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जिला अस्पताल में भर्ती मरीज को मुर्दाघर के सामने फेंका
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Sep 2016 02:41 AM IST
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जमीन पड़े वृद्ध का इलाज करते अपर सीएमओ, सीएमएस व अस्पताल कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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डॉक्टरों व जिला अस्पताल कर्मियों की हरकत से इंसानियत एक बार फिर शर्मसार हो गई। जिला अस्पताल के वार्ड में पांच दिन पहले भर्ती हुए जख्मी मरीज को मुर्दाघर के सामने जमीन पर सिर्फ इसलिए फेंक दिया गया, कि उसके शरीर के घावों में कीड़े पड़ गए थे।
मीडिया में मामला आने पर चौकन्ना हुए स्वास्थ्य महकमे के अफसरों व अस्पताल कर्मियों ने वृद्ध की ड्रेसिंग कर दोबारा वार्ड में भर्ती किया है। वहीं, स्थानीय निवासियों का कहना है कि बुधवार की सुबह कुछ लोग उसे स्ट्रेचर पर लादकर लाए और मुर्दाघर के सामने छोड़ गए।
जिला अस्पताल के वार्ड में 25 सितंबर को भर्ती हुए करीब 55 वर्षीय अज्ञात मरीज के अस्पताल के ही मुर्दाघर के सामने जमीन पर पड़े होने की जानकारी पर लोगों का मजमा लग गया। वृद्ध की जांघों में गंभीर घाव होने के साथ उसमें कीड़े पड़ गए थे।
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वहीं पैर की अंगुलियों में मांस के बजाय सिर्फ हड्डी दिखाई दे रही थी। वृद्ध के घावों से भीषण दुर्गंध उठ रही थी। सुबह से पेड़ के नीचे दर्द से तड़प रहे लाचार वृद्ध की हालत देख लोगों ने जिला अस्पताल कर्मियों को कई बार सूचना दी। लेकिन अस्पताल का कोई डाक्टर व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
मामला मीडिया में पहुंचने पर सीएमओ डा. अनीता सिंह ने अपर सीएमओ को मौके पर भेजा। अपर सीएमओ की सूचना पर पहुंचे सीएमएस व अस्पताल कर्मियों ने जमीन पर ही वृद्ध के घावों को ड्रेसिंग की गई। इसके बाद स्ट्रेचर में लादकर वृद्ध को दोबारा वार्ड में भर्ती किया गया। जहां बदबूदार कपड़े बदलकर उसे स्ट्रिप लगाई गई।
वृद्ध का इलाज कर रहे डाक्टर जसवीर सिंह ने बताया कि वृद्ध को झींझक पुलिस ने अज्ञात में भर्ती कराया था। उसका इलाज किया जा रहा है। वह बाहर कैसे चला गया। इसकी जानकारी नहीं है।
वृद्ध वार्ड से निकलकर मुर्दाघर के सामने कैसे पहुंचा। इसके लिए स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा। वार्ड में किसकी ड्यूटी थी, पता लगाया जाएगा। समिति बनाकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। - डा. अनीता सिंह (मुख्य चिकित्साधिकारी)
और भर आई आंखें...- कानपुर देहात। जिला अस्पताल के वार्ड के बजाय मुर्दाघर के सामने तेज धूप के बीच पड़ा बेबस वृद्ध पानी के लिए तड़पता रहा। इसपर स्थानीय निवासियों ने बोतल में पानी भरकर उसे दे दिया। लेकिन हिलने-डुलने तक में असमर्थ असहाय वृद्ध ने जैसे-तैसे पानी पिया। यह देख लोगोें की आंखें भर आई।
-
मानसिक स्थिति नहीं ठीक- कानपुर देहात। अधेड़ की मानसिक स्थिति ठीक न होने से वह अपना नाम, निवास के साथ कुछ भी नहीं बता पा रहा है। कभी वह इलाहाबाद का होने की बात कहता, कभी कुछ और। डाक्टरों का कहना है कि वृद्ध के कुछ भी ना बता पाने से परिवार आदि की जानकारी देने में परेशानी आ रही है।
अफसर एक-दूसरे पर थोपते रहे जिम्मेदारी- कानपुर देहात। अधेड़ के मुर्दाघर के सामने पड़े होने की जानकारी पर पहुंचे अपर सीएमओ डा. अशोक कुमार ने बताया कि सीएमएस से बात हुई है।
