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Firozabad News: सामाजिक सरोकारों के साथ आम जनता की आवाज बना अमर उजाला
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अमर उजाला की पुरानी प्रति दिखाते अधिवक्ता,व्यापारी एवं समाजसेवी। संवाद
फिरोजाबाद। सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ अमर उजाला जनता की आवाज हमेशा बनता रहा। यही कारण है आज यह समाचार पत्र जन-जन की आवाज बन गया। हालात यह है कि हर सुबह हमारी अमर उजाला के साथ होती है। नहीं मिलने पर यह लगता है कि आज कुछ अधूरा छूट गया। महिलाओं के लिए रूपायन और युवा पेज के साथ संपादकीय पेज में जो निष्पक्षता दिखती है वह सराहनीय है। अमर उजाला के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में शहर के समाजसेवी, व्यापारी वर्ग के साथ-साथ उद्यमी खुलकर बोले।
अमर उजाला की ओर से होटल तुलसी पैलेस में आयोजित संवाद के दौरान अमर उजाला के 77 वर्षों के सफर को याद करते हुए लोगों ने कहा कि यह अखबार उनके जीवन का हिस्सा हो गया। उद्योग से जुडे संजय गुप्ता ने कहा कि फिरोजाबाद के कांच उद्योग को गैस दिलाने में अमर उजाला ने अहम भूमिका निभाई थी। अभियान के रूप में समाचार प्रकाशित करके अफसरों और सरकार को जगाने का काम किया। मां वैष्णोदेवी धाम विकास ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य एवं व्यापारी राजेश अग्रवाल ने कहा कि अमर उजाला पढ़ नहीं लूं तो माइंड सैट नहीं होता। हमें पता है कि वर्ष में चार छुट्टी होती हैं, इसके कारण मैं एक दिन आधा अखबार ही पढ़ता हूं। ताकि अगले दिन पढ़ लूं।
युवा ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष श्रीओम शर्मा ने कहा हमें इस समाचार पत्र में युवाओं के लिए सामिग्री बढ़ानी चाहिए। इसकी सख्त जरूरत है। व्यापार मंडल के महामंत्री कौशल किशोर उपाध्याय ने कहा कि अमर उजाला नाम के अनुरूप ही काम करता है। व्यापारी, अधिकारी, कर्मचारी के साथ आमजन जिसके साथ अन्याय होता है उसकी ढाल अमर उजाला बनता है। नितिन गोयल ने कहा कि व्यापारियों की आवाज बुलंद करता है। असद अहमद ने कहा कि अमर उजाला निष्पक्ष समाचार पत्र है।
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अमर उजाला की स्थापना 18 अप्रैल 1948 को स्वर्गीय डोरीलाल अग्रवाल एवं स्व. मुरारीलाल माहेश्वरी ने संयुक्त रूप से की थी। इस समाचार पत्र को पिछले 70 वर्षों से पढ़ रहे हैं। यह एक वर्ष के बाद ही काफी विस्तार कर गया। बरेली तथा मेरठ के बाद आज उत्तर भारत हिंदी पट्टी का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला अखबार बका है। फिरोजाबाद की बात करें तो यहां पर तो यह अखबार यहां तो जनता की आवाज बना। जिले की स्थापना के साथ अपराध कंट्रोल, उद्योगों को गैस और व्यापारियों के साथ होने वाले अन्याय को प्रमुखता से उठाया। मेरे तो जीवन का हिस्सा यह समाचार पत्र बन गया।
अनूपचंद्र जैन एडवोकेट, समाजसेवी
- पिछले 45 वर्षों से अमर उजाला को पढ़ते चले आ रहे हैं। व्यापारियों के साथ हर वर्ग की बात बड़ी निर्भीकता के साथ अमर उजाला उठाता रहा है। यही कारण है कि यह आज जन-जन की आवाज बना हुआ है। व्यापार मंडल एवं व्यापारी की पहली पसंद है।
रवींद्रलाल तिवारी, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल
व्यापारियों की समस्याओं पर अमर उजाला समाचार पत्र हमेशा ही प्रमुखता से लिखता रहा। कभी किसी के आगे यह समाचार पत्र झुका नहीं यह खासियत रही। मैं पिछले 60वर्ष से पढ़ता चला आ रहा हूं। सही मायने में तो मैं इसका आदी हो गया हूं।
इसरार अहमद, सचिव ईदगाह कमेटी
- मुझे खूब ध्यान है आज में 70 वर्ष का हो गया। मैं कक्षा 11 का छात्र था। उस समय फोटो सहित समाचार छपा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तब से आज तक समाचार पत्र को निरंतर पढ़ रहा हूं। वास्तव में एक समाचार पत्र में निष्पक्षता के साथ बात रखने की जो धाक है वह अमर उजाला में है।
