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Fatehpur News: बारिश और जलभराव से सब्जियों की आवक घटी, टमाटर 50 रुपये किलो
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धाता। दो माह से रुक-रुककर हो रही बारिश और खेतों में जलभराव से हरी सब्जियों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। इसका असर बाजार में आवक और कीमतों पर पड़ा है। खेतों में तैयार चिचड़ा, लौकी, कुम्हड़ा, तरोई, नेनुआ, बैंगन और बरसाती हरे टमाटर की फसल खराब होने से स्थानीय उत्पादन घट गया है। इससे सब्जियों के भाव तेजी से बढ़े हैं।
अढ़ौली और लिहई की रविवार बाजार तथा सोमवार को धाता बाजार में टमाटर 50 रुपये किलो बिका। छोटा कुम्हड़ा और लौकी 30, खीरा 50, चिचड़ा 50, तरोई 50, परवल 80, बैंगन और करेला 40 रुपये किलो रहे। पत्ता गोभी और फूल गोभी के छोटे आकार के टुकड़े भी करीब 40 रुपये किलो बिके। घुइयां बाजार में नहीं पहुंची। विक्रेताओं के अनुसार खेतों में जलभराव के कारण इसकी खुदाई नहीं हो पा रही है।
सब्जी विक्रेता बबलू सोनकर, बड़का, कल्लू, विनोद सिंह और बबलू सिंह ने बताया कि लगातार बारिश से स्थानीय सब्जियों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से कई फसलें सड़ गईं, जबकि कुछ सब्जियों की बेलें भी खराब हो गईं। स्थानीय उत्पादन घटने से बाहर से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता बढ़ गई है।
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अढ़ौली और लिहई की रविवार बाजार तथा सोमवार को धाता बाजार में टमाटर 50 रुपये किलो बिका। छोटा कुम्हड़ा और लौकी 30, खीरा 50, चिचड़ा 50, तरोई 50, परवल 80, बैंगन और करेला 40 रुपये किलो रहे। पत्ता गोभी और फूल गोभी के छोटे आकार के टुकड़े भी करीब 40 रुपये किलो बिके। घुइयां बाजार में नहीं पहुंची। विक्रेताओं के अनुसार खेतों में जलभराव के कारण इसकी खुदाई नहीं हो पा रही है।
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सब्जी विक्रेता बबलू सोनकर, बड़का, कल्लू, विनोद सिंह और बबलू सिंह ने बताया कि लगातार बारिश से स्थानीय सब्जियों की फसल को काफी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से कई फसलें सड़ गईं, जबकि कुछ सब्जियों की बेलें भी खराब हो गईं। स्थानीय उत्पादन घटने से बाहर से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता बढ़ गई है।
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