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जिला अस्पताल में नहीं है एंटी रैबिज इंजेक्शन
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Tue, 14 Feb 2017 08:56 PM IST
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एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे लोग।
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श्वान (कुत्ते) के काटने के बाद जानलेवा बीमारी से बचाने वाला एंटीरैबीज इंजेक्शन जिला अस्पताल में खत्म हो गया है। वहीं, शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ रही है। नगर निगम के पास इन्हें पकड़ने की कोई योजना ही नहीं है। इन घटनाओं के बीच चिंता की बात यह है कि गरीब परिवार के किसी व्यक्ति पर यदि कुत्ते का हमला होता है तो उसे इंजेक्शनों की यह कमी भारी पड़ती है।
जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन की करीब छह माह से मारामारी चल रही है। जिस कंपनी एआरवी (इंटी रैबीज वैक्सीन) खरीदे जाते थे, उससे आपूर्ति नहीं हो रही है। करीब पांच माह बाद जैसे-तैसे इंजेक्शन की एक हजार वाइल आई थी जो 25 दिन में खत्म हो गई। शुक्रवार से फिर एआरवी खत्म हो गई है।
आसपास देहात क्षेत्रों से प्रत्येक दिन 150 से दो सौ मरीज जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। मगर इंजेक्शन खत्म का नोटिस देखकर निराश होकर लौट जाते हैं। या फिर चार लोग पैसे मिलाकर बाहर से इंजेक्शन खरीदते हैं और एक वाइल को चार लोगों को लगाया जाता है।
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टोटके और देशी दवा से होता है इलाज
कुत्ता काटने का इलाज लोग टोटके और गांव देहातों में देशी दवा लगवाने में भी लोग विश्वास करते हैं, जो लोग महंगा इजेक्शन नहीं ले सकते हैं। मजबूरन इन्हीं इलाज पर विश्वास करते हैं। वहीं, चिकित्सक इस इजाज को पूर्ण सुरक्षित नहीं मानते हैं।
इंजेक्शन के नाम पर तीन को ठगा
जिला अस्पताल में ठग भी सक्रिय हो गए हैं। सोमवार को देहात क्षेत्रों से लोग इंजेक्शन लगवाने आए। एक ठग ने रुपये एकत्रित कर चार लोगों के इंजेक्शन लगवाने की बात की। सौ-सौ रुपये तीन लोगों से लिए और इंजेक्शन लेने के बहाने चला गया। लौटकर नहीं आया तो अन्य मरीज अस्पताल में हंगामा करने लगे।
क्या कहते हैं अधिकारी
इंजेक्शन की डिमांड काफी पहले भेजी थी। जिस कंपनी से टेंडर है, उसने इंजेक्शन नहीं भेजे थे। शासन को भी कई बार अवगत कराया जा चुका है। डीएम स्तर से भी शासन को पत्र लिखा जा चुका है। एक हजार इंजेक्शन एक माह पूर्व आए, तीन दिन पूर्व वह भी खत्म हो चुके हैं।
डा. अजय अग्रवाल, सीएमएस
जिला अस्पताल, फिरोजाबाद
मरीज बोले
टूंडला से आए अंकित पाठक ने कहा कि यहां इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं। पूछने पर कुछ भी नहीं बताया जाता। इंजेक्शन महंगा है, खरीद कर लगवाना हमारे बजट में नहीं।
गढ़ी छत्रपति से आयीं कमलेश शर्मा ने बताया कि वह अपने बेटे के एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आई हैं। मगर यहां इंजेक्शन नहीं हैं। न ही कोई बता रहा कब तक आएंगे इंजेक्शन।
नगला भाऊ निवासी अविनाश ने कहा कि क्षेत्र में आवारा जानवर सक्रिय हैं। इंजेक्शन लगवाने आए कई लोग लौट चुके हैं, हम भी मजबूरन लौटकर जा रहे हैं।
एदमात्पुर से आए अरविंद राठौर ने कहा कि जिला अस्पताल छिपी टोला में भी इंजेक्शन नहीं है। फिरोजाबाद जिला अस्पताल में भी इंजेक्शन नहीं लगा तो चार लोगों से रूपये मिलाकर बाहर से इंजेक्शन खरीदकर लाए हैं।
