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चमकीं प्रतिभा तो कहीं आज भी अंधेरे में है बचपन

Fri, 13 Nov 2015 07:38 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Fri, 13 Nov 2015 07:38 PM IST
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Cmkin talent is so far still in the dark childhood
प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिवस शनिवार को बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। बच्चों को प्रोत्साहित करने को कई संस्थाएं आगे आकर कार्य कर रही हैं तो प्रतिभा के धनी बच्चे भी नगर का नाम रौशन करने में पीछे नहीं है। हालांकि सुहागनगरी में कारखानों में कार्य करने वाले बच्चों में शिक्षा के प्रति अलख जगाने के लिए जितने कार्य हो रहे हैं वह नाकाफी हैं। तमाम बच्चे आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। उन्हें नहीं पता कि बाल अधिकार क्या है। उनके लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करना चुनौती है।
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राष्ट्रीय स्तर पर चमकी सुहागनगरी बाल वैज्ञानिक सोच
वैज्ञानिक क्षेत्र में जिले के कदम निरंतर तरक्की ओर बढ़ रहे हैं। जिले के बाद मंडल स्तर, राज्य स्तरीय मंच पर धमक मचाने के बाद बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय मंच पर प्रतिभा को दिखाने के लिए तैयार हैं। राष्ट्रीय बाल कांग्रेस में छात्र प्रांजल अग्रवाल की टीम में आशीष यादव, आकांक्षा सक्सेना, इशांत जैन, वरुण कुमार की कड़ी मेहनत ने राज्य स्तरीय कंप्टीशन में पहला स्थान प्राप्त किया। शिक्षक शरद पोरवाल ने पूरा सहयोग किया। इन बाल वैज्ञानिकों की सोच इतनी पसंद आई कि नेशनल तक का सफर तय करने का रास्ता साफ कर दिया। यह बाल वैज्ञानिक अब मोहाली स्थित चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में 27 से 31 दिसंबर को होने वाले राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेंगे।
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राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में प्रतिभाग करेंगे उभय और गौरव
यूं तो फीरोजाबाद में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है बस उन्हें जगाने की। ब्रजराज सिंह कालेज के छात्र उभय शर्मा ने गणित में माडल बनाकर जवाहर लाल नेहरू बाल विज्ञान प्रदर्शनी में मंडल स्तर पर सफलता प्राप्त की। इतना ही नहीं शिक्षक की भूमिका निभा रहे उभय के पिता संजय शर्मा भी इस प्रदर्शनी में अपने पुत्र के साथ प्रतिभाग करेंगे। गौरव चौहान ने भी स्वास्थ्य पर मॉडल तैयार किया है। जो गाजियाबाद में 18 से 21 नवंबर तक के कंप्टीशन में प्रतिभाग करेंगे।
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बाल सुधार गृह में चारदीवारी में बचपन
फीरोजाबाद। प्रधानमंत्री चाचा नेहरू ने भले ही बच्चों को स्नेह दिया लेकिन बच्चों को आज भी अधिकार नहीं मिले हैं। सुहागनगर स्थित राजकीय बाल सुधार गृह में बच्चों का जीवन सुधरने की जगह चारदीवारी में ही उलझ गया है। पूरा दिन दो कमरों तक सीमित रह गया है।

1400 बच्चों का दिखा दिया स्कूलों में दाखिला
बालकों को अधिकार मिले या फिर नहीं, अफसरों को अपनी वाहवाही कराने से मतलब है। बेसिक शिक्षा विभाग ने सर्वे कराकर स्कूल न जाने वाले करीब 1400 बच्चों का कागजों में दाखिला करा दिया। लेकिन सर्वे की हकीकत सामने आई तो पोल खुल गई। इनमें से आधे बच्चे भी स्कूल नहीं जा रहे हैं।  

बाल श्रमिक रोकने का नहीं होता प्रयास
शासन द्वारा चाइल्ड लेबर एक्ट तो बना दिया लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई प्रयास नहीं किया जाता। आज भी बालश्रम समाप्त नहीं हुआ है और ना ही बाल श्रमिकों को बचपन लौटाने के लिए शासन द्वारा कोई रणनीति तैयार की है। कभी कभार कारखाने में छापामारी कर बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर छोड़ दिया जाता है। उनके पुनर्वास के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता है। 2010-11 में एसआरके कालेज समाजशास्त्र द्वारा कराए गए सर्वे में 4602 बाल श्रमिक बच्चे चयनित हुए। उनमें से 2500 बच्चे खतरनाक कामों से जुड़े पाए गए।


बचपन लौटाने को बढ़े यह सुविधाएं
- जिलेे में बालिका संरक्षण गृह की आवश्यकता है। जब कोई बालिका को मुसीबत से मुक्त कराया जाता है तो उसे संरक्षण के लिए संस्थाओं को दिक्कतें आती हैं। शिशु संरक्षण गृह की आवश्यकता भी है।
- बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर छोड़ दिया जाता है। उनका पुर्नवास कराया जाए।
- बाल श्रमिक स्कूलों को खोला जाए।
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