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मीठा पानी देने के लिए गांवों में जमीन लेना सबसे बडी चुनौती
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फिरोजाबाद। खारा पानी प्रभावित गांवों में हरेक घर तक मीठा पानी पहुंचाने के लिए एनसीसी कंपनी ने सर्वे तो शुरू कर दिया है लेकिन काम शुरू करते ही परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंट्रोल रूम, जलाशय, पानी वितरण केंद्र बनाने के लिए ग्राम सभा की जमीन चिह्नित करना है। इसके लिए कंपनी को ग्राम पंचायतों में सहयोग नहीं मिल रहा है। इसी पर कंपनी प्रतिनिधियों के साथ जिला प्रशासन ने बुधवार को बैठक आयोजित की है।
जनपद में पांच सौ अधिक गांव ऐसे हैं जहां पानी पीने योग्य नहीं है। पानी खारा है। पानी में फ्लोराइड और आर्सेनिक की मात्रा इतनी अधिक है कि लोग बीमार पड़ जाते हैं। इन गांवों में हरेक घर तक मीठा पानी पहुंचाने का जिम्मा शासन ने एनसीसी कंपनी को दिया है। लघु सिंचाई विभाग की देखरेख में यह कंपनी काम करेगी। कंपनी से जुडे़ लोग गांवों में सर्वे शुरू कर चुके हैं। एक सप्ताह में मात्र दस गांवों में सर्वे शुरू हो सका है। कंपनी से जुडे़ प्रतिनिधि बताते हैं कंपनी से जुडे़ लोग गांव में सर्वे करने जाते हैं तो ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान कहीं सहयोग करते हैं तो कहीं नहीं करते हैं। इस योजना में सबसे बड़ा काम पानी सप्लाई के लिए कंट्रोल रूम, जलाशय आदि बनाने का है। इसके लिए ग्राम पंचायत की जमीन चाहिए। ग्राम पंचायतों में कहां कितनी जमीन है इसका नक्शा और डिटेल कंपनी के पास नहीं है। इस स्थिति से जिलाधिकारी को कंपनी ने अवगत कराया है। इसी योजना को लेकर जिला प्रशासन ने बुधवार को तभी एसडीएम और तहसीलदार की बैठक बुलाई है।
जिला प्रशासन को सर्वे में आ रही प्रारंभिक परेशानी से अवगत कराया है। योजना के तहत ग्राम पंचायतों की जमीन पर ही जलाशय और कंट्रोल रूम आदि बनाए जाने हैं। इसके लिए तहसीलों की मदद भी चाहिए।
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वीरेंद्र कुमार - डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर एनसीसी कंपनी
सर्वे के यह है बिंदु
- गांव की आबादी ।
- गांव का क्षेत्र ।
- मीठा पानी देने को कहां कितनी पाइपलाइन डालनी है ।
- पाइपलाइन डालने में कितने मोड़ देने होंगे।
- गांव में मकान कितने हैं ।
- ग्राम पंचायत की कितनी खाली जमीन है।
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जनपद में पांच सौ अधिक गांव ऐसे हैं जहां पानी पीने योग्य नहीं है। पानी खारा है। पानी में फ्लोराइड और आर्सेनिक की मात्रा इतनी अधिक है कि लोग बीमार पड़ जाते हैं। इन गांवों में हरेक घर तक मीठा पानी पहुंचाने का जिम्मा शासन ने एनसीसी कंपनी को दिया है। लघु सिंचाई विभाग की देखरेख में यह कंपनी काम करेगी। कंपनी से जुडे़ लोग गांवों में सर्वे शुरू कर चुके हैं। एक सप्ताह में मात्र दस गांवों में सर्वे शुरू हो सका है। कंपनी से जुडे़ प्रतिनिधि बताते हैं कंपनी से जुडे़ लोग गांव में सर्वे करने जाते हैं तो ग्राम पंचायतों के पूर्व प्रधान कहीं सहयोग करते हैं तो कहीं नहीं करते हैं। इस योजना में सबसे बड़ा काम पानी सप्लाई के लिए कंट्रोल रूम, जलाशय आदि बनाने का है। इसके लिए ग्राम पंचायत की जमीन चाहिए। ग्राम पंचायतों में कहां कितनी जमीन है इसका नक्शा और डिटेल कंपनी के पास नहीं है। इस स्थिति से जिलाधिकारी को कंपनी ने अवगत कराया है। इसी योजना को लेकर जिला प्रशासन ने बुधवार को तभी एसडीएम और तहसीलदार की बैठक बुलाई है।
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जिला प्रशासन को सर्वे में आ रही प्रारंभिक परेशानी से अवगत कराया है। योजना के तहत ग्राम पंचायतों की जमीन पर ही जलाशय और कंट्रोल रूम आदि बनाए जाने हैं। इसके लिए तहसीलों की मदद भी चाहिए।
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वीरेंद्र कुमार - डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर एनसीसी कंपनी
सर्वे के यह है बिंदु
- गांव की आबादी ।
- गांव का क्षेत्र ।
- मीठा पानी देने को कहां कितनी पाइपलाइन डालनी है ।
- पाइपलाइन डालने में कितने मोड़ देने होंगे।
- गांव में मकान कितने हैं ।
- ग्राम पंचायत की कितनी खाली जमीन है।