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दृढ़ संकल्प के साथ शिक्षा की अलख जगा रही मैमूना

Mon, 21 Mar 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर Updated Mon, 21 Mar 2016 12:59 AM IST
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With determination fueled the imagination of education Mamuna
उच्च प्राथमिक विद्यालय मलवां द्वितीय में बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाती प्रधानाध्यापक मैमूना खातून

क्या कोई परिषदीय स्कूल भी कान्वेंट की तरह हो सकता है? परिसर से लेकर बच्चों की साफ-सफाई तक सब कुछ ओके। पर्यावरण से हरा-भरा परिसर और हर आगंतुक से अदब-लिहाज से बातचीत। ऐसा संभव है। हम बताते हैं, अपने जिले के मलवां ब्लाक में ऐसा ही परिषदीय विद्यालय है। यहां की प्रधानाध्यापिका मैमूना खातून हर बच्चे को विद्या के मंदिर तक पहुंचाने की अलख खुद जगा रही हैं। वह खुद गांव में जाकर बच्चों को स्कूल तक लाती हैं और परिवार को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इसी लगन को देखकर उन्हें तीन बार बेस्ट टीचर का एवार्ड मिल चुका है और अब तो राष्ट्रपति से सम्मान के लिए भेजे गए नाम में भी शुमार है।

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शहर के पनी मुहल्ले निवासी मैमूना खातून हर दिन समय से पहले अपने उच्च प्राथमिक विद्यालय मलवां द्वितीय पहुंचती हैं। यदि कोई बच्चा स्कूल नहीं आया तो खुद उसके घर जाकर हालचाल पूछती हैं। वजह जानकर परिवार को समझाकर बच्चे को स्कूल ले आती हैं। तभी तो 105 पंजीकृत बच्चों में अधिकांश उपस्थित रहते हैं।
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बच्चों की तय पोशाक में नियमित विद्यालय पहुंचना, सिर से पैर तक साफ-सफाई वह बस्ते में करीने से सजे किताब व कापियां। परिषदीय विद्यालय की यह हालत देख इन पर बेसिक शिक्षा विभाग भी मेहरबान है। इस वजह से स्कूल को 101 सेंटीमीटर का एलसीडी, तीन कंप्यूटर, दो सिलाई मशीन भी उपलब्ध कराई गई है।
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इन्हीं के पढ़ाए बच्चे मलवां के विशाल शुक्ला, रीता, शारदा व मानेंद्र सिंह वर्तमान में शिक्षक बन गए हैं। एक बच्चा जय प्रकाश लखनऊ में एसडीएम है। विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका मंजू चौहान व जहारा का कहना है कि अनुशासन और शिक्षा का जो अनोखा माहौल यहां है, वह प्रेरणा देता है।


मैमूना खातून ने बातचीत में बताया कि वह 2017 में रिटायर होने वाली हैं। जब से शिक्षक बनीं तभी से लक्ष्य बना लिया था कि अध्यापन कार्य को नौकरी समझकर नहीं बल्कि समाज सेवा के रूप में लेंगे। बस इसी सोच के साथ बच्चों को बेहतर कॅरियर दे रही हैं।

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