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भिटौरा घाट पर दो छात्र डूबे, एक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो फतेहपुर
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:39 AM IST
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डूबे आकाश मौर्या की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
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पथरकटा इलाके से भिटौरा ओम घाट में गुरुवार को गंगा नहाने गए पांच युवकों में आकाश मौर्या (20) की डूब जाने से मौत हो गई। एक डूब रहे युवक की जान बचा ली गई। परिजनों ने पुलिस से पोस्टमार्टम कराने को मना कर दिया है।
आकाश पथरकटा चौराहा निवासी दिनेश चंद्र मौर्या का बेटा था। यह ठाकुर युगराज सिंह महाविद्यालय में बीए फाइनल में पढ़ता था। पिता की इलेक्ट्रानिक्स की दुकान में बैठकर उनका हाथ बंटाता था। बाजार बंदी का दिन होने के कारण चचेरे भाई सलोनी मौर्या उर्फ शुभम व मित्रों सत्यम मौर्या, जीतू मौर्या, राहुल साहू के साथ बाइक से भिटौरा गया था।
बताया कि सबसे पहले आकाश और सलोनी नहाने के लिए नदी में उतरे। दोनों गहराई में चले गए और डूबने लगे। जीतू मौर्या ने बताया कि शोर सुनकर जैसे-तैसे सलोनी को जल्द ही बाहर निकाल लिया, लेकिन आकाश गहराई में डूबने लगा। किसी तरह नाव खेने का डंडा पकड़ाकर छटपटा रहे आकाश को बाहर निकाला गया। निकलते ही आकाश बेहोश हो गया, उसको बाइक से ही जिला अस्पताल लेकर भागे। वहां पर डाक्टरों के प्रयास के बाद जान नहीं बच सकी।
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छलावा साबित हुए सुरक्षा इंतजाम, फिर हुई छात्र की मौत - फतेहपुर। पर्यटक स्थल बनने के मुहाने पर खड़े भिटौरा गंगा घाट पर सुरक्षा का इंतजाम दिखावा भर है। दस दिन पहले बिलंदा की छात्रा की डूबने से मौत हो गई थी, जिसका अभी तक सुराग नहीं लग सका है। गुरुवार को फिर एक छात्र की डूबने से मौत ने सवाल खड़े कर दिए हैं। घाट किनारे पुलिस चौकी भी बनाई गई है, लेकिन आरोप है कि पुलिस घाट पर लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद नहीं रहती है।
मृतक के साथियों ने बताया कि घाट किनारे नावें खड़ी रही हैं। जब आकाश डूब रहा था, तब वे लोग चिल्ला रहे थे और नाविकों से मदद की मंाग की गुहार लगा रहे थे, वहां कोई भी सुनने वाला नहीं था। कोई पुलिस कर्मी भी मौजूद नहीं रहा। किसी तरह से आकाश को बाहर निकाला। वहीं प्राथमिक इलाज और एंबुलेंस का इंतजाम नहीं था। यह सब होता तो उसकी जान बच जाती।
बता दें दस दिन पहले एक परिवार के पांच लोग डूबे थे। हालांकि एक दरोगा और लोगों के प्रयास से परिवार के लोगों की जान बच गई थी, लेकिन छात्रा का कोई सुराग नहीं लगा। दूसरी ओर चौकी इंचार्ज जसवीर सिंह का कहना है कि पुलिस पहुंच गई थी, जब डूबे लड़के को उसके लोग बाहर निकाल चुके थे। पुलिस अस्पताल तक साथ आई, लेकिन जान नहीं बची।
जिले के सबसे प्रमुख स्नान घाट भिटौरा ओम घाट है। इसे पर्यटक स्थल बनाए जाने की पुरजोर मांग चल रही है। कार्यालयों में फाइल दौड़ रही है। यहां हर रोज सैकड़ों श्रद्धालुओं का आवाजाही होती है। फुर्सत के लम्हों में पिकनिक मनाने भी लोग आते हैं। पर्व के मौकों पर हजारों की तादाद में भीड़ होती है। इसके बाद भी यहां के इंतजाम बदतर हैं।
दस मिनट पहले पहुंच जाता तो बच जाती जान- जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डाक्टर रवि आनंद और डाक्टर अनुपम सिंह मौजूद थे। दोनों डॉक्टर फौरन इलाज में जुट गए। कई इंजेक्शन छाती पर लगाए। सेक्शन मशीन लगाकर पानी बाहर करने की कोशिश की गई। सारे प्रयास विफल हो गए। पल्स और सांसें दोबारा नहीं लौटी। डॉक्टर अनुपम ने बताया कि आंखों की पुतली से पता चला कि अस्पताल आने से दस मिनट पहले ही आकाश की सांसें थम गई। सही समय पर पहुंच आता तो उसकी जान बचा ली जाती।
