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बुवाई लाइन में करें, पैदावार अधिक होगी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2015 12:59 AM IST
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सुबह-शाम गलनभरी सर्दी पड़े और दोपहर में चटख धूप निकलने से मौसम का उतार-चढ़ाव जारी है। किसानों ने रबी की फसलों के लिए खतरनाक बताया है।
शस्य वैज्ञानिक बोले, किसान फसलों की बुवाई लाइन में करें, पैदावार अधिक होगी। रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुवाई का उचित समय 15 नवंबर से लेकर पांच दिसंबर के मध्य का होता है।
लेट प्रजाति के गेहूं की बुवाई 30 दिसंबर तक की जा सकती है। शस्य वैज्ञानिक डा. केके पांडेय ने बताया कि रबी हो चाहे खरीफ सभी फसलों की बुवाई लाइन में करनी चाहिए।
बताया कि इस विधि से बोई गई फसलों में 25 फीसदी तक अधिक पैदावार होती है। बताया कि विपरीत मौसम में फसल के पौधे जल्दी खराब नहीं होते हैं।
इधर, नवंबर के महीने में सर्दी न पड़ने और सूखे हालातों में सिंचाई संसाधनों की कमी से किसान दिसंबर के मध्य सप्ताह तक खेतों की पलेवा करने में परेशान रहे। अभी भी सैकड़ों एकड़ कृषिभूमि पलेवा के अभाव में परती पड़ी हुई है।
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बीते तीन-चार दिनों से मौसम का रुख बदला हुआ है कृषि वैज्ञानिक श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि मौसम के रुख को देखकर दो-तीन में हल्की बारिश होने की संभावना दिख रही है।
बताया कि यदि बारिश हुई तो खेतों में खड़ी दलहनी-तिलहनी फसलों में माहू कीट का प्रकोप बढ़ जाएगा। लाही-सरसों, मटर, सेम, फूलगोभी और मसूर की फसलों को अधिक नुकसान होने की आशंका है।
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शस्य वैज्ञानिक बोले, किसान फसलों की बुवाई लाइन में करें, पैदावार अधिक होगी। रबी की मुख्य फसल गेहूं की बुवाई का उचित समय 15 नवंबर से लेकर पांच दिसंबर के मध्य का होता है।
लेट प्रजाति के गेहूं की बुवाई 30 दिसंबर तक की जा सकती है। शस्य वैज्ञानिक डा. केके पांडेय ने बताया कि रबी हो चाहे खरीफ सभी फसलों की बुवाई लाइन में करनी चाहिए।
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बताया कि इस विधि से बोई गई फसलों में 25 फीसदी तक अधिक पैदावार होती है। बताया कि विपरीत मौसम में फसल के पौधे जल्दी खराब नहीं होते हैं।
इधर, नवंबर के महीने में सर्दी न पड़ने और सूखे हालातों में सिंचाई संसाधनों की कमी से किसान दिसंबर के मध्य सप्ताह तक खेतों की पलेवा करने में परेशान रहे। अभी भी सैकड़ों एकड़ कृषिभूमि पलेवा के अभाव में परती पड़ी हुई है।
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बीते तीन-चार दिनों से मौसम का रुख बदला हुआ है कृषि वैज्ञानिक श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि मौसम के रुख को देखकर दो-तीन में हल्की बारिश होने की संभावना दिख रही है।
बताया कि यदि बारिश हुई तो खेतों में खड़ी दलहनी-तिलहनी फसलों में माहू कीट का प्रकोप बढ़ जाएगा। लाही-सरसों, मटर, सेम, फूलगोभी और मसूर की फसलों को अधिक नुकसान होने की आशंका है।