्ने, अनिल राय आदि ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता गिरजा प्रसाद मस्तान एवं संचालन रमाशंकर यादव ने किया।