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नोटबंदी से धीमी पड़ी जेड़ाझाल परियोजना की रफ्तार
ब्यूरो, अमर उजाला,फीरोजाबाद
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:45 PM IST
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जेड़ाझाल परियोजना की रफ्तार मंद पड़ गई है
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के कारण जेड़ाझाल परियोजना की रफ्तार मंद पड़ गई है। परियोजना के अंतर्गत शहर में निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक और सीडब्लूआर का निर्माण कछुआ गति से हो रहा है। नोटबंदी के कारण पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बरेली, झांसी, कानपुर से आए 70 प्रतिशत मजदूर काम छोड़कर घर लौट चुके हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पेयजल समस्या के निदान के लिए 432.83 करोड़ की पेयजल पुनर्गठन परियोजना को मंजूरी दी है। परियोजना के तहत नंदपुर गांव में पानी के स्टोरेज के लिए झील का निर्माण कराया जाना है। नंदपुर से सैलई तक पाइप लाइन डालने और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण होना है। शहर की जनता को मीठा पानी उपलब्ध कराने के लिए 16 ओवरहेड टैंक और 22 सीडब्लूआर का निर्माण कराया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा जमीन उपलब्ध कराने के साथ ही आवास विकास कालोनी सुहाग नगर, संतनगर, प्रेमपुर रैपुरा, आसफाबाद, रसूलपुर, गणेशनगर में ओवरहेड टैंक और सीडब्लूआर का निर्माण शुरू करा दिया गया है। दीपावली से पूर्व तक कार्य तेजी चल रहा था। हालांकि आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से जेड़ाझाल परियोजना की गति मंद पड़ गई है। ठेकेदारों पर मजदूरों को देने के लिए कैश उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झांसी, बरेली, कानपुर से आई लेबर घर लौट गई है। जलनिगम से जुड़े सूत्रों की मानें तो सभी साइटों से 70 प्रतिशत लेबर काम छोड़कर जा चुकी है। मात्र 30 प्रतिशत लेबर ही कार्य कर रही है।
शहर में ओवरहेड टैंक और सीडब्लूआर निर्माण कार्य में पहले सभी साइटों पर 25 से 30 मजदूर करते थे। वर्तमान में नोटबंदी के बाद आठ से दस मजदूर कार्य कर रहे हैं। ठेकेदारों पर मजदूरी देने के लिए कैश का इंतजाम नहीं है। ऐसी स्थिति में मजदूर कार्य छोड़ गए हैं।
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राकेश कुमार
अधिशासी अभियंता-जलनिगम अस्थाई खंड
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पेयजल समस्या के निदान के लिए 432.83 करोड़ की पेयजल पुनर्गठन परियोजना को मंजूरी दी है। परियोजना के तहत नंदपुर गांव में पानी के स्टोरेज के लिए झील का निर्माण कराया जाना है। नंदपुर से सैलई तक पाइप लाइन डालने और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण होना है। शहर की जनता को मीठा पानी उपलब्ध कराने के लिए 16 ओवरहेड टैंक और 22 सीडब्लूआर का निर्माण कराया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा जमीन उपलब्ध कराने के साथ ही आवास विकास कालोनी सुहाग नगर, संतनगर, प्रेमपुर रैपुरा, आसफाबाद, रसूलपुर, गणेशनगर में ओवरहेड टैंक और सीडब्लूआर का निर्माण शुरू करा दिया गया है। दीपावली से पूर्व तक कार्य तेजी चल रहा था। हालांकि आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से जेड़ाझाल परियोजना की गति मंद पड़ गई है। ठेकेदारों पर मजदूरों को देने के लिए कैश उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झांसी, बरेली, कानपुर से आई लेबर घर लौट गई है। जलनिगम से जुड़े सूत्रों की मानें तो सभी साइटों से 70 प्रतिशत लेबर काम छोड़कर जा चुकी है। मात्र 30 प्रतिशत लेबर ही कार्य कर रही है।
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शहर में ओवरहेड टैंक और सीडब्लूआर निर्माण कार्य में पहले सभी साइटों पर 25 से 30 मजदूर करते थे। वर्तमान में नोटबंदी के बाद आठ से दस मजदूर कार्य कर रहे हैं। ठेकेदारों पर मजदूरी देने के लिए कैश का इंतजाम नहीं है। ऐसी स्थिति में मजदूर कार्य छोड़ गए हैं।
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राकेश कुमार
अधिशासी अभियंता-जलनिगम अस्थाई खंड