फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   Urban drinking fluoridated water

शहरी पी रहे फ्लोराइडयुक्त पानी

Sun, 10 Apr 2016 12:17 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sun, 10 Apr 2016 12:17 AM IST
विज्ञापन
Urban drinking fluoridated water
शहर में लगा नगर पालिका का नलकूप। - फोटो : अमर उजाला

सावधान: शहर में जलापूर्ति फ्लोराइड युक्त है। पाइप लाइनों से मिलने वाला पानी पीने से दांत गिरने के अलावा जोड़ों में दर्द व विकलांगता जैसी बीमारी हो सकती हैं। इसके बावजूद शहरवासियों को ये दूषित पानी पीना मजबूरी है।

विज्ञापन


शहर के  अंबिलिहा बाग मोहल्ले में 11 साल पहले संक्रामक बीमारी फैलने से दर्जनभर लोगों की मौत हो गई थी। जिला स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर शहर की जलापूर्ति के 16 स्थानों से नमूने लिए गए थे। जांच में सभी नमूनों में सामान्य से अधिक फ्लोराइड की मात्रा पाई गई थी।
विज्ञापन


प्रयोगशाला की रिपोर्ट में शहर का पानी पीने के अयोग्य घोषित करते हुए डीप बोरिंग कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद नगर पालिका परिषद ने 25 नए नलकूप डीप बोरिंग वाले लगवाए, लेकिन पुराने 23 नलकूप भी चलाए जा रहे हैं। पूरे शहर की जलापूर्ति की पाइप लाइन एक दूसरे से मिली हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसी हालत में डीप और सामान्य बोरिंग वाले दोनों नलकूपों का पानी एक साथ मिलकर आपूर्ति किया जा रहा है। यही पानी शहरवासियों को पीने को मिल रहा है। स्थिति यह है कि वर्तमान समय में शहर में पीने के लिए मिल रहे प्रति लीटर पानी में 1.5 मिली ग्राम से अधिक फ्लोराइड बढ़ गई है।

ऐसे में आम जनजीवन में जोड़ों में दर्द, हड्डियां कमजोर होने से विकलांगता पैदा होना, दांत पीले और टेढ़े मेढे़ होना तथा समय से पहले दांत गिर जाने की शिकायत हो सकती है।
इनसेट:
चौहट्टा में हर बच्चा निशक्त
फतेहपुर। भिटौरा विकास खंड के चौहट्टा गांव के सभी जलस्रोतों का पानी फ्लोराइडयुक्त है। फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण इस गांव का हर बच्चा विकलांग होता है। यहां पर 14 साल के नीचे के हर बच्चे के हाथ या पैर की हड्डी टेढ़ी-मेढ़ी होती है। इसी तरह से मलवां ब्लाक के छिवली गांव में फ्लोराइड की मात्रा पानी में होने के कारण हर बच्चे के दांत पीले या टेढ़े मेढ़े हैं।

डा. एसके सिंह का कहना है कि शुद्ध पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा प्रति लीटर पानी में 0.2 से लेकर 0.5 तक होनी चाहिए। इससे अधिक मात्रा बढ़ने पर जोड़ों में दर्द, हड्डी टेढ़ी होने, समय से पहले दांत गिरने और दांत टेढ़े मेढे होना या फिर पीले होने की शिकायत होने की संभावनाएं पैदा हो जाती हैं।

राजकीय इंटर कालेज के रसायन विज्ञान प्रवक्ता विष्णु कुमार पांडेय का कहना है कि पानी में फ्लोराइड की मात्रा नमक से बढ़ती है। बरसात कम होने के कारण घरों का गंदा पानी, पशुओं की हड्डियों से छनकर निकलने वाला पानी, शौचालयों का पानी रिचार्ज होकर जल स्रोतों में पहुंचकर फ्लोराइड की मात्रा बढ़ा रहा है। क्योंकि इस पानी में नमक की मात्रा खासी मात्रा में पाई जाती है। ऐसा पानी पीना स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से खतरनाक है।

दशक भर पहले लगे डोजर भी बंद
फतेहपुर। स्वास्थ्य विभाग से पहली बार शहर की जलापूर्ति में फ्लोराइड की मात्रा की पुष्टि होने पर नगर पालिका परिषद ने जलस्रोतों में शुद्धिकरण की व्यवस्था की थी। एक दशक पहले तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अरुण कुमार गुप्ता ने 14 नलकूपों में इलेक्ट्रानिक डोजर लगवाए थे। कुछ दिन डोजरों के माध्यम से क्लोरीन मिलाकर जलापूर्ति की विषंक्रमण किया गया, लेकिन उनके तबादले के बाद सभी डोजर बंद कर दिए गए।


चूना, कोयला, बालू से बना फिल्टर विकल्प
फतेहपुर। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लोराइड युक्त पानी कतई पीने योग्य नहीं है। ऐसे जलस्रोत का पानी पीने से प्रतिबंधित करना प्रशासन का दायित्व है। अभी तक कोई आधुनिक तरीका नहीं बना है, जिससे पानी को फ्लोराइड से मुक्त किया जा सके। लेकिन चूना, कोयला, महीन बालू और मिट्टी से बने फिल्टर से छना पानी फ्लोराइड मुक्त माना जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed