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घाटों पर पूजन-अर्चन के बाद श्रद्धालुओं ने दिया अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:10 PM IST
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गाजीपुर। सूर्य उपासना के पर्व डाला छठ पर अस्ताचल भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य गुरुवार की शाम को दिया गया। व्रती महिलाएं समूहों में छठ मैया का गीत गाते हुए गंगा घाटों पर पहुंची। शहर के साथ ही सभी ग्रामीण क्षेत्र के गंगाघाटों, पोखरों एवं तालाबों पर श्रद्धालु महिलाओं की भीड़ उमड़ी। पूजन-अर्चन तक आस्था के समंदर में प्राय: सभी गंगा घाट नहाते दिखे।
दोपहर दो बजे के बाद से व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों का गंगा घाटों के लिए निकलने का क्रम शुरु हो गया था। चार बजते-बजते सभी गंगा घाट श्रद्धालुओं से पूरी तरह से पट गए। व्रती महिलाएं सुप में फल, पान की पत्ती, सुपारी, नारियल, अगरौटा आदि पूजा संबंधित सामानों को लेकर गंगा घाटों पर पहुंची। इसके बाद वेदी को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाने और ईख को खड़ा कर कलश स्थापित किया। इसके बाद करीब दो घंटे तक पूजन-अर्चन किया। सूर्यास्त से पहले व्रती महिलाएं गंगा में पहुंची और हाथों में सुपेली लेकर सूर्य की उपासना की। बाद में अस्त होते सूर्य को व्रती महिलाओं के पुत्र, पति, बेटी सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने छह बार अर्घ्य दिया। शहर के ददरीघाट, बड़ा महादेवा घाट, सिकंदरपुर घाट, चीतनाथ घाट, अंजही घाट, पोस्ताघाट, नवापुरा घाट, कलेक्टरघाट, कोयलाघाट, पत्थर घाट सहित अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। अर्घ्य का कार्य संपन्न होने के बाद व्रती महिलाएं तथा उनके घर के सदस्य घरों को लौटे। पूजन-अर्चन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से प्राय: सभी गंगा घाटों के साथ ही गंगा जाने वाले मार्गों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। अधिकारी भी चक्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
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दोपहर दो बजे के बाद से व्रती महिलाओं तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों का गंगा घाटों के लिए निकलने का क्रम शुरु हो गया था। चार बजते-बजते सभी गंगा घाट श्रद्धालुओं से पूरी तरह से पट गए। व्रती महिलाएं सुप में फल, पान की पत्ती, सुपारी, नारियल, अगरौटा आदि पूजा संबंधित सामानों को लेकर गंगा घाटों पर पहुंची। इसके बाद वेदी को गंगा जल से धोकर धूप-अगरबत्ती जलाने और ईख को खड़ा कर कलश स्थापित किया। इसके बाद करीब दो घंटे तक पूजन-अर्चन किया। सूर्यास्त से पहले व्रती महिलाएं गंगा में पहुंची और हाथों में सुपेली लेकर सूर्य की उपासना की। बाद में अस्त होते सूर्य को व्रती महिलाओं के पुत्र, पति, बेटी सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने छह बार अर्घ्य दिया। शहर के ददरीघाट, बड़ा महादेवा घाट, सिकंदरपुर घाट, चीतनाथ घाट, अंजही घाट, पोस्ताघाट, नवापुरा घाट, कलेक्टरघाट, कोयलाघाट, पत्थर घाट सहित अन्य घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। अर्घ्य का कार्य संपन्न होने के बाद व्रती महिलाएं तथा उनके घर के सदस्य घरों को लौटे। पूजन-अर्चन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से प्राय: सभी गंगा घाटों के साथ ही गंगा जाने वाले मार्गों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी। अधिकारी भी चक्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
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