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Firozabad News: कागजों में सीसीएमएस सिस्टम, दिन में जल रहीं स्ट्रीट लाइटें
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फिरोजाबाद। ऊर्जा संरक्षण को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार की सख्त हिदायतों के बीच नगर निगम प्रशासन की बेरुखी साफ दिख रही है। शहर की सड़कों और गलियों में लगी हजारों स्ट्रीट लाइटें दिन के उजाले में भी जल रही हैं। दूसरी तरफ, इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए बनाई गई सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीसीएमएस) की कार्ययोजना को पास हुए 9 महीने बीत चुके हैं लेकिन यह फाइलों में कैद है।
सितंबर 2025 में नगर निगम ने करीब 4.78 करोड़ रुपये की लागत से शहर की प्रकाश व्यवस्था को आधुनिक बनाने की योजना को मंजूरी दी थी। निगम बोर्ड की बैठक में पास इस योजना को अमल में लाने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजतन पुरानी व्यवस्था जस की तस बनी हुई है और बिजली की बर्बादी लगातार जारी है।
बिना कंट्रोल सिस्टम रोज फूंकी जा रही हजारों यूनिट बिजली
नगर निगम क्षेत्र के 70 वार्डों की गलियों, मुख्य बाजारों और हाईवे पर लगभग 23 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं। एकीकृत कंट्रोल सिस्टम न होने के कारण न तो इन्हें समय पर बंद करने वाला कोई तंत्र है और न ही निगरानी की कोई व्यवस्था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ये लाइटें धड़ल्ले से जलती रहती हैं। लगातार जलने से लाइटें ओवरहीट होकर खराब हो रही हैं जिससे निगम के कंट्रोल रूम में रोजाना औसतन 50 से 100 शिकायतें सिर्फ स्ट्रीट लाइट खराब होने की आ रही हैं। इससे निगम को दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तरफ बिजली की बर्बादी, दूसरी तरफ बार-बार बल्ब बदलने का खर्च।
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ऐसे काम करता है सीसीएमएस सिस्टम
सीसीएमएस एक आधुनिक सॉफ्टवेयर-आधारित प्रणाली है। इसके तहत शहर की सभी स्ट्रीट लाइटों को एक मुख्य सर्वर से जोड़ा जाता है। सॉफ्टवेयर में सूर्यास्त और सूर्योदय के समय के अनुसार टाइम-टेबल सेट कर दिया जाता है। इससे निर्धारित समय पर पूरे शहर की लाइटें एक साथ जलेंगी और बंद होंगी। इससे मानवीय लापरवाही से होने वाली बिजली की बर्बादी पूरी तरह से रुक जाएगी।
बयान
सीसीएमएस सिस्टम की स्थापना को लेकर निगम स्तर पर कार्रवाई जारी है। तकनीकी पहलुओं को अमलीजामा पहनाने के लिए दूसरे जिले की एक विशेषज्ञ इंजीनियरिंग संस्था से संपर्क किया गया है। जल्द ही बाकी विभागीय औपचारिकताएं पूरी कराकर काम शुरू करा दिया जाएगा।
-प्रेमपाल सिंह, प्रभारी, प्रकाश विभाग, नगर निगम
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सितंबर 2025 में नगर निगम ने करीब 4.78 करोड़ रुपये की लागत से शहर की प्रकाश व्यवस्था को आधुनिक बनाने की योजना को मंजूरी दी थी। निगम बोर्ड की बैठक में पास इस योजना को अमल में लाने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजतन पुरानी व्यवस्था जस की तस बनी हुई है और बिजली की बर्बादी लगातार जारी है।
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बिना कंट्रोल सिस्टम रोज फूंकी जा रही हजारों यूनिट बिजली
नगर निगम क्षेत्र के 70 वार्डों की गलियों, मुख्य बाजारों और हाईवे पर लगभग 23 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं। एकीकृत कंट्रोल सिस्टम न होने के कारण न तो इन्हें समय पर बंद करने वाला कोई तंत्र है और न ही निगरानी की कोई व्यवस्था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ये लाइटें धड़ल्ले से जलती रहती हैं। लगातार जलने से लाइटें ओवरहीट होकर खराब हो रही हैं जिससे निगम के कंट्रोल रूम में रोजाना औसतन 50 से 100 शिकायतें सिर्फ स्ट्रीट लाइट खराब होने की आ रही हैं। इससे निगम को दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तरफ बिजली की बर्बादी, दूसरी तरफ बार-बार बल्ब बदलने का खर्च।
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ऐसे काम करता है सीसीएमएस सिस्टम
सीसीएमएस एक आधुनिक सॉफ्टवेयर-आधारित प्रणाली है। इसके तहत शहर की सभी स्ट्रीट लाइटों को एक मुख्य सर्वर से जोड़ा जाता है। सॉफ्टवेयर में सूर्यास्त और सूर्योदय के समय के अनुसार टाइम-टेबल सेट कर दिया जाता है। इससे निर्धारित समय पर पूरे शहर की लाइटें एक साथ जलेंगी और बंद होंगी। इससे मानवीय लापरवाही से होने वाली बिजली की बर्बादी पूरी तरह से रुक जाएगी।
बयान
सीसीएमएस सिस्टम की स्थापना को लेकर निगम स्तर पर कार्रवाई जारी है। तकनीकी पहलुओं को अमलीजामा पहनाने के लिए दूसरे जिले की एक विशेषज्ञ इंजीनियरिंग संस्था से संपर्क किया गया है। जल्द ही बाकी विभागीय औपचारिकताएं पूरी कराकर काम शुरू करा दिया जाएगा।
-प्रेमपाल सिंह, प्रभारी, प्रकाश विभाग, नगर निगम