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रासायनिक रंगों से मूर्तिकारों ने किया तौबा
गाजीपुर
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:24 PM IST
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गाजीपुर। गंगा की निर्मलता तथा रासायनिक रंगों से होने वाली हानि से बचने के लिए मूर्तिकारों ने रासायनिक रंगों से तौबा कर लिया है। दुर्गा पूजा के लिए मूर्ति बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। मूर्तिकार इसमें प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। मूर्तियों की कीमत पांच से लेकर 15 हजार रुपये तक है। पूजा समितियों की तरफ से पहले ही प्रतिमाओं की बुकिंग करा ली गई है।
शहर के रौजा गौशाला परिसर में कोलकाता के कारीगर मुनींद्र पाल (सजोल कोले) की ओर से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने का काम करीब पांच माह से किया जा रहा है। इस कार्य में करीब आठ कारीगर लगे हुए हैं, जो दिन-रात एक कर मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे इसके निर्माण की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है। 17 सितंबर से पहले विश्वकर्मा जयंती के लिए भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाओं को बनाने का काम तेजी से हो रहा था। रौजा स्थित गौशाला में इस वर्ष मां दुर्गा की 65 प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। मिट्टी सूखने के बाद अब मूर्तिकार प्रतिमाओं की रंगाई और शृंगार के कार्य में लगे हुए हैं। कारीगर मुनींद्र पाल (सजोल कोले) ने बताया कि प्रतिमा निर्माण में प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रतिमा में मिट्टी का कार्य इस तरीके से किया गया है कि पानी में पड़ते ही वह आसानी से घुल जाए। पूजा समितियों की तरफ से पहले ही प्रतिमाओं की बुकिंग करा ली गई है। पांच से लेकर 15 हजार में प्रतिमाओं की बुकिंग की गई है। निर्माण कार्य में 10 कारीगर लगे हुए हैं। जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में नवरात्र के पहले दिन ही पंडाल में प्रतिमा की स्थापना कर दी जाती है, इसलिए ऐसी बुकिंग की प्रतिमाओं को लगभग तैयार कर लिया गया है।
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शहर के रौजा गौशाला परिसर में कोलकाता के कारीगर मुनींद्र पाल (सजोल कोले) की ओर से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने का काम करीब पांच माह से किया जा रहा है। इस कार्य में करीब आठ कारीगर लगे हुए हैं, जो दिन-रात एक कर मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे इसके निर्माण की रफ्तार भी बढ़ती जा रही है। 17 सितंबर से पहले विश्वकर्मा जयंती के लिए भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाओं को बनाने का काम तेजी से हो रहा था। रौजा स्थित गौशाला में इस वर्ष मां दुर्गा की 65 प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। मिट्टी सूखने के बाद अब मूर्तिकार प्रतिमाओं की रंगाई और शृंगार के कार्य में लगे हुए हैं। कारीगर मुनींद्र पाल (सजोल कोले) ने बताया कि प्रतिमा निर्माण में प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रतिमा में मिट्टी का कार्य इस तरीके से किया गया है कि पानी में पड़ते ही वह आसानी से घुल जाए। पूजा समितियों की तरफ से पहले ही प्रतिमाओं की बुकिंग करा ली गई है। पांच से लेकर 15 हजार में प्रतिमाओं की बुकिंग की गई है। निर्माण कार्य में 10 कारीगर लगे हुए हैं। जिले के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में नवरात्र के पहले दिन ही पंडाल में प्रतिमा की स्थापना कर दी जाती है, इसलिए ऐसी बुकिंग की प्रतिमाओं को लगभग तैयार कर लिया गया है।
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