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बेटी-बेटे को देनी चाहिए संस्कारयुक्त शिक्षा
Amar Ujala
Updated Mon, 22 Aug 2016 12:29 AM IST
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बेटी-बेटे को देनी चाहिए संस्कारयुक्त शिक्षा
- फोटो : Amar Ujala
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‘बहन बचाओ अभियान’ विचार गोष्ठी का आयोजन
बेटी-बेटे को संस्कारयुक्त शिक्षा देनी चाहिए
शब्दम संस्था द्वारा बेटों और बेटियों के बीच बढ़ते अंतर एवं वर्तमान परिदृश्य में बेटियों के साथ होने वाले भेदभाव व अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाते हुए ‘बहन बचाओ अभियान’ विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें संस्था ने ‘बहन सशक्त कैसे हो’ पर व्यापक चर्चा की। चर्चा का प्रारम्भ संस्था अध्यक्ष किरण बजाज के संदेश से हुआ जिसमें उन्होंने कहा भारत के संविधान में जब लड़की को परिवार से लड़कों से बराबरी के हिस्से का प्रावधान है तब भी 90 फीसदी लड़कियों को उनके अधिकार क्यों नहीं मिलते? बदलाव उसके पिता एवं परिवार से ही शुरू होना चाहिए। जब मां-बाप अपनी बेटी का यथाशक्ति मान आदर करके और अवसर देंगे, तो वह जरूर आगे बढ़ेगी।
संगोष्ठी में डीआर इण्टर कालेज की शिक्षिका मोहनी यादव व तनु ने कहा कि जिस घर में नारी की पूजा होती है उसी घर में भगवान निवास करते हैं। योग शिक्षक डा. पीएस राना ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता योग शिक्षा की है।
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पुरातन सरस्वती विद्या मंदिर के शिक्षक सुनील शर्मा ने कहा कि अगर पुरुष वर्ग अपनी मानसिकता में बदलाव कर ले तो ‘बहन बचाओ’ जैसे अभियान की आवश्यकता नहीं होगी। ब्राइट स्कालर्स एकेडमी के प्रबंधक प्रवेश यादव ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय एवं परिवार को बचपन से ही बेटी-बेटे को संस्कारयुक्त शिक्षा देनी चाहिए। मुकेश मणिकांचन, विनोद कुमार, ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल की शिक्षिका रेखा, यंग स्कालर्स एकेडमी के कृपाशंकर शर्मा ‘शूूल’ ने भी विचार रखे। संस्था के वरिष्ठ सलाहकार अरविन्द तिवारी ने विद्यालयों से निवेदन किया कि वे अपने विद्यालयों में समितियां बनाएं। जिन चौराहों या नुक्कड़ों पर छात्राओं के साथ छींटाकशी की जाती है उनके नाम लिखकर प्रशासन को दें। कार्यक्रम अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सलाहकार शब्दम मंजन-उल वासै ने कहा कि आज सोच बदलने की आवश्यकता है। हमें अपनी बच्चियों पर विश्वास करना होगा। बच्चियों को शिक्षा में समान अवसर देना होगा। कार्यक्रम का संचालन दीपक औहरी ने किया।
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बेटी-बेटे को संस्कारयुक्त शिक्षा देनी चाहिए
शब्दम संस्था द्वारा बेटों और बेटियों के बीच बढ़ते अंतर एवं वर्तमान परिदृश्य में बेटियों के साथ होने वाले भेदभाव व अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाते हुए ‘बहन बचाओ अभियान’ विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
जिसमें संस्था ने ‘बहन सशक्त कैसे हो’ पर व्यापक चर्चा की। चर्चा का प्रारम्भ संस्था अध्यक्ष किरण बजाज के संदेश से हुआ जिसमें उन्होंने कहा भारत के संविधान में जब लड़की को परिवार से लड़कों से बराबरी के हिस्से का प्रावधान है तब भी 90 फीसदी लड़कियों को उनके अधिकार क्यों नहीं मिलते? बदलाव उसके पिता एवं परिवार से ही शुरू होना चाहिए। जब मां-बाप अपनी बेटी का यथाशक्ति मान आदर करके और अवसर देंगे, तो वह जरूर आगे बढ़ेगी।
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संगोष्ठी में डीआर इण्टर कालेज की शिक्षिका मोहनी यादव व तनु ने कहा कि जिस घर में नारी की पूजा होती है उसी घर में भगवान निवास करते हैं। योग शिक्षक डा. पीएस राना ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता योग शिक्षा की है।
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पुरातन सरस्वती विद्या मंदिर के शिक्षक सुनील शर्मा ने कहा कि अगर पुरुष वर्ग अपनी मानसिकता में बदलाव कर ले तो ‘बहन बचाओ’ जैसे अभियान की आवश्यकता नहीं होगी। ब्राइट स्कालर्स एकेडमी के प्रबंधक प्रवेश यादव ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय एवं परिवार को बचपन से ही बेटी-बेटे को संस्कारयुक्त शिक्षा देनी चाहिए। मुकेश मणिकांचन, विनोद कुमार, ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल की शिक्षिका रेखा, यंग स्कालर्स एकेडमी के कृपाशंकर शर्मा ‘शूूल’ ने भी विचार रखे। संस्था के वरिष्ठ सलाहकार अरविन्द तिवारी ने विद्यालयों से निवेदन किया कि वे अपने विद्यालयों में समितियां बनाएं। जिन चौराहों या नुक्कड़ों पर छात्राओं के साथ छींटाकशी की जाती है उनके नाम लिखकर प्रशासन को दें। कार्यक्रम अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सलाहकार शब्दम मंजन-उल वासै ने कहा कि आज सोच बदलने की आवश्यकता है। हमें अपनी बच्चियों पर विश्वास करना होगा। बच्चियों को शिक्षा में समान अवसर देना होगा। कार्यक्रम का संचालन दीपक औहरी ने किया।