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दफ्तरों में बंद हुए कर्मचारी
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 02 Nov 2015 11:39 PM IST
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पुनर्मतगणना की मांग कर रहे जिला पंचायत वार्ड 13 के पराजित प्रत्याशी राजेंद्र सिंह और विश्नुप्रताप सिंह के समर्थकों के तेवर इतने उग्र थे कि कर्मचारी सहम गए। वे एडीएम न्यायालय कक्ष के दरवाजे बंदकर अंदर ही कैद हो गए। भीड़ ने चकबंदी कार्यालय खुला पाया तो उसी में घुसकर उत्पात करने लगी। महिलाएं मेजों पर चढ़ गईं और भारी हंगामा किया।
विश्नुप्रताप सिंह व राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंची आक्रोशित भीड़ सीधे डीएम कार्यालय के बाहर आरओ कक्ष तक पहुंच गई। ये लोग मतगणना में गड़बड़ी की आशंका जता रहे थे। इस वार्ड से ओमवती ने 3595 मत पाकर राजेंद्र सिंह को 20 मतों से पराजित किया है। राजेंद्र सिंह 3575 और तीसरे स्थान पर रहे विश्नु प्रताप को 3538 मत मिले। उपद्रव की सूचना पर सबसे पहले डीएम विजय किरन आनंद कलक्ट्रेट आए। इधर एडीएम न्यायालय कक्ष के दरवाजे कर्मचारियों ने अंदर से बंद कर लिए तो भीड़ बंदोबस्त अधिकारी, चकबंदी के कार्यालय में घुस गई। यहां महिलाएं मेजों पर चढ़ गई। डीएम के समझाने का भी उनपर असर नहीं हो रहा था। इसी बीच नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह, सीओ सदर जगदीश सिंह, सीओ सिटी राजेश चौधरी कई थानों के फोर्स के साथ आए तो भीड़ को बाहर निकाला जा सका।
भीड़ के निकलते ही पुलिस ने विश्नू प्रताप को हिरासत में ले लिया। प्रत्याशी को पकड़े जाने की खबर पाकर समर्थकों ने हाईवे पर ट्रैक्टरों को आड़ा-तिरछा खड़ा करके जाम लगा दिया। नारेबाजी होने लगी। अब मांग विश्नू रिहाई थी। महिलाओं का कहना था कि ‘हमारे बेटे को छोड़ दो हम चले जाएंगे। बेइमानी हमारे साथ और गिरफ्तारी भी हमारे ही बेटे की, यह ठीक नहीं है।’ तभी कुछ युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। इससे हाईवे पर भगदड़ मच गई। पुलिस ने पथराव कर रहे लोगों को लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया। यही नहीं, तीन ट्रैक्टरों के साथ भैंसाखर के अर्जुन सिंह, सौरभ, निकाऊ के ज्ञान सिंह व वीरेंद्र तथा दीपक को भी हिरासत में ले लिया। सीओ ने बताया कि विश्नू और उनके ये समर्थक हंगामा, पथराव के आरोप में जेल भेजे जाएंगे।
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बवाल के बाद टूटी अफसरों की नींद
जिले के सभी नौ ब्लाकों में मतगणना पूरी रात चली थी। वहां डटे रहे अधिकांश अधिकारी घरों पर थकान उतार रहे थे। पुलिस के जवान भी नदारद थे। मुख्यालय पर जैसे ही हंगामे का मेसेज प्रसारित हुआ तो अफसरों के साथ ही थानेदारों की नींद उड़ गई। इसके बाद कई अधिकारी फोर्स के साथ मुख्यालय की ओर दौड़ पड़े।
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विश्नुप्रताप सिंह व राजेंद्र सिंह के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंची आक्रोशित भीड़ सीधे डीएम कार्यालय के बाहर आरओ कक्ष तक पहुंच गई। ये लोग मतगणना में गड़बड़ी की आशंका जता रहे थे। इस वार्ड से ओमवती ने 3595 मत पाकर राजेंद्र सिंह को 20 मतों से पराजित किया है। राजेंद्र सिंह 3575 और तीसरे स्थान पर रहे विश्नु प्रताप को 3538 मत मिले। उपद्रव की सूचना पर सबसे पहले डीएम विजय किरन आनंद कलक्ट्रेट आए। इधर एडीएम न्यायालय कक्ष के दरवाजे कर्मचारियों ने अंदर से बंद कर लिए तो भीड़ बंदोबस्त अधिकारी, चकबंदी के कार्यालय में घुस गई। यहां महिलाएं मेजों पर चढ़ गई। डीएम के समझाने का भी उनपर असर नहीं हो रहा था। इसी बीच नगर मजिस्ट्रेट रवींद्र सिंह, सीओ सदर जगदीश सिंह, सीओ सिटी राजेश चौधरी कई थानों के फोर्स के साथ आए तो भीड़ को बाहर निकाला जा सका।
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भीड़ के निकलते ही पुलिस ने विश्नू प्रताप को हिरासत में ले लिया। प्रत्याशी को पकड़े जाने की खबर पाकर समर्थकों ने हाईवे पर ट्रैक्टरों को आड़ा-तिरछा खड़ा करके जाम लगा दिया। नारेबाजी होने लगी। अब मांग विश्नू रिहाई थी। महिलाओं का कहना था कि ‘हमारे बेटे को छोड़ दो हम चले जाएंगे। बेइमानी हमारे साथ और गिरफ्तारी भी हमारे ही बेटे की, यह ठीक नहीं है।’ तभी कुछ युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। इससे हाईवे पर भगदड़ मच गई। पुलिस ने पथराव कर रहे लोगों को लाठियां फटकार कर खदेड़ दिया। यही नहीं, तीन ट्रैक्टरों के साथ भैंसाखर के अर्जुन सिंह, सौरभ, निकाऊ के ज्ञान सिंह व वीरेंद्र तथा दीपक को भी हिरासत में ले लिया। सीओ ने बताया कि विश्नू और उनके ये समर्थक हंगामा, पथराव के आरोप में जेल भेजे जाएंगे।
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बवाल के बाद टूटी अफसरों की नींद
जिले के सभी नौ ब्लाकों में मतगणना पूरी रात चली थी। वहां डटे रहे अधिकांश अधिकारी घरों पर थकान उतार रहे थे। पुलिस के जवान भी नदारद थे। मुख्यालय पर जैसे ही हंगामे का मेसेज प्रसारित हुआ तो अफसरों के साथ ही थानेदारों की नींद उड़ गई। इसके बाद कई अधिकारी फोर्स के साथ मुख्यालय की ओर दौड़ पड़े।