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UP: 21 साल से फरार, प्रमोद से बना परवेज, 50 हजारी का इनामी बदमाश मुठभेड़ में गिरफ्तार; दर्ज हैं 17 मुकदमे
Thu, 12 Feb 2026 11:15 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: अरुन पाराशर
Updated Thu, 12 Feb 2026 11:15 PM IST
सार
21 साल से फरार आरोपी को पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार किया। बदमाश के पैर में गोली लगी है। बदमाश पर 17 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस की ओर से 50 हजार का इनाम घोषित था।
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पुलिस ने मुठभेड़ में पकड़ा बदमाश।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
फिरोजाबाद के थाना उत्तर पुलिस और एसओजी टीम ने बृहस्पतिवार रात 21 साल से फरार 50 हजार के इनामी अपराधी परवेज निवासी रामगढ़ को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। फिरोजाबाद और अलीगढ़ में उस पर 17 मुकदमे दर्ज हैं। वह अलीगढ़ में पहचान छिपाकर ई-रिक्शा चला रहा था। आरोपी से पुलिस ने एक तमंचा, चार कारतूस, दो खोखे, एक बिना नंबर की बाइक और 900 रुपये बरामद किए हैं।
एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि अपराधी परवेज थाना उत्तर क्षेत्र के बैंदी की पुलिया के पास छिपा हुआ है। सूचना पर एसओजी और थाना उत्तर पुलिस ने दबिश दी तो बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की तो परवेज के बाएं पैर में गोली लगी और उसे दबोच लिया गया। आरोपी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। आरोपी को गिरफ्तार करने वालों में थाना उत्तर प्रभारी अंजीश कुमार, एसओजी प्रभारी प्रेम शंकर पांडेय और उनकी टीमें शामिल रहीं। परवेज के खिलाफ फिरोजाबाद के रामगढ़ और उत्तर थानों के अलावा अलीगढ़ के क्वार्सी और देहली गेट थानों में हत्या के प्रयास, डकैती, गैंगेस्टर एक्ट, एनडीपीएस और चोरी जैसे 17 संगीन मामले दर्ज हैं।
न्यू आंबेडकर नगर में वर्ष 2005 में की थी हत्या
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 3 जून 2005 की रात परवेज अपने साथियों रहीश, इसरार, नदीम उर्फ गट्टू और सलीम के साथ थाना उत्तर के न्यू आंबेडकर नगर निवासी रामसहाय के घर में चोरी की नियत से घुसा था। आहट होने पर जब रामसहाय जाग गए और उन्होंने विरोध किया, तो परवेज ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस वारदात में इसके चार अन्य साथी गिरफ्तार हुए थे। परवेज अलीगढ़ में जाकर छिप गया था।
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एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि अपराधी परवेज थाना उत्तर क्षेत्र के बैंदी की पुलिया के पास छिपा हुआ है। सूचना पर एसओजी और थाना उत्तर पुलिस ने दबिश दी तो बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की तो परवेज के बाएं पैर में गोली लगी और उसे दबोच लिया गया। आरोपी को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। आरोपी को गिरफ्तार करने वालों में थाना उत्तर प्रभारी अंजीश कुमार, एसओजी प्रभारी प्रेम शंकर पांडेय और उनकी टीमें शामिल रहीं। परवेज के खिलाफ फिरोजाबाद के रामगढ़ और उत्तर थानों के अलावा अलीगढ़ के क्वार्सी और देहली गेट थानों में हत्या के प्रयास, डकैती, गैंगेस्टर एक्ट, एनडीपीएस और चोरी जैसे 17 संगीन मामले दर्ज हैं।
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न्यू आंबेडकर नगर में वर्ष 2005 में की थी हत्या
