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आग में ही दफन हो रहे अधिकार और अरमान

Thu, 30 Apr 2015 11:29 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Thu, 30 Apr 2015 11:29 PM IST
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buried in the fire authority and Arman
 धधकती आग और बंद कमरे की तपती दीवारें। जिनमें दिन से रात तक दो जून रोटी के लिए पसीना बहाते श्रमिक। इनके लिए श्रमिक दिवस तो दूर की बात शासन की योजनाओं के बारे में भी बात करना बेमानी है। 1000 से 1500 डिग्री तापमान के बीच काम करने वाले कारीगर तमाम कानूनों के बाद भी शोषण का शिकार हैं। ठेकेदार से लेकर अफसर तक उनके अधिकारों पर डाका डाल रहे हैं। श्रमिक संगठन भी झंडा ऊंचा करने की होड़ में असल लक्ष्य से भटक गए हैं। ऐसे में श्रमिकों को शिक्षा से लेकर इलाज तक के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।
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 सुहाग नगरी के कांच उद्योग में दो से तीन लाख मजदूर कार्यरत हैं। सेवायोजकों की मनमानी इन पर भारी रहती है। 12 नंबर रजिस्टर में हाजिरी लगाना हो या आठ घंटे के स्थान पर 10 घंटे तक जबरन कार्य कराना, सब जारी है। विरोध करने पर मारपीट, झूठे मुकदमे तक सहने पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में श्रम का यह आधार किसी भी स्तर पर राहत की उम्मीद छोड़ चुकाहै।
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दर्द इन्हीं की जुबानी
- हरिशचंद्र का कहना है कि महंगाई के कारण डबल ड्यूटी करने को मजबूर हैं। मेहनताने के रूप में एक ड्यूटी का 250 न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए लेकिन 200 रुपये ही दिए जा रहे हैं।  
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- महेंद्र सिंह का कहना है कि चूड़ी गिनाई का काम करते-करते कई साल हो गए लेकिन कारखाना मालिक द्वारा कोई सुविधाएं नहीं दी जा रहीं। न्यूनतम वेतन की मांग उठाते हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
- बंटू ने कहा कि गुल्ली उठाने के मात्र 280 रुपये दिए जाते हैं जबकि न्यूनतम वेतन 350 रुपये है। कारखाने में 9 घंटे तक कार्य कराया जा रहा है।

इलाज के लिए मुहाल
सुहाग नगरी में कार्यरत लाखों श्रमिकों के इलाज के लिए अभी तक ईएसआई हॉस्पीटल भी नहीं बन सका है। जिला प्रशासन के प्रस्ताव को शासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लंबे समय से ईएसआई हॉस्पीटल महावीर नगर में किराए के भवन में संचालित है। यहां चिकित्सकों के अभाव के चलते श्रमिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।

निर्माण श्रमिकों को 3.96 करोड़ की सौगात
श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को 3.96 करोड़ की सौगात मिल चुकी है। विभाग में 23500 श्रमिक पंजीकृत हैं। इसमें 5947 को श्रमिक विभाग ने विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया है। 2736 श्रमिकों को साइकिल और 946 श्रमिकों को निशुल्क सोलर लाइट प्रदान की गईं हैं।

29 बच्चों को छात्रवृत्ति, पढ़ाई का खर्चा
श्रम विभाग 29 ऐसे बच्चों जिनके माता-पिता नहीं हैं, कक्षा में प्रवेश पर 3000 और उत्तीर्ण होने पर 5000 की आर्थिक मदद दे रहा है। 100 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति दी जा रही है। चार श्रमिकों को 80 हजार की मदद दी गई।



 कांच उद्योग में कार्यरत श्रमिकों का हर स्तर पर शोषण किया जा रहा है। न्यूनतम मजदूरी के लिए भी श्रमिकों को संघर्ष करना पड़ता है। यहां श्रम कानून नाम की कोई चीज नहीं है। संगठन श्रमिकों को उनका हक दिलाने का हरसंभव प्रयास करेगा।
भूरी सिंह
जिलामंत्री,  कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ
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