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चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
Updated Tue, 27 Feb 2018 11:04 PM IST
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गाजीपुर। चंद्रशेखर आजाद की 87वीं पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने पीजी कालेज परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर गर्वजीत सिंह ने चंद्रशेखर आजाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब 15 वर्ष के चंद्रशेखर को जज के सामने पेश किया गया तो उन्होंने कहा कि मेरा नाम आजाद है। मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता है और मेरा पता जेल है। इसके बाद उनको 15 बेंत की सजा सुनाई गई। यहीं से उनका नाम आजाद पड़ गया। अल्फ्रेड पार्क में अपने एक मित्र सुखदेव से मंत्रणा कर ही रहे थे कि तभी कर्नलगंज थाने से बड़ी संख्या में पुलिस आ गई। दोनों ओर से गोली-बारी हुई। अंत में जब एक गोली बची तो चंदशेखर आजाद ने स्वयं को गोली मार ली ताकि अंग्रेज उन्हें जीते जी पकड़ न सकें। नगर मंत्री अभिनंदन केशरी ने कहा कि लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु ने संध्या के समय लाहौर पुलिस अधीक्षक जेपी सांडर्स को उसी के कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या की। इस अवसर पर प्राचार्य डा. अशोक सिंह, डा. एसएन सिंह, डा. जेके राव, डा. रविशंकर सिंह, डा. रामदुलारे, अमित शर्मा, विक्रांत मौर्य, प्रियेश सिंह, इमाम शाह, सुधांशु तिवारी, विजय यादव, विकास तिवारी, पृथ्वीराज सिंह, आयूष कुमार आदि मौजूद रहे।
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इस अवसर पर गर्वजीत सिंह ने चंद्रशेखर आजाद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब 15 वर्ष के चंद्रशेखर को जज के सामने पेश किया गया तो उन्होंने कहा कि मेरा नाम आजाद है। मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता है और मेरा पता जेल है। इसके बाद उनको 15 बेंत की सजा सुनाई गई। यहीं से उनका नाम आजाद पड़ गया। अल्फ्रेड पार्क में अपने एक मित्र सुखदेव से मंत्रणा कर ही रहे थे कि तभी कर्नलगंज थाने से बड़ी संख्या में पुलिस आ गई। दोनों ओर से गोली-बारी हुई। अंत में जब एक गोली बची तो चंदशेखर आजाद ने स्वयं को गोली मार ली ताकि अंग्रेज उन्हें जीते जी पकड़ न सकें। नगर मंत्री अभिनंदन केशरी ने कहा कि लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु ने संध्या के समय लाहौर पुलिस अधीक्षक जेपी सांडर्स को उसी के कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या की। इस अवसर पर प्राचार्य डा. अशोक सिंह, डा. एसएन सिंह, डा. जेके राव, डा. रविशंकर सिंह, डा. रामदुलारे, अमित शर्मा, विक्रांत मौर्य, प्रियेश सिंह, इमाम शाह, सुधांशु तिवारी, विजय यादव, विकास तिवारी, पृथ्वीराज सिंह, आयूष कुमार आदि मौजूद रहे।
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