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बारिश व तेज हवाओं से खेतों में भरा पानी, फसलें बर्बाद

Wed, 24 Aug 2016 11:59 PM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Wed, 24 Aug 2016 11:59 PM IST
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Rain and strong winds in the fields filled with water, crops ruined
बारिश व तेज हवाओं से खेतों में भरा पानी, फसलें बर्बाद - फोटो : Amar Ujala
फसलों का नुकसान देख किसानों के निकले आंसू
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मंगलवार रात्रि में हुई बारिश व तेज हवाओं ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया। खेतों में पानी भरने से बाजरे की फसलें गिर गयीं। साथ ही कुछ निचले खेतों में जलभराव होने से फसलें डूब गईं। फसलों की हालत देख किसानों के आंसू निकल आए। साथ ही कई स्थानों पर पेड़ टूट गए।
 तीन दिन आसमान साफ रहने के साथ ही मंगलवार से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह तक जारी रही। साथ ही रात्रि में तेज हवाएं भी चलीं। बारिश से खेतों में पानी भर गया तो तेज हवाओं से खेतों में खड़ी बाजरे आदि की फसलें जमीन पर बिछ गयीं। सुबह किसान खेतों पर पहुंचे तो फसलों की हालत देख रो पड़े।
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 किसानों ने डूबी फसलों को बचाने के लिए खेतों से पानी निकालने का प्रयास किया। यही नहीं रात्रि में बारिश के साथ चली तेज हवाओं से कइ स्थानों पर पेड़ टूट गये तो कई जड़ से उखड़ गये। टूंडला रेलवे स्टेशन क्षेत्र में ठाकुर बीरीसिंह इंटर कालेज के सामने खड़ा पेड़ टूटकर सड़क पर लटक गया। एटा रोड पर सिकरारी हाउस के पास एक पेड़ टूट गया। इसके साथ ही कुछ स्थानों पर होर्डिंग्स भी टूट गए। वहीं कुछ पश्चिमी क्षेत्रों में रात भर हुई रिमझिम बारिश को किसानों ने फसलों के लिए अच्छा बताया।
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साहूकार से कर्ज लेकर दस बीघा बाजरे की फसल तैयार की थी। खेतों में लहलहाती फसल को देख लगता था कि अच्छी फसल होगी तो साहूकार का कर्जा देकर परिवार के खाने के लिए बाजरा पर्याप्त होगा, किंतु बरसात व आंधी ने पूरी फसल को खेतों में बिछा दिया। अब साहूूकार का पैसा कैसे चुकेगा यह परेशानी का सबब बना हुआ है।  
 किसान नेमीचन्द्र, निवासी रसूलाबाद

बाजरे की करीब 45 बीघा फसल बोई थी। फसल करने के लिए जुताई, बीज, खाद आदि पर करीब 25 हजार की लागत लगी है। फसल अच्छी उगी थी तथा खेतों में लहलहा रही थी, किंतु मंगलवार को आई बारिश से पूरी फसल बर्बाद हो गई।
किसान अयोध्या प्रसाद, गांव बजहेरा

छह बीघा बाजरा की फसल को आवारा गायों ने पहले ही नष्ट कर दिया था। बची खुची फसल मंगलवार की रात में बरसात का पानी भरने से खराब हो गई। अब परिवार के लिए बाजरा खरीदना होगा।
 किसान सत्यपाल, गांव ठार हाथी

इस वर्ष बारिश हो रही है अच्छी बात है, किंतु भारी बरसात किसानों के लिए कहर बरपा रही है। सात बीघा फसल में चार हजार की लागत व मेहनत बेकार चली गई। छोटे किसानों के लिए इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं होगा।

 किसान दुलीचन्द्र, निवासी ठार हाथी

 बरसात के मौसम में किसान खेतों में खड़ी फसल में पानी न भरने दें। खेतों में भरे पानी की निकासी का इंतजाम करें। खेतों में पानी भरने से खड़ी फसल हवा चलते ही जमीन पर गिर जाती है। साथ ही किसान निचले खेतों में धान, ढेंचा आदि की फसलें करें। खेत की मेंढ़ों पर पेड़ लगाएं।
 डा. सुभाष शर्मा
 कृषि-उद्यान वैज्ञानिक, हजरतपुर  
 
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