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Firozabad News: राज्य सरकार की अपील खारिज, सेशन कोर्ट ने बरकरार रखा ट्रायल कोर्ट का फैसला, दो आरोपी बरी
Thu, 23 Jul 2026 12:24 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Thu, 23 Jul 2026 12:24 AM IST
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सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
फिरोजाबाद। एडीजे एफटीसी-2 विमल वर्मा की अदालत ने फर्जी दस्तावेज बनवाकर धोखाधड़ी करने के आरोपी दो भाई राकेश पांडेय और विवेक पांडेय को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया है। राज्य सरकार द्वारा ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश (29 अगस्त 2023) के खिलाफ दाखिल की गई दांडिक अपील को अदालत ने खारिज कर दिया।
मामला थाना लाइनपार क्षेत्र के द्वारिकापुरम का है। रीना पांडेय ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि उनके पति राकेश पांडेय और उनके देवर विवेक पांडेय ने भरण-पोषण के मुकदमे में अनुचित लाभ लेने के उद्देश्य से उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर मैसर्स रीना डिजायनर के नाम से श्रम विभाग से दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान का फर्जी पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
शिकायत के बाद विभागीय जांच में प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था, जिसके आधार पर थाना लाइनपार में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच कर आरोपी राकेश और उसके भाई विवेक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव के चलते दोनों भइयों को इस आरोप में बरी कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार इस मामले में अपील में चली गई। एडीजे एफटीसी-2 कोर्ट ने पत्रावली और गवाहों के बयानों का गहन अनुशीलन किया। इसके बाद निचली अदालत के फैसले को सही पाते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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मामला थाना लाइनपार क्षेत्र के द्वारिकापुरम का है। रीना पांडेय ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि उनके पति राकेश पांडेय और उनके देवर विवेक पांडेय ने भरण-पोषण के मुकदमे में अनुचित लाभ लेने के उद्देश्य से उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर मैसर्स रीना डिजायनर के नाम से श्रम विभाग से दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान का फर्जी पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
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शिकायत के बाद विभागीय जांच में प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था, जिसके आधार पर थाना लाइनपार में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच कर आरोपी राकेश और उसके भाई विवेक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव के चलते दोनों भइयों को इस आरोप में बरी कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार इस मामले में अपील में चली गई। एडीजे एफटीसी-2 कोर्ट ने पत्रावली और गवाहों के बयानों का गहन अनुशीलन किया। इसके बाद निचली अदालत के फैसले को सही पाते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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