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नम्रता की भावना से ही जीवन का विकास संभव : ज्ञान सागर
अमर उजाला ब्यूूराे, फीराेजाबाद
Updated Sat, 14 Jan 2017 11:30 PM IST
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दिगंबर जैन रत्नत्रय मंदिर नसियाजी में चल रही धर्मसभा में आचार्य ज्ञान सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को नर से नारायण बनने की कला बताई। उन्होंने कहा कि नम्रता की भावना से ही जीवन का विकास संभव है।
उन्होंने कहा कि झुकने की कला जिनके पास आ जाती है, वह सब कुछ पा लेता है। अहंकार जीवन को विनाश की ओर ले जाता है। अगर सामने वाला अकड़ बनकर आपसे बात करता है तो उसके सामने अकड़ मत दिखाओे। एक नरम और एक गरम होगा तो घर बसा रहेगा। अहम का जब तक संचार रहेगा, तब तक अहम् यानि मैं अर्थात आत्मा की ओ नहीं जा सकता। धर्मसभा में खतौली से आए धन्यकुमार जैन ने गुरु महिमा प्रस्तुत की। धर्मसभा में अरुण जैन पीली कोठी, रतन, विजयदेवता, निर्मल जैन, अजय बजाज आदि रहे।
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उन्होंने कहा कि झुकने की कला जिनके पास आ जाती है, वह सब कुछ पा लेता है। अहंकार जीवन को विनाश की ओर ले जाता है। अगर सामने वाला अकड़ बनकर आपसे बात करता है तो उसके सामने अकड़ मत दिखाओे। एक नरम और एक गरम होगा तो घर बसा रहेगा। अहम का जब तक संचार रहेगा, तब तक अहम् यानि मैं अर्थात आत्मा की ओ नहीं जा सकता। धर्मसभा में खतौली से आए धन्यकुमार जैन ने गुरु महिमा प्रस्तुत की। धर्मसभा में अरुण जैन पीली कोठी, रतन, विजयदेवता, निर्मल जैन, अजय बजाज आदि रहे।
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