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शिक्षकों का आदर्श प्रयास, परिषदीय स्कूल बने आदर्श

Sat, 17 Sep 2016 11:56 PM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Sat, 17 Sep 2016 11:56 PM IST
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Great efforts of teachers, council schools became ideal
शिक्षकों का आदर्श प्रयास, परिषदीय स्कूल बने आदर्श - फोटो : Amar Ujala
मेंटीनेंस के लिए बराबर धनराशि आवंटित होने के बाद भी कुछ विद्यालय हैं उम्मीद से आगे
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परिषदीय स्कूल सिर्फ अव्यवस्थाओं एवं घोटालों के नाम से पहचान बनाते हैं। इसी परिवेश में जिले के कुछ परिषदीय स्कूल शिक्षकों के प्रयासों से एक मिशाल बन गए हैं। सुविधाओं के नाम में प्रत्येक स्कूल में बराबर धनराशि आवंटित होती है। बेशक  स्कूल परिषदीय है, मगर कुछ शिक्षकों की कड़ी मेहनत और लगन से अन्य स्कूलों की तुलना में इन स्कूलों की अलग पहचान बना दी है। यहां के  रखरखाव, सुविधाओं एवं खेलकूद की व्यवस्थाओं से इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी खुद पर गर्व करते हैं।

स्कूल एक: सोलर सिस्टम से चलते हैं पंखे-लाइट
अरांव ब्लाक का प्राथमिक विद्यालय कीठौत। प्रधानाध्यापक मोहम्मद शाहिद ने पांच साल में परिषदीय स्कूल को जिले में मिशाल बना दिया। यहां प्रत्येक क्लास रूम में टेक्सचर पेंट कराया है। फ्लैक्स पेंटिंग से स्कूल सजा-संवरा लगता है। गर्मी से बच्चों को जूझना न पडे़, इसलिए उन्होंने सोलर सिस्टम लगवाया है। जिससे पंखा और बिजली की सुविधा हर समय रहती है। 110 गमले लगाकर उन्होंने हरियाली का संदेश दिया है। बच्चों के खेलने के लिए बेहतर इंतजाम मोहम्मद शाहिद के प्रयास की देन है। बच्चों के बैठने के लिए फर्श की जगह कालीन बिछवाया है। शिक्षक शाहिद बच्चों को नि:शुल्क स्कूल बेल्ट, टाई, आई कार्ड बांटते देते हैं।
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स्कूल नंबर दो
नगर क्षेत्र का जूनियर विद्यालय कटरा पठानान। लेबर कालोनी में संचालित इस विद्यालय की दशा शिक्षिका कल्पना राजौरिया ने स्वयं के प्रयास से सुधारी है। शौचालय की सुविधा न होने पर छात्राएं जूनियर में आकर विद्यालय छोड़ देती थीं। उन्होंने छात्र-छात्राओं के अलग-अलग शौचालय स्वयं के प्रयास से बिना सरकारी खर्चे के बनवाए जिसमें टाइल्स भी लगवाए। ब्लैकबोर्ड की जगह व्हाइटबोर्ड लगवाकर बच्चों का रुझान इन स्कूल की ओर बढ़ाया। बिना सरकारी धन लिए स्कूल में बेंच मुहैया कराईं। वह बच्चों को स्वयं बैग, कापी, रबर, पेसिंल, बोतल, लंच बाक्स वितरित करती हैं। छात्राओं को ड्रेस में कोटी अलग से प्रदान की। उन्हीं के प्रयास से विद्यालय में पेयजल की टंकी लगी है।
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विद्यालय नंबर तीन
जूनियर विद्यालय कुतबपुर चनौरा। यहां शिक्षक कृपाशंकर मिश्रा ने विद्यालय को आकर्षक बना दिया है। यहां बच्चों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए उन्होंने सबमर्सिबल लगवाया। यहां का प्राकृतिक वातावरण अन्य परिषदीय स्कूलों के लिए मिशाल है। बडे़-बडे़ पार्क जैसे नजारे यहां देखने को मिलते हैं। हब स्टाइल में घास की कटिंग नियमित कराते हैं। वही, देखने में भी स्कूल एक मिशाल लगता है।


विभाग नहीं करता इनकी मदद
बेसिक शिक्षा विभाग में आदर्श शिक्षकों के नाम मांगे जाते हैं। समय-समय पर पुरस्कृत किया जाता है। विभाग कई योजनाओं में ऐसे विद्यालयों को चयनित करता है, जो शिक्षाधिकारियों के चहेतों के हों।

फैक्ट फाइल
1675 प्राइमरी स्कूल हैं जिले में  (कक्षा एक से पांच तक)
627 जूनियर स्कूल हैं (कक्षा छह से आठ तक)
5000 शिक्षक हैं परिषदीय स्कूलों में
05 हजार प्राइमरी में और जूनियर में सात हजार सालाना रुपये मिलते हैं रखरखाव के लिए
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