उन्होंने बताया कि पता नहीं वृद्ध कैसे वहां पहुंच गया। वृद्ध चलने-फिरने के लायक स्थिति में नहीं है। ऐसे में वह मुर्दाघर के सामने कैसे पहुंचा या कोई उसे छोड़ गया। इसके लिए सीएमएस से बात की जाएगी। मरीज की हालत गंभीर है, जो चिंता का विषय है। वहीं कार्यवाहक सीएमएस डा. पंकज श्रीवास्तव कमिश्नर की मीटिंग होने की बात कहकर चले गए।
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मीडिया में मामला आने पर चौकन्ना हुए स्वास्थ्य महकमे के अफसरों व अस्पताल कर्मियों ने वृद्ध की ड्रेसिंग कर दोबारा वार्ड में भर्ती किया है। वहीं, स्थानीय निवासियों का कहना है कि बुधवार की सुबह कुछ लोग उसे स्ट्रेचर पर लादकर लाए और मुर्दाघर के सामने छोड़ गए।
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जिला अस्पताल के वार्ड में 25 सितंबर को भर्ती हुए करीब 55 वर्षीय अज्ञात मरीज के अस्पताल के ही मुर्दाघर के सामने जमीन पर पड़े होने की जानकारी पर लोगों का मजमा लग गया। वृद्ध की जांघों में गंभीर घाव होने के साथ उसमें कीड़े पड़ गए थे।
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वहीं पैर की अंगुलियों में मांस के बजाय सिर्फ हड्डी दिखाई दे रही थी। वृद्ध के घावों से भीषण दुर्गंध उठ रही थी। सुबह से पेड़ के नीचे दर्द से तड़प रहे लाचार वृद्ध की हालत देख लोगों ने जिला अस्पताल कर्मियों को कई बार सूचना दी। लेकिन अस्पताल का कोई डाक्टर व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
मामला मीडिया में पहुंचने पर सीएमओ डा. अनीता सिंह ने अपर सीएमओ को मौके पर भेजा। अपर सीएमओ की सूचना पर पहुंचे सीएमएस व अस्पताल कर्मियों ने जमीन पर ही वृद्ध के घावों को ड्रेसिंग की गई। इसके बाद स्ट्रेचर में लादकर वृद्ध को दोबारा वार्ड में भर्ती किया गया। जहां बदबूदार कपड़े बदलकर उसे स्ट्रिप लगाई गई।
वृद्ध का इलाज कर रहे डाक्टर जसवीर सिंह ने बताया कि वृद्ध को झींझक पुलिस ने अज्ञात में भर्ती कराया था। उसका इलाज किया जा रहा है। वह बाहर कैसे चला गया। इसकी जानकारी नहीं है।
वृद्ध वार्ड से निकलकर मुर्दाघर के सामने कैसे पहुंचा। इसके लिए स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा। वार्ड में किसकी ड्यूटी थी, पता लगाया जाएगा। समिति बनाकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। - डा. अनीता सिंह (मुख्य चिकित्साधिकारी)
और भर आई आंखें...- कानपुर देहात। जिला अस्पताल के वार्ड के बजाय मुर्दाघर के सामने तेज धूप के बीच पड़ा बेबस वृद्ध पानी के लिए तड़पता रहा। इसपर स्थानीय निवासियों ने बोतल में पानी भरकर उसे दे दिया। लेकिन हिलने-डुलने तक में असमर्थ असहाय वृद्ध ने जैसे-तैसे पानी पिया। यह देख लोगोें की आंखें भर आई।
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मानसिक स्थिति नहीं ठीक- कानपुर देहात। अधेड़ की मानसिक स्थिति ठीक न होने से वह अपना नाम, निवास के साथ कुछ भी नहीं बता पा रहा है। कभी वह इलाहाबाद का होने की बात कहता, कभी कुछ और। डाक्टरों का कहना है कि वृद्ध के कुछ भी ना बता पाने से परिवार आदि की जानकारी देने में परेशानी आ रही है।
अफसर एक-दूसरे पर थोपते रहे जिम्मेदारी- कानपुर देहात। अधेड़ के मुर्दाघर के सामने पड़े होने की जानकारी पर पहुंचे अपर सीएमओ डा. अशोक कुमार ने बताया कि सीएमएस से बात हुई है।
उन्होंने बताया कि पता नहीं वृद्ध कैसे वहां पहुंच गया। वृद्ध चलने-फिरने के लायक स्थिति में नहीं है। ऐसे में वह मुर्दाघर के सामने कैसे पहुंचा या कोई उसे छोड़ गया। इसके लिए सीएमएस से बात की जाएगी। मरीज की हालत गंभीर है, जो चिंता का विषय है। वहीं कार्यवाहक सीएमएस डा. पंकज श्रीवास्तव कमिश्नर की मीटिंग होने की बात कहकर चले गए।