{"_id":"64bd6f67f03c3d60af0fb4b4","slug":"practical-examination-of-compartment-and-improvement-on-25-firozabad-news-c-169-1-sagr1021-1180-2023-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Firozabad News: हथिनीकुंड से फिर छोड़ा पानी, किसान बेचैन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Firozabad News: हथिनीकुंड से फिर छोड़ा पानी, किसान बेचैन
Sun, 23 Jul 2023 11:50 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sun, 23 Jul 2023 11:50 PM IST
विज्ञापन
टूंडला। यमुना जलस्तर रविवार को भी कम हुआ। हथिनीकुंड से फिर से साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से क्षेत्र के किसानों में बेचैनी है। वे खरीफ की फसल को लेकर खासे चिंतित हैं।
पिछले दिनों यमुना ने रौद्र रूप दिखाया, जिसमें तटवर्ती किसानों की सैकड़ो बीघा फसल यमुना में समा गई। बृहस्पतिवार से यमुना जलस्तर कम हो रहा है। रविवार को भी दो फीट जलस्तर कम हुआ। प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। किसान दोबारा फसलों की तैयारी में जुटे थे, किंतु हथिनी कुंड से पानी छोड़े जाने की खबरों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
किसानों का कहना है कि खेतों में भरा पानी निकलने के बाद वे दोबारा बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। किसानों को खरीफ की फसलों की चिंता सता रही है।
इन गांवों के किसान हुए थे प्रभावित
यमुना में आई बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचने वाले कई गांव हैं। इसके साथ ही सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में तलहटी में बसे रुधऊ मुस्तकिल, नगला केशों,जटपुरा, रसूलाबाद, रामगढ़, कुतुकपुर साहब, नगला काले, नगला राजपति, ग्वारई, नियामत पुर, नगला नंदा, घुरुकूआ, नगला मूसटा, ठार डेका, नगला हरवंश, ठार बर व गार्डन गांव आदि हैं।
विज्ञापन
मेहनत पर फिर गया पानी
45 बीघ खेत बटाई पर ली थी जिसमें 20 बीघा में बाजरा, 15 बीघा में मक्का व 10 बीघा में सब्जियां बोई थी। सभी बाढ़ से नष्ट हो गईं। अब सोच रहे कि कौन सी फ़सल बोई जाए। यमुना पुनः आती है तो बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होगी। - शंकरलाल, किसान रसूलाबाद
साहूकारों से कर्जा लेकर 20 बीघा सब्जियाँ, 15 बीघा बाजरा व 22 बीघा मक्का फसल बोई थी, किंतु यमुना में आई बाढ़ सबकुछ बहा ले गई। यदि दोबारा जलस्तर बढ़ा तो वे दोबारा फसल कैसे करेंगे और फसल नहीं हुई तो साहूकारों का कर्जा कैसे उतरेगा। - रमेशचन्द्र, किसान रामगढ़
विज्ञापन
पिछले दिनों यमुना ने रौद्र रूप दिखाया, जिसमें तटवर्ती किसानों की सैकड़ो बीघा फसल यमुना में समा गई। बृहस्पतिवार से यमुना जलस्तर कम हो रहा है। रविवार को भी दो फीट जलस्तर कम हुआ। प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। किसान दोबारा फसलों की तैयारी में जुटे थे, किंतु हथिनी कुंड से पानी छोड़े जाने की खबरों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि खेतों में भरा पानी निकलने के बाद वे दोबारा बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। किसानों को खरीफ की फसलों की चिंता सता रही है।
इन गांवों के किसान हुए थे प्रभावित
यमुना में आई बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचने वाले कई गांव हैं। इसके साथ ही सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में तलहटी में बसे रुधऊ मुस्तकिल, नगला केशों,जटपुरा, रसूलाबाद, रामगढ़, कुतुकपुर साहब, नगला काले, नगला राजपति, ग्वारई, नियामत पुर, नगला नंदा, घुरुकूआ, नगला मूसटा, ठार डेका, नगला हरवंश, ठार बर व गार्डन गांव आदि हैं।
विज्ञापन
मेहनत पर फिर गया पानी
45 बीघ खेत बटाई पर ली थी जिसमें 20 बीघा में बाजरा, 15 बीघा में मक्का व 10 बीघा में सब्जियां बोई थी। सभी बाढ़ से नष्ट हो गईं। अब सोच रहे कि कौन सी फ़सल बोई जाए। यमुना पुनः आती है तो बच्चों के लिए दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होगी। - शंकरलाल, किसान रसूलाबाद
साहूकारों से कर्जा लेकर 20 बीघा सब्जियाँ, 15 बीघा बाजरा व 22 बीघा मक्का फसल बोई थी, किंतु यमुना में आई बाढ़ सबकुछ बहा ले गई। यदि दोबारा जलस्तर बढ़ा तो वे दोबारा फसल कैसे करेंगे और फसल नहीं हुई तो साहूकारों का कर्जा कैसे उतरेगा। - रमेशचन्द्र, किसान रामगढ़