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डीएवी में छापा, मिले जानवरों के अवशेष
Ghaziabad
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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वाइल्ड लाइफ एक्ट में हुआ मामला दर्ज
पीएफए और वन विभाग की टीम ने मारा छापा
स्कूल प्रबंधन ने कहा, अवशेष 25 साल पुराने
साहिबाबाद। पीएफए और वन विभाग की संयुक्त टीम ने राजेंद्र नगर के डीएवी स्कूल पर छापा मारकर बायोलॉजी लैब की जांच की। वहां कई पशु-पक्षियों के अवशेष मिले, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया। संयुक्त टीम ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ साहिबाबाद थाने में वाइल्ड लाइफ एक्ट के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करा दी।
एसएचओ साहिबाबाद ने बताया कि पीएफए संस्था के पदाधिकारियों को सूचना मिली थी कि स्कूल की लैब में कई जानवरों को गलत तरीके से काटा जा रहा है। इसके बाद पीएफए की टीम ने वन रेंजर एमके मीना के साथ स्कूल में छापेमारी की। स्कूल इन अवशेषों के डॉक्युमेंट भी नहीं दिखा सका। पुलिस ने जांच कर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 9, 12, 39, 40, 50 और 51 के अंतर्गत प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। उधर स्कूल के एडमिन ऑफिसर बीबी त्रिपाठी का कहना है कि बॉयोलॉजी लैब में मिले अवशेष करीब 25 साल पुराने हैं। इनकी परचेज स्लिप भी पीएफए और वन विभाग को दिखा दी थी। इसके बाद वे वापस लौट गए थे। उन्होंने स्कूल को सही ठहराते हुए कहा कि अगर उनका स्कूल जिम्मेदार है तो मेडिकल कॉलेज और अन्य स्कूल भी दोषी हैं। वहां भी ऐसे ढेरों अवशेष मिल जाएंगे।
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पीएफए और वन विभाग की टीम ने मारा छापा
स्कूल प्रबंधन ने कहा, अवशेष 25 साल पुराने
साहिबाबाद। पीएफए और वन विभाग की संयुक्त टीम ने राजेंद्र नगर के डीएवी स्कूल पर छापा मारकर बायोलॉजी लैब की जांच की। वहां कई पशु-पक्षियों के अवशेष मिले, जिन्हें कब्जे में ले लिया गया। संयुक्त टीम ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ साहिबाबाद थाने में वाइल्ड लाइफ एक्ट के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करा दी।
एसएचओ साहिबाबाद ने बताया कि पीएफए संस्था के पदाधिकारियों को सूचना मिली थी कि स्कूल की लैब में कई जानवरों को गलत तरीके से काटा जा रहा है। इसके बाद पीएफए की टीम ने वन रेंजर एमके मीना के साथ स्कूल में छापेमारी की। स्कूल इन अवशेषों के डॉक्युमेंट भी नहीं दिखा सका। पुलिस ने जांच कर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 9, 12, 39, 40, 50 और 51 के अंतर्गत प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। उधर स्कूल के एडमिन ऑफिसर बीबी त्रिपाठी का कहना है कि बॉयोलॉजी लैब में मिले अवशेष करीब 25 साल पुराने हैं। इनकी परचेज स्लिप भी पीएफए और वन विभाग को दिखा दी थी। इसके बाद वे वापस लौट गए थे। उन्होंने स्कूल को सही ठहराते हुए कहा कि अगर उनका स्कूल जिम्मेदार है तो मेडिकल कॉलेज और अन्य स्कूल भी दोषी हैं। वहां भी ऐसे ढेरों अवशेष मिल जाएंगे।
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