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किसानों की गुहार अब न बरसो मेघा, चौपट हो जाएगी पूरी फसल
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टूंडला के गांव पचोखरा में आलू के खेत में भरा पानी
- फोटो : TUNDLA
फिरोजाबाद। बृहस्पतिवार रात से रुक-रुक कर बारिश होती रही। कुछ स्थानों पर ओले भी गिरे। शुक्रवार दोपहर बाद भी खूब बारिश हुई। लगातार बारिश से गेहूं, आलू और सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। आलू की खोदाई का काम भी प्रभावित है। खेतों में पानी भर गया है। फसलों के नुकसान से किसान चिंतित हैं। प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन नहीं कर पा रही हैं।
खैरगढ़ क्षेत्र के गांव हाथवंत, रहना और प्रतापपुर में बारिश के साथ ओले गिरे। यहां फसल को करीब 30 से 35 प्रतिशत नुकसान की आशंका है। किसान राम दयाल, सूर्य प्रकाश शर्मा, रामौतार शर्मा फसलों को काफी नुकसान हुआ है, प्रशासन ठीक से आकलन नहीं कर रहा। मक्खनपुर में भी ओले गिरने आलू की खेती प्रभावित हुई है।
किसान तेजपाल सिंह मान सिंह, देवलाल आदि का कहना है कि यदि एक-दो दिन में मौसम साफ नहीं होता है तो 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान होगा। एका क्षेत्र के किसान बन्ने खां, काके दीक्षित ने बताया कि इस बरसात से सर्वाधिक नुकसान निचले इलाकों में खेती करने वालों को हुआ है।
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बरसात के पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। कठफोरी में सुबह करीब दो घंटे पानी पड़ा। दोपहर बाद फिर से बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई। किसान दिलाशाराम, सुनील ठाकुर आदि ने बताया कि रविवार तक मौसम साफ नहीं हुआ तो आलू की खेती पूरी तरह से बरबाद हो जाएगी।
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खैरगढ़ क्षेत्र के गांव हाथवंत, रहना और प्रतापपुर में बारिश के साथ ओले गिरे। यहां फसल को करीब 30 से 35 प्रतिशत नुकसान की आशंका है। किसान राम दयाल, सूर्य प्रकाश शर्मा, रामौतार शर्मा फसलों को काफी नुकसान हुआ है, प्रशासन ठीक से आकलन नहीं कर रहा। मक्खनपुर में भी ओले गिरने आलू की खेती प्रभावित हुई है।
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किसान तेजपाल सिंह मान सिंह, देवलाल आदि का कहना है कि यदि एक-दो दिन में मौसम साफ नहीं होता है तो 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान होगा। एका क्षेत्र के किसान बन्ने खां, काके दीक्षित ने बताया कि इस बरसात से सर्वाधिक नुकसान निचले इलाकों में खेती करने वालों को हुआ है।
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बरसात के पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। कठफोरी में सुबह करीब दो घंटे पानी पड़ा। दोपहर बाद फिर से बारिश होने से किसानों की चिंता बढ़ गई। किसान दिलाशाराम, सुनील ठाकुर आदि ने बताया कि रविवार तक मौसम साफ नहीं हुआ तो आलू की खेती पूरी तरह से बरबाद हो जाएगी।