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आमजन के बीच ‘आप’ पुलिसिंग
Ghaziabad
Updated Mon, 13 Jan 2014 05:49 AM IST
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डकैतों-दबंगों में नहीं सभ्य लोगों के बीच करना है काम
डीजीपी ने दिया आदेश, व्यवहार सुधारें पुलिस वाले
लोकसेवक के रूप में करें काम, जनता को बनाएं दोस्त
दमनकारी पुलिस की मानसिकता से उबर नहीं पाई है पुलिस
अपने व्यवहार की वजह से पुलिस की छवि हो रही धूमिल
गाजियाबाद। आजकल हर जगह लोगों पर आम आदमी पार्टी ‘आप’ का रंग चढ़ा हुआ है। यूपी पुलिस भी इससे अछूती नहीं रहेगी। डीजीपी रिजवान अहमद ने सभी जोन के आईजी और जिलों के पुलिस प्रमुखों को आदेश भेजा है, जिसमें पुलिस से व्यवहार सुधारने, जनता का दोस्त बनने, लोकसेवक के रूप में काम करने और दमनकारी पुलिस की मानसिकता से उभरने की हिदायत दी गई है। हालांकि आदेश में ‘आप’ का जिक्र नहीं है, लेकिन जो दिशा-निर्देश हैं, वे उसी तरह के हैं, जिस तरह दिल्ली में आप की सरकार काम कर रही है।
डीजीपी ने आदेश में लिखा है कि यह सच है कि बदलते परिवेश में पुलिस वाले गुलाम शासनकाल की दमनकारी पुलिस की मानसिकता से उबर नहीं पाए हैं। जनता के प्रति अपने व्यवहार को मानवीय संवेदनाओं से नहीं जोड़ पाए हैं। खासकर गरीब, अशिक्षित और निर्बल वर्गों के साथ आम पुलिस जनों का व्यवहार दोस्ताना नहीं होता। यह कहना भी अतिश्यिोक्ति नहीं होगी कि ऐसे लोगों के साथ पुलिस कुछ हद तक संवेदनशून्य भी रहती है। जिस समाज और जनता की सेवा में पुलिस लगी है, उनके साथ पुलिस वालों का व्यवहार मित्रवत होना चाहिए। लिहाजा पुलिस भीड़ के गुस्से के जवाब में कानून से परे जाकर कार्रवाई से बचे और पारदर्शी तरीके से काम करे। इसके लिए अधिकारी अधीनस्थों का सम्मेलन कर उन्हें उनके दायित्वों और जनता के प्रति अच्छे व्यवहार के बारे में समझाकर उसका पालन कराएं। अगर पुलिस का व्यवहार मानवीय मूल्यों के विपरीत और संवेदनहीन रहा तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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डीजीपी ने दिया आदेश, व्यवहार सुधारें पुलिस वाले
लोकसेवक के रूप में करें काम, जनता को बनाएं दोस्त
दमनकारी पुलिस की मानसिकता से उबर नहीं पाई है पुलिस
अपने व्यवहार की वजह से पुलिस की छवि हो रही धूमिल
गाजियाबाद। आजकल हर जगह लोगों पर आम आदमी पार्टी ‘आप’ का रंग चढ़ा हुआ है। यूपी पुलिस भी इससे अछूती नहीं रहेगी। डीजीपी रिजवान अहमद ने सभी जोन के आईजी और जिलों के पुलिस प्रमुखों को आदेश भेजा है, जिसमें पुलिस से व्यवहार सुधारने, जनता का दोस्त बनने, लोकसेवक के रूप में काम करने और दमनकारी पुलिस की मानसिकता से उभरने की हिदायत दी गई है। हालांकि आदेश में ‘आप’ का जिक्र नहीं है, लेकिन जो दिशा-निर्देश हैं, वे उसी तरह के हैं, जिस तरह दिल्ली में आप की सरकार काम कर रही है।
डीजीपी ने आदेश में लिखा है कि यह सच है कि बदलते परिवेश में पुलिस वाले गुलाम शासनकाल की दमनकारी पुलिस की मानसिकता से उबर नहीं पाए हैं। जनता के प्रति अपने व्यवहार को मानवीय संवेदनाओं से नहीं जोड़ पाए हैं। खासकर गरीब, अशिक्षित और निर्बल वर्गों के साथ आम पुलिस जनों का व्यवहार दोस्ताना नहीं होता। यह कहना भी अतिश्यिोक्ति नहीं होगी कि ऐसे लोगों के साथ पुलिस कुछ हद तक संवेदनशून्य भी रहती है। जिस समाज और जनता की सेवा में पुलिस लगी है, उनके साथ पुलिस वालों का व्यवहार मित्रवत होना चाहिए। लिहाजा पुलिस भीड़ के गुस्से के जवाब में कानून से परे जाकर कार्रवाई से बचे और पारदर्शी तरीके से काम करे। इसके लिए अधिकारी अधीनस्थों का सम्मेलन कर उन्हें उनके दायित्वों और जनता के प्रति अच्छे व्यवहार के बारे में समझाकर उसका पालन कराएं। अगर पुलिस का व्यवहार मानवीय मूल्यों के विपरीत और संवेदनहीन रहा तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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