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गुरु से मिलती है मन को परम शांति: प्रभुदयाल
Amar Ujala
Updated Thu, 25 Aug 2016 11:46 PM IST
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गुरु से मिलती है मन को परम शांति: प्रभुदयाल
- फोटो : Amar Ujala
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ठाकुर बीरी सिंह इंटर कालेज में त्रिदिवसीय रामाश्रम आंतरिक सत्संग
गुरु के समक्ष पहुंचने मात्र से ही मन की अशांति दूर हो जाती है और मन को परम शांति मिलती है। यह बातें ठाकुर बीरी सिंह कालेज परिसर में चल रहे त्रिदिवसीय आंतरिक सत्संग समारोह के दौरान गृहस्थ संत प्रभुदयाल शर्मा ने कहीं।
उन्होंने परम भागवत पं. मिहीलाल शर्मा का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि जब उनके गुरु डा. चतुर्भुज सहाय उनके गृह गांव चुल्हावली आते थे, सर्वत्र प्रसन्नता व्याप्त हो जाती थी। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने जिस प्रकार अधर्म का सफाया किया, ठीक उसी प्रकार गुरु महाराज ने अपनी साधना के मार्ग से अनेक हृदयों की कालिमा को को स्वच्छ करके उनकी बुराइयों को दूर किया। गुरु महाराज ने कहा कि श्रेष्ठ पुरुषों की संगत करने से हमारा व्यवहार बदल जाता है। प्रसादार्पण सत्र में भिलाई के रुद्रप्रताप मिश्र ने कहा कि ईश्वर तो निराकार होता है, लेकिन गुरु के रूप में साकार रूप धारण कर पृथ्वी पर अवतरित होता है। इसी साकार रूप पर यदि हम विश्वास करने लगे तो अंत में एक भरोसा हो जाता है कि गुरु हमारी रक्षा करेंगे और हम निर्भय हो जाते हैं। तुलसीदास अपनी कुटिया पर रात में भी दरवाजा बंद नहीं करते थे। एक रात चोर उनकी कुटिया में चोरी करने आया तो देखा कि साक्षात भगवान राम और लक्ष्मण उनकी कुटिया की पहरेदारी कर रहे हैं। यह उनके भरोसे का ही प्रतिफल था।
सत्संग में हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
रामाश्रम आध्यात्मिक सत्संग में आए साधकों का शिविर लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर में डा. शकुंतला यादव, डा. मुकेश बंसल, डा. मनमोहन, डा. तिलकराज ढींगरा, डा. रोहित, डा. रवि सक्सेना, डा. वेद, डा. प्रीती और डा. दीप्ती की टीम ने साधकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
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गुरु के समक्ष पहुंचने मात्र से ही मन की अशांति दूर हो जाती है और मन को परम शांति मिलती है। यह बातें ठाकुर बीरी सिंह कालेज परिसर में चल रहे त्रिदिवसीय आंतरिक सत्संग समारोह के दौरान गृहस्थ संत प्रभुदयाल शर्मा ने कहीं।
उन्होंने परम भागवत पं. मिहीलाल शर्मा का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि जब उनके गुरु डा. चतुर्भुज सहाय उनके गृह गांव चुल्हावली आते थे, सर्वत्र प्रसन्नता व्याप्त हो जाती थी। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने जिस प्रकार अधर्म का सफाया किया, ठीक उसी प्रकार गुरु महाराज ने अपनी साधना के मार्ग से अनेक हृदयों की कालिमा को को स्वच्छ करके उनकी बुराइयों को दूर किया। गुरु महाराज ने कहा कि श्रेष्ठ पुरुषों की संगत करने से हमारा व्यवहार बदल जाता है। प्रसादार्पण सत्र में भिलाई के रुद्रप्रताप मिश्र ने कहा कि ईश्वर तो निराकार होता है, लेकिन गुरु के रूप में साकार रूप धारण कर पृथ्वी पर अवतरित होता है। इसी साकार रूप पर यदि हम विश्वास करने लगे तो अंत में एक भरोसा हो जाता है कि गुरु हमारी रक्षा करेंगे और हम निर्भय हो जाते हैं। तुलसीदास अपनी कुटिया पर रात में भी दरवाजा बंद नहीं करते थे। एक रात चोर उनकी कुटिया में चोरी करने आया तो देखा कि साक्षात भगवान राम और लक्ष्मण उनकी कुटिया की पहरेदारी कर रहे हैं। यह उनके भरोसे का ही प्रतिफल था।
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सत्संग में हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
रामाश्रम आध्यात्मिक सत्संग में आए साधकों का शिविर लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। शिविर में डा. शकुंतला यादव, डा. मुकेश बंसल, डा. मनमोहन, डा. तिलकराज ढींगरा, डा. रोहित, डा. रवि सक्सेना, डा. वेद, डा. प्रीती और डा. दीप्ती की टीम ने साधकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया।
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