डॉ. ध्रुव कुमार आचार्य, समाजसेवी
- मैं 1960 से अमर उजाला का निरंतर पाठक हूं। व्यापार मंडल की काफी राजनीति की इसमें अमर उजाला ने व्यापारी वर्ग का हर समय साथ दिया। चाहे वाणिज्यकर का मामला हो या फिर अन्य समस्याएं रहीं हों। उन्होंने आज की पत्रकारिता में आए बदलाव पर भी टिप्पड़ी की। लेकिन इन सभी के बीच अमर उजाला ने जो अपनी छाप बनाई है वह सराहनीय है।
बीएस गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल
- मैं पिछले 35 वर्षों से अमर उजाला समाचार पत्र को प्रतिदिन पढ़ता चला आ रहा हूं। समाचार पत्र तो और भी आते हैं लेकिन अमर उजाला नहीं पढ़ूं तो लगता है कुछ छूट गया। इसलिए मैं निरंतर पढ़ने की आदत सी बन गई है। क्योंकि इसमें निष्पक्षता, निर्भीकता साफ झलकती है।
दयाशंकर गुप्ता, अध्यक्ष संस्कार भारती
- आज मुझे बेहद खुशी है कि स्वर्गीय डोरीलाल अग्रवाल और स्वर्गीय मुरारीलाल माहेश्वरी के द्वारा स्थापित पौधा वटवृक्ष बन गया। उत्तर भारत के हिंदी पट्टी का प्रमुख समाचार पत्र बनना मेरे लिए गौरव की बात है। 20 वर्ष से मैंने अमर उजाला से जुड़ा हूं। निश्चित ही निष्पक्षता की मिशाल है। हमें उम्मीद है इस मिशाल को हमेशा कायम रखेंगे।
सुनील अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष व्यापार मंडल
- अमर उजाला जब स्थानीय बस स्टैंड पर आना शुरू हुआ तो उसे बंटवाने में मैने भी सहयोग किया। क्योंकि उस समय मैं भी छोटा था। समाचार पत्र पढ़ने का शौक था। इस कारण प्रतिदिन तड़के जाया करता था। चार पेज का समाचार पत्र होता था। अमर उजाला ने निष्पक्षता, निर्भीकता के कारण कई बार इसे बर्दाश्त नहीं करने वालों का विरोध भी झेला। लेकिन वह झुके नहीं।
कैलाश उपाध्याय, प्रदेश उपाध्यक्ष व्यापार मंडल
समाजसेवियों ने पौधा रोपा
फिरोजाबाद। अमर उजाला के स्थापना दिवस के मौके पर शहर के समाजसेवियों ने सहायक श्रमायुक्त यशवंत कुमार के साथ पौधा रोपित किया। बोले 18 अप्रैल 1948 को यह अमर उजाला ठीक इसी पौधे के समान था जो आज वटवृक्ष बन गया। निश्चित ही यह पौधा भी एक दिन पर्यावरण को संरक्षित करने का काम करेगा। इस दौरान व्यापारी और समाजसेवी मौजूद रहे। संवाद
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अमर उजाला की ओर से होटल तुलसी पैलेस में आयोजित संवाद के दौरान अमर उजाला के 77 वर्षों के सफर को याद करते हुए लोगों ने कहा कि यह अखबार उनके जीवन का हिस्सा हो गया। उद्योग से जुडे संजय गुप्ता ने कहा कि फिरोजाबाद के कांच उद्योग को गैस दिलाने में अमर उजाला ने अहम भूमिका निभाई थी। अभियान के रूप में समाचार प्रकाशित करके अफसरों और सरकार को जगाने का काम किया। मां वैष्णोदेवी धाम विकास ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य एवं व्यापारी राजेश अग्रवाल ने कहा कि अमर उजाला पढ़ नहीं लूं तो माइंड सैट नहीं होता। हमें पता है कि वर्ष में चार छुट्टी होती हैं, इसके कारण मैं एक दिन आधा अखबार ही पढ़ता हूं। ताकि अगले दिन पढ़ लूं।
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युवा ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष श्रीओम शर्मा ने कहा हमें इस समाचार पत्र में युवाओं के लिए सामिग्री बढ़ानी चाहिए। इसकी सख्त जरूरत है। व्यापार मंडल के महामंत्री कौशल किशोर उपाध्याय ने कहा कि अमर उजाला नाम के अनुरूप ही काम करता है। व्यापारी, अधिकारी, कर्मचारी के साथ आमजन जिसके साथ अन्याय होता है उसकी ढाल अमर उजाला बनता है। नितिन गोयल ने कहा कि व्यापारियों की आवाज बुलंद करता है। असद अहमद ने कहा कि अमर उजाला निष्पक्ष समाचार पत्र है।
