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अपने घर से ही करनी होगी सुरक्षित भंडारण तकनीक की शुरूआत

Sun, 27 May 2018 11:24 PM IST
Updated Sun, 27 May 2018 11:24 PM IST
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अपने घर से ही करनी होगी सुरक्षित भंडारण तकनीक की शुरूआत
गाजीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से डिलिया गांव में खाने योग्य अनाज का ‘सुरक्षित भंडारण तकनीक’ विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए डॉ. सुनीता पांडेय ने बताया कि आज हम अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में काफी सक्षम हो चुके हैं लेकिन अभी भी हम उत्पादन के संरक्षण की तरफ ध्यान नहीं देते, जो बहुत ही आवश्यक है। जब तक हम अपनी पूरी उत्पादकता को संरक्षित नहीं रख पाते तब तक हम अपने देश के प्रत्येक व्यक्ति को खाद्यान्न नहीं उपलब्ध करा सकते, उन्हें खाद्य सुरक्षा नहीं प्रदान कर सकते। इसलिए हमें सुरक्षित भंडारण तकनीक की शुरूआत अपने घर से ही करनी होगी।
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उन्होंने कहा कि हर किसान अपने अनाज को संरक्षित रख सकता है। केवल कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता है। भंडारित अनाज में 8-10 प्रतिशत से अधिक नमी की मात्रा न हो। धूप में अच्छे से सुखाकर अनाज को भंडारित करें। नये-पुराने और टूटे हुए अनाजों को अलग-अलग भंडारित करें। भंडारण पात्र को अच्छी धूप में सूखा लें ताकि नमी न हो। अगर बोरों का प्रयोग कर रहें हो तो नए बोरे का प्रयोग करें। अगर पुराने बोरे का प्रयोग करते हैं तो प्रयोग से पहले बोरे को पांच मिली मैलाथियान 20 लीटर पानी में 10 मिनट तक डुबाने के बाद सुखाकर प्रयोग करें। गेहूं भंडारण में आयुर्वेदिक दवा पारद टिकिया का प्रयोग 10 टेबलेट प्रति क्विंटल की दर से परत सिस्टम में करें। गेहूं में 200 ग्राम लहसुन की गांठ-क्विंटल की दर से प्रयोग कर सकते हैं। सूखी नीम की पत्ती 3-4 प्रतिशत (3 किग्रा-क्विंटल) परत सिस्टम में गेहूं भंडारण में प्रयोग कर सकते हैं। बताया कि इसके अतिरिक्त खड़ा नमक, माचिस बॉक्स का प्रयोग कर अपने अनाज को भंडारण के दौरान पूरी तरह संरक्षित रख सकते हैं। इस प्रकार भंडारण करने पर किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी एवं वर्ष भर के लिए आपका अनाज सुरक्षित रहेगा। अनाज भण्डारण के तहत चयनित 20 महिला किसानों को आयुर्वेदिक दवा पारद टिकिया भी वितरित किया गया। प्रशिक्षण में कुल 22 महिलाओं ने भाग लिया।
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