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Firozabad News: ज्यादा डोज की एंटीबायोटिक दवा नहीं लिखेंगे 115 चिकित्सक

Mon, 27 Nov 2023 11:14 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Mon, 27 Nov 2023 11:14 PM IST
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115 doctors will not prescribe high dose antibiotics
फिराेजाबाद। उच्चस्तरीय एंटीबायोटिक लिखकर मरीजों को जल्दी आराम दिलाया जाता है, लेकिन दवा की ज्यादा डोज मरीज को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाती है। शासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब सामान्य एमबीबीएस डॉक्टर व ईएमओ उच्चस्तरीय एंटीबायोटिक नहीं लिख सकेंगे। जिले के 92 विशेषज्ञ डॉक्टरों को ही हाईरिस्क एंटीबायोटिक लिखने की अनुमति होगी। 115 सामान्य डॉक्टर के अलावा जूनियर रेजीडेंट्स ऐसी दवाओं को लिखने के लिए वैध नहीं होंगे।
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मरीज जब डॉक्टर के पास पहुंचता है तो चिकित्सक उसे जल्द ठीक करने के लिए ज्यादा डोज वाली उच्चस्तरीय एंटीबायोटिक का प्रयोग कर रहे हैं। उससे तत्काल आराम तो मिलता है, मगर मरीजों में तेजी से एंटीबायोटिक प्रतिरोध क्षमता (रेजिस्टेंस) विकसित हो रही है। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉक्टर दीपा त्यागी ने आदेश जारी करते हुए एंटीबायोटिक के इस्तेमाल की पॉलिसी लागू करने का निर्देश दिया है। महानिदेशक ने नियम का पालन न होने पर सभी विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी दी है।
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एमबीबीएस व ईएमओ लिखेंगे प्रथम श्रेणी की दवा

एमबीबीएस डिग्री वाले डाॅक्टर व इमरजेंसी में मौजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर सिर्फ प्रथम श्रेणी के एंटीबायोटिक का परामर्श कर सकेंगे। अस्पताल के अधीक्षक वहां मौजूद दवाओं का वर्गीकरण कर सूची तैयार करेंगे की कौन सा डॉक्टर किस दवाओं के इस्तेमाल का परामर्श देने के लिए वैध होगा। बीच बीच में मरीजों के पर्चों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। लेवल तीन व चार की सर्वोच्च एंटीबायोटिक दवाएं अस्पताल के सीएमएस या अधीक्षक अनुमति के बाद ही परामर्श की जाएंगी। एंटीबायोटिक दवाओं का चार भाग में वर्गीकरण की जिम्मेदारी सीएमएस व सीएमओ की होगी।
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एंटीबायोटिक के नुकसान

-लगातार एंटीबायोटिक का प्रयोग करने से शरीर में उसकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। फिर दवा का असर नहीं होता है। इसके अलावा पाचन संबंधी समस्याएं, भूख में कमी होना, पेट में दर्द होना, सूजन होना आदि समस्याएं भी हो सकती हैं।


डाॅ. निमित गुप्ता, न्यूरो सर्जन
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-आदेश का कराया जाएगा पालन
-महानिदेशक के पत्र के क्रम में सभी सीएमओ व सीएमएस को निर्देशित किया गया है कि वह अपने अस्पताल में दवाओं का वर्गीकरण कर पॉलिसी तैयार करें। कौन डॉक्टर किस दवा को परामर्श करने के लिए वैध है इसकी सूची भी तैयार की जानी चाहिए। शासन की मंशा के अनुसार ही कार्य कराया जाएगा। समय-समय पर निरीक्षण भी कराकर हकीकत को परखा जाएगा।
-डाॅ. चंद्रशेखर, अपर निदेशक स्वास्थ्य

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