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Firozabad News: सोने की चेन बनी दंपती की मौत का कारण, आए दिन होता था विवाद
Mon, 26 Jun 2023 10:35 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 26 Jun 2023 10:35 PM IST
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शिकोहाबाद। दंपती की मौत का कारण शादी में मिली सोने की चेन बनी, जिसको लेकर आए दिन विवाद होता था। रविवार सुबह दोनों में झगड़ा और मारपीट हुई, जिसे परिजन ने शांत करा दिया। लेकिन शाम को दोबारा झगड़ा हुआ। छोटे भाई ने फिर दोनों को शांत करा दिया। इसने बाद दोनों लोग कमरे में चले गए। मृतक के छोटे भाई गोविंद ने बताया कि मध्य रात डेढ़ बजे अचानक फायर की आवाज हुई तो वह कमरे में पहुंचे और देखावहां भाई का शव खून से लथपथ पड़ा था।
प्रभारी निरीक्षक हरवेंद्र मिश्रा ने बताया कि दीपक को शादी में एक सोने की चेन मिली थी। जिसे शशि यादव ने अपने भाई को दे दी थी। जब इसकी जानकारी दीपक को हुई तो उसने पत्नी से चेन मायके से मंगाने के लिए दवाब डाला। बताया जाता है कि वह चेन लेने के लिए अपनी ससुराल मई में कल्होर गया था। वहां ससुरालीजन से भी चेन वापस करने के लिए कहा। बताया जाता है कि इसके बाद ससुरालीजन ने अपनी भैंस बेंचकर 25 हजार रुपये शशि को भेज दिए और कहा कि शेष पैसे कुछ दिन बाद दे देंगे। दीपक पत्नी पर चेन दिलाने का दवाब डाल रहा था। इसी बात से आक्रोशित होकर दीपक ने पहले पत्नी की पिटाई की। किसी को इसकी जानकारी न हो इसलिए उसने कूलर की आवाज में पत्नी का मुंह दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जब उसने देखा कि शशि की मौत हो गई तो वहां से उठा और बाहर के कमरे में आकर उसने तमंचा से अपनी कनपटी में लेटे हुए गोली मार ली।
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मोबाइल पर बात करने को लेकर भी दोनों में होती थी बहस
मृतक दीपक के भाई गोविंद ने बताया कि मुख्य वजह चेन तो थी, लेकिन इसके साथ ही मोबाइल पर भाभी द्वारा बात करना भाई को अच्छा नहीं लगता था। जब भी भाभी बात करतीं थी तो भाई उन पर संदेह करते थे। जिससे भी दोनों के बीच आए दिन खटपट होती रहती थी। उसने बताया कि कई बार मोबाइल को लेकर भाई और भाभी में झगड़ा भी हुआ था। लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि भाई इतना बड़ा कदम उठा लेगा। गोविंद ने बताया कि भाई सर्विस के लिए तैयारी कर रहा था। शादी के आठ साल बीतने के बाद भी कोई रोजगार न मिलने से भाई परेशान थे और उनकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। गोविंद ने बताया कि वह तीन भाई हैं। दीपक सबसे बड़े थे। तीनों भाइयों में से किसी की भी नौकरी नहीं लगी है। पूरा परिवार पिता के ऊपर ही आश्रित है। जिसको लेकर भी भाई काफी परेशान रहते थे।
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कृष्णा के सिर से उठा माता-पिता का साया
दीपक पर छह साल का एक बेटा है। उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाने से पहले एक बार भी नहीं सोचा कि आखिर उनके जाने के बाद बच्चे की देखभाल कौन करेगा। अगर दोनों इस तरफ सोचते तो शायद इतना बड़ा कदम नहीं उठाते। माता-पिता की मौत के बाद कृष्णा का भी रो-रो कर बुरा हाल था।
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प्रभारी निरीक्षक हरवेंद्र मिश्रा ने बताया कि दीपक को शादी में एक सोने की चेन मिली थी। जिसे शशि यादव ने अपने भाई को दे दी थी। जब इसकी जानकारी दीपक को हुई तो उसने पत्नी से चेन मायके से मंगाने के लिए दवाब डाला। बताया जाता है कि वह चेन लेने के लिए अपनी ससुराल मई में कल्होर गया था। वहां ससुरालीजन से भी चेन वापस करने के लिए कहा। बताया जाता है कि इसके बाद ससुरालीजन ने अपनी भैंस बेंचकर 25 हजार रुपये शशि को भेज दिए और कहा कि शेष पैसे कुछ दिन बाद दे देंगे। दीपक पत्नी पर चेन दिलाने का दवाब डाल रहा था। इसी बात से आक्रोशित होकर दीपक ने पहले पत्नी की पिटाई की। किसी को इसकी जानकारी न हो इसलिए उसने कूलर की आवाज में पत्नी का मुंह दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जब उसने देखा कि शशि की मौत हो गई तो वहां से उठा और बाहर के कमरे में आकर उसने तमंचा से अपनी कनपटी में लेटे हुए गोली मार ली।
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मोबाइल पर बात करने को लेकर भी दोनों में होती थी बहस
मृतक दीपक के भाई गोविंद ने बताया कि मुख्य वजह चेन तो थी, लेकिन इसके साथ ही मोबाइल पर भाभी द्वारा बात करना भाई को अच्छा नहीं लगता था। जब भी भाभी बात करतीं थी तो भाई उन पर संदेह करते थे। जिससे भी दोनों के बीच आए दिन खटपट होती रहती थी। उसने बताया कि कई बार मोबाइल को लेकर भाई और भाभी में झगड़ा भी हुआ था। लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि भाई इतना बड़ा कदम उठा लेगा। गोविंद ने बताया कि भाई सर्विस के लिए तैयारी कर रहा था। शादी के आठ साल बीतने के बाद भी कोई रोजगार न मिलने से भाई परेशान थे और उनकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। गोविंद ने बताया कि वह तीन भाई हैं। दीपक सबसे बड़े थे। तीनों भाइयों में से किसी की भी नौकरी नहीं लगी है। पूरा परिवार पिता के ऊपर ही आश्रित है। जिसको लेकर भी भाई काफी परेशान रहते थे।
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कृष्णा के सिर से उठा माता-पिता का साया
दीपक पर छह साल का एक बेटा है। उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाने से पहले एक बार भी नहीं सोचा कि आखिर उनके जाने के बाद बच्चे की देखभाल कौन करेगा। अगर दोनों इस तरफ सोचते तो शायद इतना बड़ा कदम नहीं उठाते। माता-पिता की मौत के बाद कृष्णा का भी रो-रो कर बुरा हाल था।