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मंत्रों के साथ हुई देवी चंद्रघंटा की आराधना
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Oct 2016 02:21 AM IST
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रूरा के दुर्गा मंदिर में आरती करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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शारदीय नवरात्र पर्व पर माता के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की मंत्रों के साथ भक्तों ने पूजा की। देवी मंदिर जय माता दी के उद्घोष से गुंजायमान हो उठे। मंगलवार सुबह से ही मां के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। शाम को भजन कीर्तन के बाद मां की महाआरती की गई।
मंगलवार सुबह से ही महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ देवी मंदिरों में दिखने लगी। कस्बा रूरा के मां दुर्गा मंदिर व पाथा देवी मंदिर में भक्तों ने उल्लास के साथ माता के तृतीय स्वरूप मां चद्रघंटा की उपासना कर परिवार में खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
वहीं मंदिर की सजावट आकर्षण छटा बिखेर रही थी। अकबरपुर के कालिका देवी मंदिर में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने चुनरी चढ़ाकर केले व मिठाई का भोग लगाया। सायं बेला में महिलाओं ने ढोलक मंजीरोें के साथ मां के भजन कीर्तन गाए।
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लमहारा स्थित ऐतिहासिक परहुल देवी मंदिर , सरगांव बुजुर्ग के कालिका देवी मंदिर में भी भक्तों की कतारें मां के दर्शन के लिए लगी रही। महिला व पुरुष भक्त जय माता दी के उद्घोष करते रहे। वहीं यूपीएसआईडीसी नवीपुर के कालीजी मंदिर, झाड़ी बाबा मंदिर में पूजा करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही।
कस्बा मुंगीसापुर स्थित काली माता मंदिर, दुर्गा माता मंदिर, माता रानी मंदिर, कालेश्वर मंदिर, ब्रम्ह नगर स्थित लोधेश्वर मंदिर में भक्तों ने पूजन वंदना की। मंदिरों में काफी भीड़ रही। सायंकालीन बेला में महिलाओं ने मंदिरों में भजन व कीर्तन कर मां का गुणगान किया।
घरों व मंदिरों में महिला व पुरुष भक्तों ने दुर्गा सप्तसती का पाठ किया। माना जाता है कि तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे का आकार का अर्द्धचंद्रमा सुशोभित है। माता में सुर संगीत का वशीकरण बीज मंत्र है, इनमें आराध्य शक्ति है। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का संदेश देती हैं। सच्चे मन से ध्यान करने पर मां कठिन से कठिन लक्ष्य को सुगमता से प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करती हैं।
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मंगलवार सुबह से ही महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ देवी मंदिरों में दिखने लगी। कस्बा रूरा के मां दुर्गा मंदिर व पाथा देवी मंदिर में भक्तों ने उल्लास के साथ माता के तृतीय स्वरूप मां चद्रघंटा की उपासना कर परिवार में खुशहाली और समृद्धि की कामना की।
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वहीं मंदिर की सजावट आकर्षण छटा बिखेर रही थी। अकबरपुर के कालिका देवी मंदिर में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने चुनरी चढ़ाकर केले व मिठाई का भोग लगाया। सायं बेला में महिलाओं ने ढोलक मंजीरोें के साथ मां के भजन कीर्तन गाए।
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लमहारा स्थित ऐतिहासिक परहुल देवी मंदिर , सरगांव बुजुर्ग के कालिका देवी मंदिर में भी भक्तों की कतारें मां के दर्शन के लिए लगी रही। महिला व पुरुष भक्त जय माता दी के उद्घोष करते रहे। वहीं यूपीएसआईडीसी नवीपुर के कालीजी मंदिर, झाड़ी बाबा मंदिर में पूजा करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही।
कस्बा मुंगीसापुर स्थित काली माता मंदिर, दुर्गा माता मंदिर, माता रानी मंदिर, कालेश्वर मंदिर, ब्रम्ह नगर स्थित लोधेश्वर मंदिर में भक्तों ने पूजन वंदना की। मंदिरों में काफी भीड़ रही। सायंकालीन बेला में महिलाओं ने मंदिरों में भजन व कीर्तन कर मां का गुणगान किया।
घरों व मंदिरों में महिला व पुरुष भक्तों ने दुर्गा सप्तसती का पाठ किया। माना जाता है कि तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे का आकार का अर्द्धचंद्रमा सुशोभित है। माता में सुर संगीत का वशीकरण बीज मंत्र है, इनमें आराध्य शक्ति है। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का संदेश देती हैं। सच्चे मन से ध्यान करने पर मां कठिन से कठिन लक्ष्य को सुगमता से प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करती हैं।