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लापरवाही : बिना फिटनेस और स्पीड गवर्नर के जनपद की सीमा में दौड़ रहीं स्लीपर कोच बसें
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फिरोजाबाद। फिटनेस और स्पीड गवर्नर के बिना ही स्लीपर कोच बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। खामियों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। हादसों से हो रहे जान-माल के नुकसान के बाद भी संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे।
बीते एक सप्ताह के अंदर जनपद में दो बसें दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं। दिल्ली से बिहार जा रही स्लीपर कोच बस कठफोरी के समीप शुक्रवार को एक्सप्रेस-वे पर बने डिवाइडर पर चढ़ गई। इससे बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हालांकि बस में सवार यात्री सुरक्षित रहे। बुधवार को दिल्ली से पश्चिम बंगाल जा रही स्लीपर कोच बस मटसेना थाना क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में करीब 13 यात्री घायल हो गए। इससे पूर्व भी स्लीपर कोच बसें एक्सप्रेस-वे पर कई बार दुर्घटनाग्रस्त हुई हैं। इसके बाद भी संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी इन बस चालकों और मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
बिना फिटनेस के दौड़ रही हैं बसें
सड़कों पर दौड़ रहीं स्लीपर बसों में चेकिंग के नाम पर अधिकारियों द्वारा फॉर्मेलिटी पूरी की जाती है। सदर की पूर्व एसडीएम बुशरा बानो ने 25 दिन पूर्व चेकिंग के दौरान चार बसों के चालान काटे थे। इनमें क्षमता से अधिक सवारियां बैठी होने के साथ-साथ बसों का फिटनेस सर्टीफिकेट नहीं था।
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बसों में नहीं है स्पीड गर्वनर
सूत्रों के अनुसार स्लीपर कोच बसों में स्पीड गवर्नर तक नहीं है। चालक जल्दी गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस को निर्धारित से अधिक रफ्तार पर बस को चलाते हैं। जो रास्ते में रात के समय हादसों का कारण बन जाती है। जबकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद जो बसें आ रही हैं उनमें स्पीड गवर्नर लगा हुआ है।
बसें दुर्घटनाग्रस्त न हों। इसके लिए विभाग लगातार अभियान चला रहा है। एक माह में करीब 25 बसों का चालान किया जा चुका है। बसों की फिटनेस पर भी पूरा ध्यान रखा जाता है। -हरिओम, आरआई परिवहन।
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बीते एक सप्ताह के अंदर जनपद में दो बसें दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं। दिल्ली से बिहार जा रही स्लीपर कोच बस कठफोरी के समीप शुक्रवार को एक्सप्रेस-वे पर बने डिवाइडर पर चढ़ गई। इससे बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हालांकि बस में सवार यात्री सुरक्षित रहे। बुधवार को दिल्ली से पश्चिम बंगाल जा रही स्लीपर कोच बस मटसेना थाना क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में करीब 13 यात्री घायल हो गए। इससे पूर्व भी स्लीपर कोच बसें एक्सप्रेस-वे पर कई बार दुर्घटनाग्रस्त हुई हैं। इसके बाद भी संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी इन बस चालकों और मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
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बिना फिटनेस के दौड़ रही हैं बसें
सड़कों पर दौड़ रहीं स्लीपर बसों में चेकिंग के नाम पर अधिकारियों द्वारा फॉर्मेलिटी पूरी की जाती है। सदर की पूर्व एसडीएम बुशरा बानो ने 25 दिन पूर्व चेकिंग के दौरान चार बसों के चालान काटे थे। इनमें क्षमता से अधिक सवारियां बैठी होने के साथ-साथ बसों का फिटनेस सर्टीफिकेट नहीं था।
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बसों में नहीं है स्पीड गर्वनर
सूत्रों के अनुसार स्लीपर कोच बसों में स्पीड गवर्नर तक नहीं है। चालक जल्दी गंतव्य तक पहुंचने के लिए बस को निर्धारित से अधिक रफ्तार पर बस को चलाते हैं। जो रास्ते में रात के समय हादसों का कारण बन जाती है। जबकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद जो बसें आ रही हैं उनमें स्पीड गवर्नर लगा हुआ है।
बसें दुर्घटनाग्रस्त न हों। इसके लिए विभाग लगातार अभियान चला रहा है। एक माह में करीब 25 बसों का चालान किया जा चुका है। बसों की फिटनेस पर भी पूरा ध्यान रखा जाता है। -हरिओम, आरआई परिवहन।