{"_id":"57eecbf54f1c1bce4b574250","slug":"durga-temples-and-homes-today-virajengi","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंदिरों व घरों में आज विराजेंगी मां दुर्गा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंदिरों व घरों में आज विराजेंगी मां दुर्गा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Oct 2016 02:30 AM IST
विज्ञापन
नवरात्र पर अकबरपुर में सजा कालिका देवी का दरबार।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शारदीय नवरात्र के लिए शुक्रवार को भक्त गण मंदिरों व घरों में सजावट आदि की तैयारियों जुटे रहे। शनिवार से शुरू हो रहे नवरात्र के पहले दिन भक्तगण मां दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करेंगे। उधर, मंदिरों में देवी माता का शृंगार हो रहा।
मान्यता है कि दुर्गा मां के प्रथम रूप शैलपुत्री में सभी को आरोग्य बनाए रखने का आशीर्वाद छिपा हुआ है। माता दुर्गा का प्रथम भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। भक्तगण मां शैलपुत्री के स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए लालफूल, नारियल, सिंदूर, शृंगार सामग्री आदि समर्पित करेंगे।
मां शैलपुत्री घर-परिवार में खुशहाली लाती हैं और शरीर निरोगी रहता है। आराधना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। पंडित शिवनारायण तिवारी बताते हैं कि माता शैलपुत्री की पूजा में मां के चरणों में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने से यह रूप शैलीपुत्री कहलाता है।
विज्ञापन
ऐसे करें घट की स्थापना- नवरात्र पर घट स्थापना का विशेष महत्व है। पं. शिवनारायण बताते हैं कि जिस स्थान पर घट की स्थापना करनी हो उसे पहले साफ पानी से साफ करें। गंगा जल का छिड़काव करें।
अष्टदल बनाएं और उसके ऊपर लकड़ी का पाटा रखें। पाटे पर मां दुर्गा को आकर्षित करने वाला लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। पांच स्थानों पर चावल रखें और भगवान गणेश, मातृका, लोकपाल, नवग्रह व वरुणदेव को स्थान दें। फिर सभी को गंगा जल से पवित्र करें।
विधिविधान से करें माता का पूजन- कानपुर देहात। नवरात्र में माता का पूजन विधिविधान से करना चाहिए।
पं. शिवनारायण बताते हैं कि नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की मूर्ति, माता के नौ दिन शृंगार का सामान व वस्त्र, चुनरी, गंगाजल, नारियल, हल्दी की गांठ, पंचरत्न, लाल वस्त्र, चावल से भरा हुआ पात्र, गंगा की मिट्टी, जौ, बताशा, सुगंधित तेल, सिंदूर, कपूर, मेवा (पंच तत्व), दूध, दही, शहद, चीनी, रोली, पान, सुपारी, धूपबत्ती, घी का दीपक, फल, फूल, माला, चंदन, कलश आदि सामग्री का होना जरूरी है।
बाजारों में रही रौनक- कानपुर देहात। नवरात्र पर अकबरपुर शहर सहित जिलेभर की बाजारों में भक्तगण हवन-पूजन सहित अन्य सामग्री की खरीददारी रहे। भक्तों ने पूजन में लगने वाली सामग्री फूल-माला, नारियल, चुनरी, वस्त्र, फल आदि की खरीददारी महिलाओं ने की।
विज्ञापन
मान्यता है कि दुर्गा मां के प्रथम रूप शैलपुत्री में सभी को आरोग्य बनाए रखने का आशीर्वाद छिपा हुआ है। माता दुर्गा का प्रथम भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। भक्तगण मां शैलपुत्री के स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए लालफूल, नारियल, सिंदूर, शृंगार सामग्री आदि समर्पित करेंगे।
विज्ञापन
मां शैलपुत्री घर-परिवार में खुशहाली लाती हैं और शरीर निरोगी रहता है। आराधना करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। पंडित शिवनारायण तिवारी बताते हैं कि माता शैलपुत्री की पूजा में मां के चरणों में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने से यह रूप शैलीपुत्री कहलाता है।
विज्ञापन
ऐसे करें घट की स्थापना- नवरात्र पर घट स्थापना का विशेष महत्व है। पं. शिवनारायण बताते हैं कि जिस स्थान पर घट की स्थापना करनी हो उसे पहले साफ पानी से साफ करें। गंगा जल का छिड़काव करें।
अष्टदल बनाएं और उसके ऊपर लकड़ी का पाटा रखें। पाटे पर मां दुर्गा को आकर्षित करने वाला लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। पांच स्थानों पर चावल रखें और भगवान गणेश, मातृका, लोकपाल, नवग्रह व वरुणदेव को स्थान दें। फिर सभी को गंगा जल से पवित्र करें।
विधिविधान से करें माता का पूजन- कानपुर देहात। नवरात्र में माता का पूजन विधिविधान से करना चाहिए।
पं. शिवनारायण बताते हैं कि नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की मूर्ति, माता के नौ दिन शृंगार का सामान व वस्त्र, चुनरी, गंगाजल, नारियल, हल्दी की गांठ, पंचरत्न, लाल वस्त्र, चावल से भरा हुआ पात्र, गंगा की मिट्टी, जौ, बताशा, सुगंधित तेल, सिंदूर, कपूर, मेवा (पंच तत्व), दूध, दही, शहद, चीनी, रोली, पान, सुपारी, धूपबत्ती, घी का दीपक, फल, फूल, माला, चंदन, कलश आदि सामग्री का होना जरूरी है।
बाजारों में रही रौनक- कानपुर देहात। नवरात्र पर अकबरपुर शहर सहित जिलेभर की बाजारों में भक्तगण हवन-पूजन सहित अन्य सामग्री की खरीददारी रहे। भक्तों ने पूजन में लगने वाली सामग्री फूल-माला, नारियल, चुनरी, वस्त्र, फल आदि की खरीददारी महिलाओं ने की।