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विकास के नाम पर नहीं होगी धन की बर्बादी

Mon, 22 Aug 2016 11:31 PM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Mon, 22 Aug 2016 11:31 PM IST
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The name of development will not be a waste of money
विकास के नाम पर नहीं होगी धन की बर्बादी - फोटो : Amar Ujala
जांच में निर्माण की उपयोगिता सिद्ध होने पर ही कमिश्नर और डीएम देंगे कार्य की अनुमति
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लगातार मिल रही शिकायतों पर प्रशासन ने अपनाया सख्त रुख
शहर के विकास के लिए शासन से करोड़ों रुपया नगर निगम को मिल रह है। लेकिन इस धनराशि का व्यय बेहद अनियोजित तरीके से किया जा रहा है। जहां विकास कार्यों की सर्वाधिक जरूरत है उन पर ध्यान न देकर ऐसे कई स्थानों पर नगर निगम ने काम करा दिए हैं जहां फिलहाल अधिक जरूरत नहीं थी। इन शिकायतों पर जिला प्रशासन ने विकास कार्यों के लिए नीति तैयार की है। अब डीएम और कमिश्नर स्तर से अब अनुमति मिलने के बाद तब ही काम कराए जाएंगे जब कार्य की उपयोगिता जांच में साबित हो जाएगी।
पालिका से नगर निगम का दर्जा मिले दो साल हो गए। शासन द्वारा विकास कार्यों के लिए निगम को दोनों हाथों से धन दिया। शहर से जुड़ी नई आबादी, 13 ग्रामसभाओं में काफी क्षेत्र ऐसा है, जहां आज भी सड़क, नाली खड़ंजा न होने के कारण क्षेत्र की जनता जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। कच्ची गलियों के निर्माण को जनता शिकायतें करते थक चुकी है, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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विकास के नाम पर हुई करोड़ों की बर्बादी
मुख्यमंत्री घोषणा के तहत नगर निगम द्वारा हाल में ही 50 करोड़ से अधिक धनराशि के कार्य कराए, जिसमें धन की बर्बादी अधिक हुई। नगर निगम द्वारा करीब ढाई करोड़ की लागत से रहना नाले की दोनों तरफ सड़क का निर्माण पर कार्य कर दिया। जबकि विकास प्राधिकरण द्वारा इसी मार्ग का डेढ़ साल पूर्व सीसी निर्माण कराया था। विभव नगर में सड़क निर्माण पर 50.22  लाख खर्च किए। स्टेशन रोड मार्ग निर्माण पर 45.29 लाख, गणेश नगर मार्ग निर्माण पर 51.49 लाख, लेबर कालोनी मार्ग निर्माण पर 22.66 लाख, कोटला रोड मार्ग निर्माण पर 22.13 लाख, सदर बाजार मार्ग निर्माण पर 24.38 लाख सहित कई स्थानों पर रातों-रात डामर बिछवाकर करोड़ों रुपये बर्बाद किए। कुछेक क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो इन क्षेत्रों में सड़के इतनी खराब नहीं थी जितनी नगर निगम में शामिल 13 ग्रामसभाओं के रास्ते हैं।
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अब नहीं चलेगी नगर निगम की मनमानी
अब नगर निगम प्रशासन की मनमानी नहीं चल सकेगी। नगर निगम द्वारा हाल ही में 11 करोड़ से अधिक की कार्य योजना बनाकर डीएम को सौंपी गई है। जिन स्थानों पर कार्य के प्रस्ताव बनाए गए हैं, डीएम द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम व तहसीलदार से कार्य की उपयोगिता की जांच कराई जा रही है।

क्या कहते हैं लोग
श्रीभगवान का कहना है कि नई आबादी रहना में आधा दर्जन कच्ची गलियां पड़ी हैं, जहां जलनिकासी का साधन न होने के कारण नारकीय हालात हैं।

मुकेश का कहना है कि नई आबादी के क्षेत्र में अभी तक एक बार भी सड़कों का निर्माण नहीं कराया गया। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।

ओमप्रकाश का कहना है कि इंद्रानगर में कई कच्ची गलियों हैं, जहां से पैदल निकासी का भी साधन नहीं है। कच्ची गलियों में जलभराव होने से बीमारियां फैल रही हैं।


नितिन जय का कहना है कि आनंद नगर में सड़क निर्माण को शिकायत करते थक चुके हैं। नगर निगम के अलावा तहसील दिवस में भी शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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