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विज्ञान के प्रयोग से प्रतिभा निखारेंगे विद्यार्थी
Amar Ujala
Updated Thu, 29 Sep 2016 01:05 AM IST
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विज्ञान के प्रयोग से प्रतिभा निखारेंगे विद्यार्थी
- फोटो : Logo
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जिले के 20 परिषदीय स्कूलों में स्थापित होंगी प्रयोगशालाएं
परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब विज्ञान में प्रयोग करेंगे, विश्लेषण कर निष्कर्ष निकालेंगे और फिर करेंगे आविष्कार। जी हां, राष्ट्रीय आविष्कार योजना परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों में वैज्ञानिक सोच का विकास करेगी। बाल विज्ञानी के रूप में उनकी नींव मजबूत होगी तो वे विज्ञान और गणित में पब्लिक स्कूलों के बच्चों के मुकाबले खड़े हो सकेंगे।
योजना के अंतर्गत जिले के प्रत्येक ब्लाक से दो-दो जूनियर विद्यालय चयनित होंगे। दो जूनियर विद्यालय नगर क्षेत्र में भी चयनित किए जाएंगे। यानी 20 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान व गणित की प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए इन 20 में से विद्यालय पर 45 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए विभाग को बजट मिल गए हैं। कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्रओं में प्रौद्योगिकी की समझ विकसित की जाएगी। परीक्षण के लिए बच्चों को पूरे अवसर मिलेंगे। विद्यालय के एक अलग कमरे में प्रयोगशाला को विज्ञान के उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। विज्ञान-गणित के अध्यापक बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे। विज्ञान विषय में मेधावी छात्रों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे, तो सामान्य बच्चों में विज्ञान व गणित में रुचि व जिज्ञासा विकसित की जाएगी। ये विद्यालय विज्ञान शिक्षा के ‘माडल’ के रूप में विकसित होंगे। दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों को समय-समय पर इन स्कूलों का भ्रमण कराया जाएगा। तीन दिन में स्कूलों का चयन हो जाएगा। इसके बाद चयनित स्कूलों में सात दिन में बजट पहुंच जाएगा। 15-20 दिनों में योजना लागू हो जाएगी।
विज्ञान क्लब का होगा गठन, प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी
बच्चों में क्षमता संवर्धन के लिए विज्ञान क्लब का गठन किया जाएगा। प्रोजेक्ट व माडल एवं अन्य प्रतियोगिताएं भी होंगी। पुरस्कार भी दिए जाएंगे। इसके लिए विद्यालय में पांच हजार रुपये का बजट रहेगा। विज्ञान व गणित क्विज, ‘विज्ञान एक वरदान’ पर निबंध लेखन व नाटक भी होंगे।
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गूगल वेब पोर्टल का भी सहयोग
प्रयोगशाला कक्ष में प्रमुख वैज्ञानिकों के नाम व उनके आविष्कार के बारे में दीवार पर पेंटिंग कराई जाएगी। आधुनिक लैब सजावटी रूप दिया जाएगा। गूगल वेब पोर्टल पर दर्शित ज्ञान पिटारा एवं अन्य पोर्टल की मदद से शिक्षक ई-कंटेंट विकसित करेंगे। इसके लिए राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान से भी सहयोग लिया जाएगा।
इन प्रयोगशालाओं के बनने से विज्ञान की शिक्षा को नए आयाम मिल सकेंगे। गत वर्ष विज्ञान व गणित के शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। अब प्रयोगशाला की स्थापना से बच्चों को प्रयोग व विश्लेषण आदि के अवसर मिलेंगे।
सच्चिदानंद यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब विज्ञान में प्रयोग करेंगे, विश्लेषण कर निष्कर्ष निकालेंगे और फिर करेंगे आविष्कार। जी हां, राष्ट्रीय आविष्कार योजना परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों में वैज्ञानिक सोच का विकास करेगी। बाल विज्ञानी के रूप में उनकी नींव मजबूत होगी तो वे विज्ञान और गणित में पब्लिक स्कूलों के बच्चों के मुकाबले खड़े हो सकेंगे।
योजना के अंतर्गत जिले के प्रत्येक ब्लाक से दो-दो जूनियर विद्यालय चयनित होंगे। दो जूनियर विद्यालय नगर क्षेत्र में भी चयनित किए जाएंगे। यानी 20 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान व गणित की प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए इन 20 में से विद्यालय पर 45 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए विभाग को बजट मिल गए हैं। कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्रओं में प्रौद्योगिकी की समझ विकसित की जाएगी। परीक्षण के लिए बच्चों को पूरे अवसर मिलेंगे। विद्यालय के एक अलग कमरे में प्रयोगशाला को विज्ञान के उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। विज्ञान-गणित के अध्यापक बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे। विज्ञान विषय में मेधावी छात्रों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे, तो सामान्य बच्चों में विज्ञान व गणित में रुचि व जिज्ञासा विकसित की जाएगी। ये विद्यालय विज्ञान शिक्षा के ‘माडल’ के रूप में विकसित होंगे। दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों को समय-समय पर इन स्कूलों का भ्रमण कराया जाएगा। तीन दिन में स्कूलों का चयन हो जाएगा। इसके बाद चयनित स्कूलों में सात दिन में बजट पहुंच जाएगा। 15-20 दिनों में योजना लागू हो जाएगी।
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विज्ञान क्लब का होगा गठन, प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी
बच्चों में क्षमता संवर्धन के लिए विज्ञान क्लब का गठन किया जाएगा। प्रोजेक्ट व माडल एवं अन्य प्रतियोगिताएं भी होंगी। पुरस्कार भी दिए जाएंगे। इसके लिए विद्यालय में पांच हजार रुपये का बजट रहेगा। विज्ञान व गणित क्विज, ‘विज्ञान एक वरदान’ पर निबंध लेखन व नाटक भी होंगे।
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गूगल वेब पोर्टल का भी सहयोग
प्रयोगशाला कक्ष में प्रमुख वैज्ञानिकों के नाम व उनके आविष्कार के बारे में दीवार पर पेंटिंग कराई जाएगी। आधुनिक लैब सजावटी रूप दिया जाएगा। गूगल वेब पोर्टल पर दर्शित ज्ञान पिटारा एवं अन्य पोर्टल की मदद से शिक्षक ई-कंटेंट विकसित करेंगे। इसके लिए राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान से भी सहयोग लिया जाएगा।
इन प्रयोगशालाओं के बनने से विज्ञान की शिक्षा को नए आयाम मिल सकेंगे। गत वर्ष विज्ञान व गणित के शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। अब प्रयोगशाला की स्थापना से बच्चों को प्रयोग व विश्लेषण आदि के अवसर मिलेंगे।
सच्चिदानंद यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी