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कालेजों को िफर मिले मैनेजमेंट कोटा
Ghaziabad
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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यूूपीटिफ की बैठक में प्रदेश के संस्थानों ने उठाई आवाज
गाजियाबाद। प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों में मैनेजमेंट कोटा खत्म करने और खाली सीटों पर दाखिले के लिए पीसीएम में 60 फीसदी अंक अनिवार्य किए जाने से इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कालेजों को झटका लगा है। कालेज सीटें खाली रहने की आशंका से परेशान हैं। मैनेजमेंट कोटा फिर से लागू करने को लेकर उत्तर प्रदेश टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस फाउंडेशन (यूपीटिफ) ने मंगलवार को गाजियाबाद के एक होटल में बैठक की। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 100 से अधिक संस्थानों के पदाधिकारी शामिल हुए और 15 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटा बहाल करने और खाली सीटों पर दाखिले के लिए पीसीएम में 60 की जगह 45 फीसदी अंक पर ही प्रवेश की छूट देने की मांग मुख्यमंत्री से की।
गौरतलब है कि पिछले दिन हुई केंद्रीय प्रवेश समिति कैब की बैठक में काउंसलिंग के बाद खाली प्रदेश के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कालेजों की सीटों पर प्रवेश के लिए पीसीएम में 50 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी अंकों का होना तय किया गया था। यूपीटिफ के महासचिव अतुल जैन ने कहा कि पिछली सरकार ने इस सत्र से 15 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटा खत्म कर दिया है। मुश्किल यह है कि बीटेक, एमबीए और एमसीए में आवेदन भी पिछले साल से कम आए हैं। काउंसलिंग में देर होने और कोटा न होने की स्थिति में स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए अन्य विवि में पलायन करेंगे, जिससे स्थिति खराब होगी और कालेजों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। सिल्वर लाइन ग्रुप के चेयरमैन सुभाष जैन ने कहा कि पिछले साल खाली सीटों पर दाखिले के लिए 50 फीसदी अंक सीमा पर भी इंजीनियरिंग कालेजों की 40 फीसदी सीटें खाली बच गई थीं। एआईसीटीई का मानक के अनुसार इंजीनियरिंग कालेजों में एडमिशन के लिए न्यूनतम अंक सीमा 45 फीसदी है। ऐसे में खाली सीटों पर प्रवेश के लिए पीसीएम में 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य करना गलत है। ऐसी स्थिति में सीटें खाली बचेंगी और कालेज बंद करने की भी नौबत आ सकती है। अतुल जैन ने कहा कि इस 9 और 10 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश के संस्थान लखनऊ में बैठक कर अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। मौके पर बरेली से देवमूर्ति, इलाहाबाद से डा. जगदीश गुलाटी, आरपी चड्ढा, राकेश छारिया, पंकज अग्रवाल, वाईके गुप्ता, ग्रेटर नोएडा से विष्णु सरन, मेरठ से अतुल भारद्वाज और कानपुर से प्रनवीर सिंह मौजूद रहे।
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गाजियाबाद। प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों में मैनेजमेंट कोटा खत्म करने और खाली सीटों पर दाखिले के लिए पीसीएम में 60 फीसदी अंक अनिवार्य किए जाने से इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कालेजों को झटका लगा है। कालेज सीटें खाली रहने की आशंका से परेशान हैं। मैनेजमेंट कोटा फिर से लागू करने को लेकर उत्तर प्रदेश टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस फाउंडेशन (यूपीटिफ) ने मंगलवार को गाजियाबाद के एक होटल में बैठक की। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 100 से अधिक संस्थानों के पदाधिकारी शामिल हुए और 15 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटा बहाल करने और खाली सीटों पर दाखिले के लिए पीसीएम में 60 की जगह 45 फीसदी अंक पर ही प्रवेश की छूट देने की मांग मुख्यमंत्री से की।
गौरतलब है कि पिछले दिन हुई केंद्रीय प्रवेश समिति कैब की बैठक में काउंसलिंग के बाद खाली प्रदेश के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कालेजों की सीटों पर प्रवेश के लिए पीसीएम में 50 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी अंकों का होना तय किया गया था। यूपीटिफ के महासचिव अतुल जैन ने कहा कि पिछली सरकार ने इस सत्र से 15 प्रतिशत मैनेजमेंट कोटा खत्म कर दिया है। मुश्किल यह है कि बीटेक, एमबीए और एमसीए में आवेदन भी पिछले साल से कम आए हैं। काउंसलिंग में देर होने और कोटा न होने की स्थिति में स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए अन्य विवि में पलायन करेंगे, जिससे स्थिति खराब होगी और कालेजों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। सिल्वर लाइन ग्रुप के चेयरमैन सुभाष जैन ने कहा कि पिछले साल खाली सीटों पर दाखिले के लिए 50 फीसदी अंक सीमा पर भी इंजीनियरिंग कालेजों की 40 फीसदी सीटें खाली बच गई थीं। एआईसीटीई का मानक के अनुसार इंजीनियरिंग कालेजों में एडमिशन के लिए न्यूनतम अंक सीमा 45 फीसदी है। ऐसे में खाली सीटों पर प्रवेश के लिए पीसीएम में 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य करना गलत है। ऐसी स्थिति में सीटें खाली बचेंगी और कालेज बंद करने की भी नौबत आ सकती है। अतुल जैन ने कहा कि इस 9 और 10 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश के संस्थान लखनऊ में बैठक कर अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। मौके पर बरेली से देवमूर्ति, इलाहाबाद से डा. जगदीश गुलाटी, आरपी चड्ढा, राकेश छारिया, पंकज अग्रवाल, वाईके गुप्ता, ग्रेटर नोएडा से विष्णु सरन, मेरठ से अतुल भारद्वाज और कानपुर से प्रनवीर सिंह मौजूद रहे।
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