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Firozabad News: प्रत्याशी नहीं उतारे जाने से कांग्रेसी मायूस
Mon, 01 Apr 2024 04:58 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 01 Apr 2024 04:58 AM IST
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फिरोजाबाद। कांग्रेस से प्रत्याशी नहीं उतारने के कारण कार्यकर्ताओं में मायूसी है। मुख्य पदाधिकारी गठबंधन के प्रत्याशी के साथ चुनाव के दौरान सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन अन्य कार्यकर्ताओं की सक्रियता कम दिखाई देती है। कई पुराने कांग्रेसी अभी से पार्टी प्रत्याशी वाले जिले में जाने की प्लानिंग करने लगे हैं।
कांग्रेस ने जिले में वर्ष 2009 के लोकसभा उपचुनाव के दौरान जीत दर्जकर इतिहास रचा था। इस जीत के बाद कांग्रेस के स्थानी नेताओं में काफी उत्साह देखने को मिला था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के स्थानीय नेता अतुल चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया था। अतुल इस चुनाव में 7447 मत प्राप्त कर सके थे। मतलब 2009 के लोकसभा उपचुनाव के सापेक्ष ठीक 39.06 प्रतिशत तक वोटर घट गए थे। इसके बाद पार्टी ने प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी के खिलाफ अमेठी एवं रायबरेली में कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था तो कांग्रेस ने फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था। मतलब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सपा प्रत्याशी के लिए ही काम करना पड़ा था।
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इस बार गठबंधन समाजवादी पार्टी से होने के कारण इस बार भी कांग्रेस कार्यकर्ता सपा के लिए वोट मांगने का काम करेंगे। कांग्रेस के जिला एवं शहर अध्यक्ष तो दूसरे दल के प्रत्याशी के लिए वोट मांगने के दौरान साथ जा सकते हैं। लेकिन आम कार्यकर्ता के लिए यह करना उतना आसान नहीं होगा। काफी पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह जहां से कांग्रेस प्रत्याशी होंगे वहां काम करेंगे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष संदीप तिवारी ने कहा कि गठबंधन का प्रत्याशी होने के कारण हम सभी उसी के लिए काम करेंगे। क्योंकि जहां हमारा प्रत्याशी है वहां पर समाजवादी पार्टी सहयोग कर रही है।
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कांग्रेस ने जिले में वर्ष 2009 के लोकसभा उपचुनाव के दौरान जीत दर्जकर इतिहास रचा था। इस जीत के बाद कांग्रेस के स्थानी नेताओं में काफी उत्साह देखने को मिला था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के स्थानीय नेता अतुल चतुर्वेदी को प्रत्याशी बनाया था। अतुल इस चुनाव में 7447 मत प्राप्त कर सके थे। मतलब 2009 के लोकसभा उपचुनाव के सापेक्ष ठीक 39.06 प्रतिशत तक वोटर घट गए थे। इसके बाद पार्टी ने प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा है।
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वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी के खिलाफ अमेठी एवं रायबरेली में कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था तो कांग्रेस ने फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था। मतलब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सपा प्रत्याशी के लिए ही काम करना पड़ा था।
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इस बार गठबंधन समाजवादी पार्टी से होने के कारण इस बार भी कांग्रेस कार्यकर्ता सपा के लिए वोट मांगने का काम करेंगे। कांग्रेस के जिला एवं शहर अध्यक्ष तो दूसरे दल के प्रत्याशी के लिए वोट मांगने के दौरान साथ जा सकते हैं। लेकिन आम कार्यकर्ता के लिए यह करना उतना आसान नहीं होगा। काफी पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि वह जहां से कांग्रेस प्रत्याशी होंगे वहां काम करेंगे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष संदीप तिवारी ने कहा कि गठबंधन का प्रत्याशी होने के कारण हम सभी उसी के लिए काम करेंगे। क्योंकि जहां हमारा प्रत्याशी है वहां पर समाजवादी पार्टी सहयोग कर रही है।