घाट में सैर कराने के लिए नाविक पहुंचते- भिटौरा घाट में नाविक सिर्फ सैर कराने के लिए पहुंचते हैं, जबकि घाट पर लगने वाले नाविकों की किसी दुर्घटना पर फौरन प्रयास करना चाहिए। घाट पर बाकायदा मोबाइल नंबर नाविकों के दर्ज हैं, उनमें साफ तौर पर सैर कराने का चार्ज तक लिखा है।
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आकाश पथरकटा चौराहा निवासी दिनेश चंद्र मौर्या का बेटा था। यह ठाकुर युगराज सिंह महाविद्यालय में बीए फाइनल में पढ़ता था। पिता की इलेक्ट्रानिक्स की दुकान में बैठकर उनका हाथ बंटाता था। बाजार बंदी का दिन होने के कारण चचेरे भाई सलोनी मौर्या उर्फ शुभम व मित्रों सत्यम मौर्या, जीतू मौर्या, राहुल साहू के साथ बाइक से भिटौरा गया था।
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बताया कि सबसे पहले आकाश और सलोनी नहाने के लिए नदी में उतरे। दोनों गहराई में चले गए और डूबने लगे। जीतू मौर्या ने बताया कि शोर सुनकर जैसे-तैसे सलोनी को जल्द ही बाहर निकाल लिया, लेकिन आकाश गहराई में डूबने लगा। किसी तरह नाव खेने का डंडा पकड़ाकर छटपटा रहे आकाश को बाहर निकाला गया। निकलते ही आकाश बेहोश हो गया, उसको बाइक से ही जिला अस्पताल लेकर भागे। वहां पर डाक्टरों के प्रयास के बाद जान नहीं बच सकी।
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छलावा साबित हुए सुरक्षा इंतजाम, फिर हुई छात्र की मौत - फतेहपुर। पर्यटक स्थल बनने के मुहाने पर खड़े भिटौरा गंगा घाट पर सुरक्षा का इंतजाम दिखावा भर है। दस दिन पहले बिलंदा की छात्रा की डूबने से मौत हो गई थी, जिसका अभी तक सुराग नहीं लग सका है। गुरुवार को फिर एक छात्र की डूबने से मौत ने सवाल खड़े कर दिए हैं। घाट किनारे पुलिस चौकी भी बनाई गई है, लेकिन आरोप है कि पुलिस घाट पर लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद नहीं रहती है।
मृतक के साथियों ने बताया कि घाट किनारे नावें खड़ी रही हैं। जब आकाश डूब रहा था, तब वे लोग चिल्ला रहे थे और नाविकों से मदद की मंाग की गुहार लगा रहे थे, वहां कोई भी सुनने वाला नहीं था। कोई पुलिस कर्मी भी मौजूद नहीं रहा। किसी तरह से आकाश को बाहर निकाला। वहीं प्राथमिक इलाज और एंबुलेंस का इंतजाम नहीं था। यह सब होता तो उसकी जान बच जाती।
बता दें दस दिन पहले एक परिवार के पांच लोग डूबे थे। हालांकि एक दरोगा और लोगों के प्रयास से परिवार के लोगों की जान बच गई थी, लेकिन छात्रा का कोई सुराग नहीं लगा। दूसरी ओर चौकी इंचार्ज जसवीर सिंह का कहना है कि पुलिस पहुंच गई थी, जब डूबे लड़के को उसके लोग बाहर निकाल चुके थे। पुलिस अस्पताल तक साथ आई, लेकिन जान नहीं बची।
जिले के सबसे प्रमुख स्नान घाट भिटौरा ओम घाट है। इसे पर्यटक स्थल बनाए जाने की पुरजोर मांग चल रही है। कार्यालयों में फाइल दौड़ रही है। यहां हर रोज सैकड़ों श्रद्धालुओं का आवाजाही होती है। फुर्सत के लम्हों में पिकनिक मनाने भी लोग आते हैं। पर्व के मौकों पर हजारों की तादाद में भीड़ होती है। इसके बाद भी यहां के इंतजाम बदतर हैं।
दस मिनट पहले पहुंच जाता तो बच जाती जान- जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डाक्टर रवि आनंद और डाक्टर अनुपम सिंह मौजूद थे। दोनों डॉक्टर फौरन इलाज में जुट गए। कई इंजेक्शन छाती पर लगाए। सेक्शन मशीन लगाकर पानी बाहर करने की कोशिश की गई। सारे प्रयास विफल हो गए। पल्स और सांसें दोबारा नहीं लौटी। डॉक्टर अनुपम ने बताया कि आंखों की पुतली से पता चला कि अस्पताल आने से दस मिनट पहले ही आकाश की सांसें थम गई। सही समय पर पहुंच आता तो उसकी जान बचा ली जाती।
घाट में सैर कराने के लिए नाविक पहुंचते- भिटौरा घाट में नाविक सिर्फ सैर कराने के लिए पहुंचते हैं, जबकि घाट पर लगने वाले नाविकों की किसी दुर्घटना पर फौरन प्रयास करना चाहिए। घाट पर बाकायदा मोबाइल नंबर नाविकों के दर्ज हैं, उनमें साफ तौर पर सैर कराने का चार्ज तक लिखा है।