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दूध प्रबंधन के लाले, परेशान स्कूल वाले
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 14 Jul 2015 10:39 PM IST
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स्कूलों में मध्याह्न भोजन के मीनू में दूध का होना टेढ़ी खीर बनता जा रहा है। सप्ताह में एक दिन बच्चों को कोफ्ता चावल के साथ गर्म दूध मुहैया कराना शिक्षकों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। कई बाधाएं हैं जो शासनादेश के क्रियान्वयन की राह रोकेंगी। फीरोजाबाद में डेढ़ लाख से अधिक बच्चों की निगाहें बुधवार को गुरुजी की ओर टिकी दिखेंगी। देखना है कि शासन की मंशा को प्रशासन कैसे अनुपालन में लाता है।
प्रदेश सरकार ने सप्ताह में बुधवार के दिन परिषदीय स्कूलों के बच्चों को दूध बांटने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशानुसार आज से बच्चों को दूध दिया जाना है लेकिन अभी तक तय बजट के अंतर्गत दूध की आपूर्ति का प्रबंध नहीं हो पाया है। इसे लेकर मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के हाथ पांव फूले हैं। अधिकारी भी परेशान हैं। अभी तक मध्याह्न भोजन में बच्चों को दलिया, चावल, खीर व रोटी सब्जी जो परोसा जा रहा है, उसका खर्च तय है। सप्ताह में एक दिन बुधवार को बच्चों को दूध व कोफ्ता चावल दिया जाना है। तय खर्च में 200 मिली ग्राम दूध देना लगभग 40 फीसदी तक महंगा पडे़गा। संकट है कि इस अतिरिक्त खर्च को कैसे और कहां से समायोजित किया जाए। दूसरा संकट शुद्ध दूध की उपलब्धता का है। नगरीय क्षेत्र में गांव से आने वाले डिब्बे वाले दूध पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दूध की उपलब्धता है, वहां से शहरों में सप्लाई की जा रही है। गांवों में दूध से खोया भी बनाया जा रहा है।
जिले की तस्वीर
नगरीय क्षेत्र में बच्चे : 67,000 हजार
ग्रामीण क्षेत्र में बच्चे : 1,12,000 लाख
कुल बच्चे : 1,86,000 लाख
प्रति बच्चा दूध : 200 मिली.
प्रतिमाह प्रति दूध : 800 मिली.
माह में कुल दूध चाहिए : 1,48000 ली.
उपस्थिति कम रहे तो खर्च : 1 लाख ली. लगभग
दूध का आर्थिक ग्राफ
200 मिली का मूल्य: 7.50 रुपये
प्रति छात्र कनवर्जन चार्ज प्राथमिक में : 3.59 रुपये
जूनियर में : 5.38 रुपये
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प्राथमिक में घाटा : 3.91 रुपये
जूनियर में घाटा : 2.11 रुपये
विशेष: चूंकि दूध के साथ बच्चों को चावल व कोफ्ता भी दिया जाना है इसलिए प्रति छात्र स्वीकृत खाद्यान्न की कीमत का समायोजन इसमें नहीं हो सकता है।
और भी हैं बाधाएं
- इतनी मात्रा में शुद्ध दूध की आपूर्ति कहां से ली जाए।
- नगर में पराग डेयरी से चल रही बात अभी फाइनल नहीं।
- स्कूलों में पहुंचाने तक कैसे रखा जाए दूध गरम।
- बच्चे घर से प्लेट लाकर खाते भोजन, अब लाना होगा गिलास।
- बच्चों की उपस्थिति के अनुरूप हर रोज मात्रा तय करने का संकट।
- ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल कैसे करेंगे दूध का संरक्षण।
शासन का रुख सख्त
शासन का रुख काफी सख्त है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण निदेशक श्रद्धा मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर हाल में दूध का वितरण होना है। अधिकारी अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के खर्च का समायोजन करके खुद रास्ता निकालें। 22 जुलाई को लेखपाल व राजस्व अधिकारी सभी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। 5 अगस्त को मुख्यमंत्री भी कुछ स्कूलों का निरीक्षण कर सकते हैं।