गरीबों के लिए मुश्किल है बाहर का इलाज
जिला अस्पताल में एक रुपये का पर्चा बनवाकर इंजेक्शन लगवाया जाता है। तीन से पांच इंजेक्शन का कोर्स होता है। वहीं, बाहर इंजेक्शन 319 रुपये का दिया जाता है। वह भी पांच इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जिन्हे लगवाना गरीब मरीजों के लिए बेहद मुश्किल होता है।
जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन की करीब छह माह से मारामारी चल रही है। जिस कंपनी एआरवी (इंटी रैबीज वैक्सीन) खरीदे जाते थे, उससे आपूर्ति नहीं हो रही है। करीब पांच माह बाद जैसे-तैसे इंजेक्शन की एक हजार वाइल आई थी जो 25 दिन में खत्म हो गई। शुक्रवार से फिर एआरवी खत्म हो गई है।
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आसपास देहात क्षेत्रों से प्रत्येक दिन 150 से दो सौ मरीज जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। मगर इंजेक्शन खत्म का नोटिस देखकर निराश होकर लौट जाते हैं। या फिर चार लोग पैसे मिलाकर बाहर से इंजेक्शन खरीदते हैं और एक वाइल को चार लोगों को लगाया जाता है।
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टोटके और देशी दवा से होता है इलाज
कुत्ता काटने का इलाज लोग टोटके और गांव देहातों में देशी दवा लगवाने में भी लोग विश्वास करते हैं, जो लोग महंगा इजेक्शन नहीं ले सकते हैं। मजबूरन इन्हीं इलाज पर विश्वास करते हैं। वहीं, चिकित्सक इस इजाज को पूर्ण सुरक्षित नहीं मानते हैं।
इंजेक्शन के नाम पर तीन को ठगा
जिला अस्पताल में ठग भी सक्रिय हो गए हैं। सोमवार को देहात क्षेत्रों से लोग इंजेक्शन लगवाने आए। एक ठग ने रुपये एकत्रित कर चार लोगों के इंजेक्शन लगवाने की बात की। सौ-सौ रुपये तीन लोगों से लिए और इंजेक्शन लेने के बहाने चला गया। लौटकर नहीं आया तो अन्य मरीज अस्पताल में हंगामा करने लगे।
क्या कहते हैं अधिकारी
इंजेक्शन की डिमांड काफी पहले भेजी थी। जिस कंपनी से टेंडर है, उसने इंजेक्शन नहीं भेजे थे। शासन को भी कई बार अवगत कराया जा चुका है। डीएम स्तर से भी शासन को पत्र लिखा जा चुका है। एक हजार इंजेक्शन एक माह पूर्व आए, तीन दिन पूर्व वह भी खत्म हो चुके हैं।
डा. अजय अग्रवाल, सीएमएस
जिला अस्पताल, फिरोजाबाद
मरीज बोले
टूंडला से आए अंकित पाठक ने कहा कि यहां इंजेक्शन खत्म हो चुके हैं। पूछने पर कुछ भी नहीं बताया जाता। इंजेक्शन महंगा है, खरीद कर लगवाना हमारे बजट में नहीं।
गढ़ी छत्रपति से आयीं कमलेश शर्मा ने बताया कि वह अपने बेटे के एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने आई हैं। मगर यहां इंजेक्शन नहीं हैं। न ही कोई बता रहा कब तक आएंगे इंजेक्शन।
नगला भाऊ निवासी अविनाश ने कहा कि क्षेत्र में आवारा जानवर सक्रिय हैं। इंजेक्शन लगवाने आए कई लोग लौट चुके हैं, हम भी मजबूरन लौटकर जा रहे हैं।
एदमात्पुर से आए अरविंद राठौर ने कहा कि जिला अस्पताल छिपी टोला में भी इंजेक्शन नहीं है। फिरोजाबाद जिला अस्पताल में भी इंजेक्शन नहीं लगा तो चार लोगों से रूपये मिलाकर बाहर से इंजेक्शन खरीदकर लाए हैं।
गरीबों के लिए मुश्किल है बाहर का इलाज
जिला अस्पताल में एक रुपये का पर्चा बनवाकर इंजेक्शन लगवाया जाता है। तीन से पांच इंजेक्शन का कोर्स होता है। वहीं, बाहर इंजेक्शन 319 रुपये का दिया जाता है। वह भी पांच इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जिन्हे लगवाना गरीब मरीजों के लिए बेहद मुश्किल होता है।