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गेहूं फसल के लिए मुसीबत बना चढ़ता तापमान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Mar 2017 02:30 AM IST
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पानी के अभाव में पीली पड़ी गेहूं की फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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फरवरी माह में मौसम के बदले मिजाज से किसानों के माथे पर शिकन आने लगी है। मार्च के शुरुआत दिनों में 30 डिग्री सेल्सियस पहुंचे तापमान से फूल रही गेहूं की फसल की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। पानी की समस्या के चलते खेतों में फसलें पीली पड़ने लगी हैं। परेशान किसानों ने फसलों की बुवाई के लिए नहरों में पंपिंग सेट रखकर खेतों की सिंचाई करना शुरू किया है।
बता दें कि इस बार फरवरी माह में ही ठंड का प्रकोप कम हो गया है। इससे अचानक बढ़ी गर्मी से फूल रही गेहूं की पिछेती फसलों में सिंचाई की समस्या खड़ी होने लगी है।
कृषि अधिकारियों की माने तो गेहूं की फूल रही पिछेती फसल के लिए उपयुक्त तापमान करीब 25 से 26 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। जबकि अगेती गेहूं फसल के लिए तापमान सही है। गर्मी बढ़ने से फसल सिंचाई की शुरू हुई समस्या किसानों के लिए समस्या बनी हुई है।
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वहीं नहरों, माइनरों व रजवहों में पानी न होने से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। लेकिन फसल बचाने के लिए किसानों के सामने सिर्फ टयूवबेल, पंपिंग सेट आदि का ही सहारा बचा है।
जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन का कहना है कि बढ़ा हुआ तापमान अगेती गेहूं फसल के लिए ठीक है। बालियां पकने में सहायक होता है। पिछेती गेहूं फसल की बढ़िया पैदावार लेने के लिए किसान खेत में पानी की कमी न होने दें और सिंचाई करते रहें।
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सिंचाई से फसल बचाने में जुटे किसान- कानपुर देहात। ठंड कम होने के बाद अचानक बढ़े तापमान से पानी मांग रही गेहूं सहित अन्य फसलों के लिए किसानों को कोई उपाय समझ नहीं आ रहा है।
किसानों का कहना है कि वह नहर, बंबा,, रजवहा, माइनर आदि में पानी न होने से समस्या बनी हुई है। ऐसे में नलकूप, पंपिंग सेट, ट्यूवबेल आदि के जरिए किसी तरह फसलों को पानी देकर अपनी फसलें बचाने में जुटे हैं। फसल की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। कई किसान निजी ट्यूबवेल व नलकूपों से 120 से 150 रुपये प्रतिघंटा के हिसाब से खेतों में पानी लगा रहे हैं।
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- पिछली फसल बर्बादी के अभी तक किसानों के घाव हरे हैं। इस बार दो बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई है। समय से पहले बढ़ी गर्मी से फल रही फसलों में सिंचाई की समस्या है। - विश्वनाथ (किसान नसरतपुर)
-तीन बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई है। पानी के अभाव में फसलें पीली पड़ रही हैं। निजी ट्यूबवेल व नलकूप मालिकों से 150 रुपये तक प्रतिघंटे के हिसाब से पानी खरीद रहे हैं। लागत बढ़ती जा रही है। - मूलचंद्र (किसान नबीपुर)
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- साढ़े छह बीघा में बोई गई गेहूं की फसल में बालियां आ रही हैं। सूख रही फसल बचाने के लिए वह दिन-रात जुटे हुए हैं। फसल सिंचाई के चलते लागत और बढ़ रही है। - इंद्रभान सिंह (किसान मंगटा)
नहर, बंबा, ट्यूबवेल व नलकूपों से सिंचाई करने से खेत मेें पर्याप्त नमी नहीं रह पाती है। पानी लगाने के चार दिन बाद ही खेतों में फिर सिंचाई की जरूरत होती है। हर मोड़ पर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। - धर्मेंद्र सिंह (किसान चंद्रनगर)
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बता दें कि इस बार फरवरी माह में ही ठंड का प्रकोप कम हो गया है। इससे अचानक बढ़ी गर्मी से फूल रही गेहूं की पिछेती फसलों में सिंचाई की समस्या खड़ी होने लगी है।
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कृषि अधिकारियों की माने तो गेहूं की फूल रही पिछेती फसल के लिए उपयुक्त तापमान करीब 25 से 26 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। जबकि अगेती गेहूं फसल के लिए तापमान सही है। गर्मी बढ़ने से फसल सिंचाई की शुरू हुई समस्या किसानों के लिए समस्या बनी हुई है।
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वहीं नहरों, माइनरों व रजवहों में पानी न होने से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। लेकिन फसल बचाने के लिए किसानों के सामने सिर्फ टयूवबेल, पंपिंग सेट आदि का ही सहारा बचा है।
जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन का कहना है कि बढ़ा हुआ तापमान अगेती गेहूं फसल के लिए ठीक है। बालियां पकने में सहायक होता है। पिछेती गेहूं फसल की बढ़िया पैदावार लेने के लिए किसान खेत में पानी की कमी न होने दें और सिंचाई करते रहें।
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सिंचाई से फसल बचाने में जुटे किसान- कानपुर देहात। ठंड कम होने के बाद अचानक बढ़े तापमान से पानी मांग रही गेहूं सहित अन्य फसलों के लिए किसानों को कोई उपाय समझ नहीं आ रहा है।
किसानों का कहना है कि वह नहर, बंबा,, रजवहा, माइनर आदि में पानी न होने से समस्या बनी हुई है। ऐसे में नलकूप, पंपिंग सेट, ट्यूवबेल आदि के जरिए किसी तरह फसलों को पानी देकर अपनी फसलें बचाने में जुटे हैं। फसल की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। कई किसान निजी ट्यूबवेल व नलकूपों से 120 से 150 रुपये प्रतिघंटा के हिसाब से खेतों में पानी लगा रहे हैं।
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- पिछली फसल बर्बादी के अभी तक किसानों के घाव हरे हैं। इस बार दो बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई है। समय से पहले बढ़ी गर्मी से फल रही फसलों में सिंचाई की समस्या है। - विश्वनाथ (किसान नसरतपुर)
-तीन बीघा खेत में गेहूं की फसल बोई है। पानी के अभाव में फसलें पीली पड़ रही हैं। निजी ट्यूबवेल व नलकूप मालिकों से 150 रुपये तक प्रतिघंटे के हिसाब से पानी खरीद रहे हैं। लागत बढ़ती जा रही है। - मूलचंद्र (किसान नबीपुर)
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- साढ़े छह बीघा में बोई गई गेहूं की फसल में बालियां आ रही हैं। सूख रही फसल बचाने के लिए वह दिन-रात जुटे हुए हैं। फसल सिंचाई के चलते लागत और बढ़ रही है। - इंद्रभान सिंह (किसान मंगटा)
नहर, बंबा, ट्यूबवेल व नलकूपों से सिंचाई करने से खेत मेें पर्याप्त नमी नहीं रह पाती है। पानी लगाने के चार दिन बाद ही खेतों में फिर सिंचाई की जरूरत होती है। हर मोड़ पर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। - धर्मेंद्र सिंह (किसान चंद्रनगर)