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जिनको वोट दिया उन्होंने ही जेल भिजवाया
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 24 Aug 2015 11:09 PM IST
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फीरोजाबाद। पुलिस और प्रशासन के कहर का शिकार हुए ग्रामीणों की चुप्पी हवालात में टूट गई। अंदर का दर्द छलक आया और आंखों में आंसू भी आ गए। उनका कहना था जिनको वोट दिया उन्हीं के कारण जेल जाना पड़ा। सीधे किसी का नाम नहीं लिया बस कहा कि हम किसानों का दर्द बहुत ज्यादा है।
रविवार को हवालात में बंद किसानों का थाने में दर्द छलक आया। पूछने पर मायूस चेहरों ने प्रशासन और पुलिस की दबंगई बताई। खाकी की कारगुजारी और उस दिन की बेरहम दास्तां ने रोंगटे खड़े कर दिए। रामगढ़ की हवालात में किसानों ने शनिवार को प्रशासन की बर्बरता कही। बताया कि कैसे अपनी आवाज उठाने पहुंचे निहत्थे किसानों पर पुलिस ने लाठियां भांजी। धरती पुत्रों को पीट पीटकर धरती पर बिछा और जेसीबी, ट्रैक्टर समेत अन्य मशीनों को धरती मां की छाती पर चला दिया। पेट काटकर उगाई गई फसलों को मशीनों और ट्रैक्टरों ने रौंद दिया।
किसानों का कहना था कि चुनाव में जिन नेताओं ने जाति, धर्म और विकास की दुहाई देकर वोट मांगा था उनमें से कोई दुख बांटने नहीं आया। हमें लगता है जनता के नुमाइंदों ने मुखिया तक हमारी बात नहीं पहुंचाई। अधिकारियों ने जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। पुलिस प्रशासन ने मनमानी कर ली। हवालात में पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह, सर्वेश कुमार, सुरेश चंद्र, ब्रजेश कुमार, ज्ञान प्रकाश, वीरेंद्र कुमार सतीश चंद्र थे।
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किसानों को नहीं मिली जमानत
आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को सोमवार को भी न्यायालय से जमानत नहीं मिल सकी। इन किसानों की पैरवी कर रहे परिजनों को न्यायालय में शोक अवकाश हो जाने के कारण सफलता नहीं मिली। किसानों को संगीन धाराएं लगाकर जेल में डालने का काम जिला प्रशासन ने किया है। परिजनों की मानें तो वह जेल में बंद परिवार के बुजुर्गों को किसी तरह से बाहर ही निकालने में जुगत में जुटे हैं।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ काम
फीरोजाबाद। नगला गुलाल में सोमवार को भी पुलिस एवं पीएसी के साए में आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे का काम चला। एक्सप्रेस वे का निर्माण कराने वाली कंपनी की मशीनें मिट्टी उठाती रहीं। किसानों की मानें तो अब कंपनी के अधिकारी उनकी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं।
नगला खंगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगला गुलाल में सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश किसान पुलिस की गिरफ्तारी के भय से गांव में नहीं गए। चिंता यही कि कहीं पुलिस उन्हें भी जेल नहीं भेज दे। प्रशासन को चिंता सता रही है कि महिलाएं एकत्रित होकर हाइवे का निर्माण कर रही मशीनों को रोकने को आगे नहीं आ जाएं। इसके कारण सोमवार को नगला गुलाल के पास करीब 40 से अधिक महिला सिपाही के साथ दारोगा को तैनात किया था। जसराना व शिकोहाबाद क्षेत्र के सीओ, चार एसओ और पीएसी के जवान मुस्तैद दिखाई दिए। किसानों में गुस्सा इस बात को लेकर था कि काफी प्राचीन शिवालय तक को नहीं ही बख्शा। नियम यह था कि कोई मंदिर हटाने से पूर्व वहां दूसरा मंदिर बनाकर प्रशासन देगा। लेकिन जिला प्रशासन ने ऐसा भी नहीं किया। प्रशासन ने पूरी तरह से मनमानी की है।
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रविवार को हवालात में बंद किसानों का थाने में दर्द छलक आया। पूछने पर मायूस चेहरों ने प्रशासन और पुलिस की दबंगई बताई। खाकी की कारगुजारी और उस दिन की बेरहम दास्तां ने रोंगटे खड़े कर दिए। रामगढ़ की हवालात में किसानों ने शनिवार को प्रशासन की बर्बरता कही। बताया कि कैसे अपनी आवाज उठाने पहुंचे निहत्थे किसानों पर पुलिस ने लाठियां भांजी। धरती पुत्रों को पीट पीटकर धरती पर बिछा और जेसीबी, ट्रैक्टर समेत अन्य मशीनों को धरती मां की छाती पर चला दिया। पेट काटकर उगाई गई फसलों को मशीनों और ट्रैक्टरों ने रौंद दिया।
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किसानों का कहना था कि चुनाव में जिन नेताओं ने जाति, धर्म और विकास की दुहाई देकर वोट मांगा था उनमें से कोई दुख बांटने नहीं आया। हमें लगता है जनता के नुमाइंदों ने मुखिया तक हमारी बात नहीं पहुंचाई। अधिकारियों ने जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। पुलिस प्रशासन ने मनमानी कर ली। हवालात में पूर्व प्रधान वीरेंद्र सिंह, सर्वेश कुमार, सुरेश चंद्र, ब्रजेश कुमार, ज्ञान प्रकाश, वीरेंद्र कुमार सतीश चंद्र थे।
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किसानों को नहीं मिली जमानत
आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को सोमवार को भी न्यायालय से जमानत नहीं मिल सकी। इन किसानों की पैरवी कर रहे परिजनों को न्यायालय में शोक अवकाश हो जाने के कारण सफलता नहीं मिली। किसानों को संगीन धाराएं लगाकर जेल में डालने का काम जिला प्रशासन ने किया है। परिजनों की मानें तो वह जेल में बंद परिवार के बुजुर्गों को किसी तरह से बाहर ही निकालने में जुगत में जुटे हैं।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ काम
फीरोजाबाद। नगला गुलाल में सोमवार को भी पुलिस एवं पीएसी के साए में आगरा-लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे का काम चला। एक्सप्रेस वे का निर्माण कराने वाली कंपनी की मशीनें मिट्टी उठाती रहीं। किसानों की मानें तो अब कंपनी के अधिकारी उनकी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं।
नगला खंगर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगला गुलाल में सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा। अधिकांश किसान पुलिस की गिरफ्तारी के भय से गांव में नहीं गए। चिंता यही कि कहीं पुलिस उन्हें भी जेल नहीं भेज दे। प्रशासन को चिंता सता रही है कि महिलाएं एकत्रित होकर हाइवे का निर्माण कर रही मशीनों को रोकने को आगे नहीं आ जाएं। इसके कारण सोमवार को नगला गुलाल के पास करीब 40 से अधिक महिला सिपाही के साथ दारोगा को तैनात किया था। जसराना व शिकोहाबाद क्षेत्र के सीओ, चार एसओ और पीएसी के जवान मुस्तैद दिखाई दिए। किसानों में गुस्सा इस बात को लेकर था कि काफी प्राचीन शिवालय तक को नहीं ही बख्शा। नियम यह था कि कोई मंदिर हटाने से पूर्व वहां दूसरा मंदिर बनाकर प्रशासन देगा। लेकिन जिला प्रशासन ने ऐसा भी नहीं किया। प्रशासन ने पूरी तरह से मनमानी की है।