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Firozabad News: नर्सिंग छात्रों को मिलेगा श्रेणी प्रमाण पत्र

Wed, 19 Jul 2023 11:51 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jul 2023 11:51 PM IST
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Nursing students will get category certificate

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लखनऊ। प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और डिग्री लेने वाले छात्रों को रोजगार दिलाने के लिए नई रणनीति अपनाई गई है। अब इन छात्रों को परीक्षा के जरिए क्लीनिकल जानकारी का आकलन किया जाएगा। फिर उन्हें श्रेणीवार प्रमाण पत्र दिया जाएगा। ए, बी और सी प्रमाण पत्र होने से इन छात्रों को रोजगार मिलने में आसानी होगी।
प्रदेश में हर साल 13120 बीएससी नर्सिंग और 2520 पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग की परीक्षा पास करते हैं। इसके बाद भी अभी सरकारी अस्पतालों में मानक के अनुसार नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसकी बड़ी वजह है कि आयोग की ओर से होने वाली परीक्षा में तमाम छात्र उत्तीर्ण ही नहीं हो पाते हैं। इस समस्या को देखते हुए अब शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई तरह की रणनीति अपनाई गई है। निजी कॉलेजों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा कराई जा रही है। अब यह भी रणनीति तैयार की गई है कि प्रदेश से डिग्री लेने वाले छात्रों को एक्सीलेंस सेंटर पर परीक्षा कराई जाएगी। इस परीक्षा में मिले नंबरों को आधार पर छात्रों को ए, बी, सी प्रमाणपत्र दिया जाएगा। जो छात्र परीक्षा में 90 फीसदी से ज्यादा अंक लाएंगे उन्हें ए प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसी तरह 70 से 80 वाले को बी और 50 से 60 वाले को सी प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जिन छात्रों का प्रर्दशन 50 फीसदी से कम होगा, उन्हें कोई प्रमाण पत्र नहीं दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग में निकलने वाली भर्ती में सभी आवेदन के योग्य होंगे, लेकिन श्रेणी तय होने से निजी क्षेत्र में ए एवं बी वालों को फायदा मिलेगा। इससे नर्सिंग छात्र-छात्राओं में पढ़ाई के प्रति प्रतिस्पर्धी माहौल भी तैयार होगा। इसके लिए एसजीपीजीआई के कॉलेज ऑफ नर्सिंग को पहला सेंटर बनाने की तैयारी है।
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क्लीनिकल परीक्षा भी होगी
उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी में उत्तर प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों के छात्र भी पंजीयन के लिए आते हैं। ऐसे में डिग्री लेने के बाद पंजीयन के लिए आने वाले छात्रों को क्लीनिकल परीक्षा के दौर से भी गुजरना होगा। फिर उनका पंजीयन किया जाएगा। इससे पढाई के दौरान छात्र-छात्राओं का क्लीनिकल कार्य पर ज्यादा फोकस होगा।
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