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 3 जून 2005 की रात परवेज अपने साथियों रहीश, इसरार, नदीम उर्फ गट्टू और सलीम के साथ थाना उत्तर के न्यू आंबेडकर नगर निवासी रामसहाय के घर में चोरी की नियत से घुसा था। आहट होने पर जब रामसहाय जाग गए और उन्होंने विरोध किया, तो परवेज ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस वारदात में इसके चार अन्य साथी गिरफ्तार हुए थे। परवेज अलीगढ़ में जाकर छिप गया था।
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कोर्ट से जारी था गैर जमानती वारंट
परवेज बेहद शातिर और कुख्यात अपराधी है। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराध के रिकॉर्ड में अपने पिता का नाम चार बार बदला। वह वर्तमान में अलीगढ़ के थाना क्वार्सी क्षेत्र में एकता नगर महेशपुर नई आबादी, क्वार्सी, अलीगढ़ में रह रहा था। वहां पहचान छिपाकर ई-रिक्शा चलाता था। 18 मई 2006 से वह कोर्ट से स्थायी रूप से गैरहाजिर चल रहा था, जिसके बाद आगरा रेंज के डीआईजी स्तर से उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
पिता हिंदू, मां मुसलमान... प्रमोद से इस तरह बना परवेज
एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि पुलिस पहले परवेज के दोस्तों तक पहुंची। वहां से अलीगढ़ निवासी उसकी बहन का पता चला। पता चला सौतेली बहन बबीना पुलिस की मुखबिर है। बबीना के जरिए पुलिस परवेज तक पहुंची तो पता लगा उसकी पिता हिंदू और मां मुस्लिम थी। मां ने दूसरी शादी की थी। जन्म के समय परवेज का नाम प्रमोद यादव था, जो कि इसके हाथ पर भी लिखा है। बाद में मां ने पति और बेटे दोनों का नाम बदल दिया। प्रमोद की जगह असलम नाम रखा। बाद में परवेज ने खुद अपना नाम बदल डाला। कभी आधार कार्ड या अन्य कोई पहचान संबंधी सरकारी दस्तावेज नहीं बनवाया। अलीगढ़ में जब भी गिरफ्तारी होती तो पार्षद से सत्यापित परवेज नाम का दस्तावेज जमानत के लिए कोर्ट में दाखिल करता था। इसके चलते उसे पकड़ना मुश्किल हो रहा था। पुलिस जब बबीना तक पहुंची तो उसे भनक लग गई और वह फिरोजाबाद में आकर छिप गया। मुखबिरों की सक्रियता से पुलिस को उसकी लोकेशन मिली और मुठभेड़ में गिरफ्तार के बाद गिरफ्तारी हुई।
परवेज बेहद शातिर और कुख्यात अपराधी है। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराध के रिकॉर्ड में अपने पिता का नाम चार बार बदला। वह वर्तमान में अलीगढ़ के थाना क्वार्सी क्षेत्र में एकता नगर महेशपुर नई आबादी, क्वार्सी, अलीगढ़ में रह रहा था। वहां पहचान छिपाकर ई-रिक्शा चलाता था। 18 मई 2006 से वह कोर्ट से स्थायी रूप से गैरहाजिर चल रहा था, जिसके बाद आगरा रेंज के डीआईजी स्तर से उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
पिता हिंदू, मां मुसलमान... प्रमोद से इस तरह बना परवेज
एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि पुलिस पहले परवेज के दोस्तों तक पहुंची। वहां से अलीगढ़ निवासी उसकी बहन का पता चला। पता चला सौतेली बहन बबीना पुलिस की मुखबिर है। बबीना के जरिए पुलिस परवेज तक पहुंची तो पता लगा उसकी पिता हिंदू और मां मुस्लिम थी। मां ने दूसरी शादी की थी। जन्म के समय परवेज का नाम प्रमोद यादव था, जो कि इसके हाथ पर भी लिखा है। बाद में मां ने पति और बेटे दोनों का नाम बदल दिया। प्रमोद की जगह असलम नाम रखा। बाद में परवेज ने खुद अपना नाम बदल डाला। कभी आधार कार्ड या अन्य कोई पहचान संबंधी सरकारी दस्तावेज नहीं बनवाया। अलीगढ़ में जब भी गिरफ्तारी होती तो पार्षद से सत्यापित परवेज नाम का दस्तावेज जमानत के लिए कोर्ट में दाखिल करता था। इसके चलते उसे पकड़ना मुश्किल हो रहा था। पुलिस जब बबीना तक पहुंची तो उसे भनक लग गई और वह फिरोजाबाद में आकर छिप गया। मुखबिरों की सक्रियता से पुलिस को उसकी लोकेशन मिली और मुठभेड़ में गिरफ्तार के बाद गिरफ्तारी हुई।