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अमर उजाला की स्थापना 18 अप्रैल 1948 को स्वर्गीय डोरीलाल अग्रवाल एवं स्व. मुरारीलाल माहेश्वरी ने संयुक्त रूप से की थी। इस समाचार पत्र को पिछले 70 वर्षों से पढ़ रहे हैं। यह एक वर्ष के बाद ही काफी विस्तार कर गया। बरेली तथा मेरठ के बाद आज उत्तर भारत हिंदी पट्टी का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला अखबार बका है। फिरोजाबाद की बात करें तो यहां पर तो यह अखबार यहां तो जनता की आवाज बना। जिले की स्थापना के साथ अपराध कंट्रोल, उद्योगों को गैस और व्यापारियों के साथ होने वाले अन्याय को प्रमुखता से उठाया। मेरे तो जीवन का हिस्सा यह समाचार पत्र बन गया।
अनूपचंद्र जैन एडवोकेट, समाजसेवी
- पिछले 45 वर्षों से अमर उजाला को पढ़ते चले आ रहे हैं। व्यापारियों के साथ हर वर्ग की बात बड़ी निर्भीकता के साथ अमर उजाला उठाता रहा है। यही कारण है कि यह आज जन-जन की आवाज बना हुआ है। व्यापार मंडल एवं व्यापारी की पहली पसंद है।
रवींद्रलाल तिवारी, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल
व्यापारियों की समस्याओं पर अमर उजाला समाचार पत्र हमेशा ही प्रमुखता से लिखता रहा। कभी किसी के आगे यह समाचार पत्र झुका नहीं यह खासियत रही। मैं पिछले 60वर्ष से पढ़ता चला आ रहा हूं। सही मायने में तो मैं इसका आदी हो गया हूं।
इसरार अहमद, सचिव ईदगाह कमेटी
- मुझे खूब ध्यान है आज में 70 वर्ष का हो गया। मैं कक्षा 11 का छात्र था। उस समय फोटो सहित समाचार छपा तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तब से आज तक समाचार पत्र को निरंतर पढ़ रहा हूं। वास्तव में एक समाचार पत्र में निष्पक्षता के साथ बात रखने की जो धाक है वह अमर उजाला में है।
डॉ. ध्रुव कुमार आचार्य, समाजसेवी
- मैं 1960 से अमर उजाला का निरंतर पाठक हूं। व्यापार मंडल की काफी राजनीति की इसमें अमर उजाला ने व्यापारी वर्ग का हर समय साथ दिया। चाहे वाणिज्यकर का मामला हो या फिर अन्य समस्याएं रहीं हों। उन्होंने आज की पत्रकारिता में आए बदलाव पर भी टिप्पड़ी की। लेकिन इन सभी के बीच अमर उजाला ने जो अपनी छाप बनाई है वह सराहनीय है।
बीएस गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल
- मैं पिछले 35 वर्षों से अमर उजाला समाचार पत्र को प्रतिदिन पढ़ता चला आ रहा हूं। समाचार पत्र तो और भी आते हैं लेकिन अमर उजाला नहीं पढ़ूं तो लगता है कुछ छूट गया। इसलिए मैं निरंतर पढ़ने की आदत सी बन गई है। क्योंकि इसमें निष्पक्षता, निर्भीकता साफ झलकती है।
दयाशंकर गुप्ता, अध्यक्ष संस्कार भारती
- आज मुझे बेहद खुशी है कि स्वर्गीय डोरीलाल अग्रवाल और स्वर्गीय मुरारीलाल माहेश्वरी के द्वारा स्थापित पौधा वटवृक्ष बन गया। उत्तर भारत के हिंदी पट्टी का प्रमुख समाचार पत्र बनना मेरे लिए गौरव की बात है। 20 वर्ष से मैंने अमर उजाला से जुड़ा हूं। निश्चित ही निष्पक्षता की मिशाल है। हमें उम्मीद है इस मिशाल को हमेशा कायम रखेंगे।
सुनील अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष व्यापार मंडल
- अमर उजाला जब स्थानीय बस स्टैंड पर आना शुरू हुआ तो उसे बंटवाने में मैने भी सहयोग किया। क्योंकि उस समय मैं भी छोटा था। समाचार पत्र पढ़ने का शौक था। इस कारण प्रतिदिन तड़के जाया करता था। चार पेज का समाचार पत्र होता था। अमर उजाला ने निष्पक्षता, निर्भीकता के कारण कई बार इसे बर्दाश्त नहीं करने वालों का विरोध भी झेला। लेकिन वह झुके नहीं।
कैलाश उपाध्याय, प्रदेश उपाध्यक्ष व्यापार मंडल
समाजसेवियों ने पौधा रोपा
फिरोजाबाद। अमर उजाला के स्थापना दिवस के मौके पर शहर के समाजसेवियों ने सहायक श्रमायुक्त यशवंत कुमार के साथ पौधा रोपित किया। बोले 18 अप्रैल 1948 को यह अमर उजाला ठीक इसी पौधे के समान था जो आज वटवृक्ष बन गया। निश्चित ही यह पौधा भी एक दिन पर्यावरण को संरक्षित करने का काम करेगा। इस दौरान व्यापारी और समाजसेवी मौजूद रहे। संवाद