समस्या गंभीर है लेकिन शासनादेश का अनुपालन कराया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को दूध का प्रबंध करना है, शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति के लिए कुछ न कुछ निर्णय हो जाएगा। तैयारी चल रही है।
- बाल मुकुंद, बीएसए
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प्रदेश सरकार ने सप्ताह में बुधवार के दिन परिषदीय स्कूलों के बच्चों को दूध बांटने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशानुसार आज से बच्चों को दूध दिया जाना है लेकिन अभी तक तय बजट के अंतर्गत दूध की आपूर्ति का प्रबंध नहीं हो पाया है। इसे लेकर मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के हाथ पांव फूले हैं। अधिकारी भी परेशान हैं। अभी तक मध्याह्न भोजन में बच्चों को दलिया, चावल, खीर व रोटी सब्जी जो परोसा जा रहा है, उसका खर्च तय है। सप्ताह में एक दिन बुधवार को बच्चों को दूध व कोफ्ता चावल दिया जाना है। तय खर्च में 200 मिली ग्राम दूध देना लगभग 40 फीसदी तक महंगा पडे़गा। संकट है कि इस अतिरिक्त खर्च को कैसे और कहां से समायोजित किया जाए। दूसरा संकट शुद्ध दूध की उपलब्धता का है। नगरीय क्षेत्र में गांव से आने वाले डिब्बे वाले दूध पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां दूध की उपलब्धता है, वहां से शहरों में सप्लाई की जा रही है। गांवों में दूध से खोया भी बनाया जा रहा है।
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जिले की तस्वीर
नगरीय क्षेत्र में बच्चे : 67,000 हजार
ग्रामीण क्षेत्र में बच्चे : 1,12,000 लाख
कुल बच्चे : 1,86,000 लाख
प्रति बच्चा दूध : 200 मिली.
प्रतिमाह प्रति दूध : 800 मिली.
माह में कुल दूध चाहिए : 1,48000 ली.
उपस्थिति कम रहे तो खर्च : 1 लाख ली. लगभग
दूध का आर्थिक ग्राफ
200 मिली का मूल्य: 7.50 रुपये
प्रति छात्र कनवर्जन चार्ज प्राथमिक में : 3.59 रुपये
जूनियर में : 5.38 रुपये
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प्राथमिक में घाटा : 3.91 रुपये
जूनियर में घाटा : 2.11 रुपये
विशेष: चूंकि दूध के साथ बच्चों को चावल व कोफ्ता भी दिया जाना है इसलिए प्रति छात्र स्वीकृत खाद्यान्न की कीमत का समायोजन इसमें नहीं हो सकता है।
और भी हैं बाधाएं
- इतनी मात्रा में शुद्ध दूध की आपूर्ति कहां से ली जाए।
- नगर में पराग डेयरी से चल रही बात अभी फाइनल नहीं।
- स्कूलों में पहुंचाने तक कैसे रखा जाए दूध गरम।
- बच्चे घर से प्लेट लाकर खाते भोजन, अब लाना होगा गिलास।
- बच्चों की उपस्थिति के अनुरूप हर रोज मात्रा तय करने का संकट।
- ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल कैसे करेंगे दूध का संरक्षण।
शासन का रुख सख्त
शासन का रुख काफी सख्त है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण निदेशक श्रद्धा मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर हाल में दूध का वितरण होना है। अधिकारी अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के खर्च का समायोजन करके खुद रास्ता निकालें। 22 जुलाई को लेखपाल व राजस्व अधिकारी सभी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। 5 अगस्त को मुख्यमंत्री भी कुछ स्कूलों का निरीक्षण कर सकते हैं।
समस्या गंभीर है लेकिन शासनादेश का अनुपालन कराया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को दूध का प्रबंध करना है, शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति के लिए कुछ न कुछ निर्णय हो जाएगा। तैयारी चल रही है।
- बाल मुकुंद, बीएसए