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जलिहापुर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दवाएं बांटी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Apr 2016 01:38 AM IST
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ब्लाक के जलिहापुर गांव में फैली चिकनपॉक्स से पीड़ित बच्चों को दूसरे दिन भी स्वास्थ्य टीम ने दवाएं आदि वितरित की। पड़ताल में पता चला कि गांव के हैंडपंप में निकल रहे पानी में लाल कण और पीला पानी निकल रहा है। वहीं गांव में फैली चिकनपॉक्स की बीमारी की वजह गंदगी भी बताई जा रही है।
शुक्रवार को दवाएं बांटने पहुंची आशा सुनैना यादव, एएनएन शोभा, मंजू कनौजिया आदि ने बताया कि पीड़ित बच्चों को चिकनपॉक्स और अन्य संक्रामक बीमारियों की दवाएं दी गई हैं। लेकिन, लोग अंधविश्वास के चक्कर में इलाज नहीं करा रहे हैं, उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि गांव में तीन बच्चियों की मौत के बाद दहशत है।
ग्राम प्रधान निर्मला सिंह ने बताया कि गांव में 30 हैंडपंप खराब हैं। रीबोर के लिए जिला पंचायतराज अधिकारी को लिखा गया है। गांव की महिलाएं राजाबेटी, मिठानी, मुन्नी देवी, छोटी, सुधा, सुषमा आदि ने बताया कि गांव एक हैंडपंप में पानी पीला आ रहा है और पानी में लाल कण भी निकल रहे हैं।
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उसी के पानी से संक्रामक बीमारी होने का अंदेशा लग रहा है। कहा कि अब बच्चों को हैंडपंप से पानी नहीं दिया जा रहा है। अब उनकी हालत में सुधार हो रहा है। उक्त महिलाओं ने गांव में व्याप्त गंदगी के साफ कराने की मांग की है। गांव की पांच हजार की आबादी गंदगी में जीने को मजबूर है।
शुक्रवार को दवाएं बांटने पहुंची आशा सुनैना यादव, एएनएन शोभा, मंजू कनौजिया आदि ने बताया कि पीड़ित बच्चों को चिकनपॉक्स और अन्य संक्रामक बीमारियों की दवाएं दी गई हैं। लेकिन, लोग अंधविश्वास के चक्कर में इलाज नहीं करा रहे हैं, उन्हें समझाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि गांव में तीन बच्चियों की मौत के बाद दहशत है।
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ग्राम प्रधान निर्मला सिंह ने बताया कि गांव में 30 हैंडपंप खराब हैं। रीबोर के लिए जिला पंचायतराज अधिकारी को लिखा गया है। गांव की महिलाएं राजाबेटी, मिठानी, मुन्नी देवी, छोटी, सुधा, सुषमा आदि ने बताया कि गांव एक हैंडपंप में पानी पीला आ रहा है और पानी में लाल कण भी निकल रहे हैं।
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उसी के पानी से संक्रामक बीमारी होने का अंदेशा लग रहा है। कहा कि अब बच्चों को हैंडपंप से पानी नहीं दिया जा रहा है। अब उनकी हालत में सुधार हो रहा है। उक्त महिलाओं ने गांव में व्याप्त गंदगी के साफ कराने की मांग की है। गांव की पांच हजार की आबादी गंदगी में जीने को मजबूर है।